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Datia News: दतिया में पंचायत घोटालों पर बड़ी कार्रवाई, कई पूर्व सरपंच 6 साल के लिए अयोग्य घोषित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दतिया
Published by: दतिया ब्यूरो
Updated Tue, 17 Feb 2026 10:22 PM IST
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सार
दतिया जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्यों में वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर प्रशासन ने कई पूर्व सरपंचों को छह वर्ष के लिए अयोग्य घोषित किया। संबंधित सचिवों की वेतन वृद्धि रोकी गई और शासकीय राशि की वसूली के निर्देश दिए गए। कार्रवाई से पंचायत स्तर पर जवाबदेही बढ़ी।
घोटाला कार्यालय।
- फोटो : अमर उजाल
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विस्तार
दतिया जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्यों के नाम पर शासकीय राशि निकालकर काम न कराने के मामलों में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। लंबे समय से लंबित शिकायतों और जांच प्रक्रियाओं के बाद कई पूर्व सरपंचों और सचिवों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। दोषी पाए गए जनप्रतिनिधियों को छह वर्ष के लिए पंचायत चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया गया है। वहीं संबंधित सचिवों की वेतन वृद्धि रोकने के आदेश भी जारी किए गए हैं। साथ ही निकाली गई राशि की वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जनपद पंचायत दतिया की ग्राम पंचायत भागोर में ई-कक्ष निर्माण के लिए 12 हजार रुपये की राशि आहरित की गई थी, लेकिन मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं पाया गया। जांच में अनियमितता सिद्ध होने पर तत्कालीन सरपंच रजनी अहिरवार को छह साल के लिए पंचायत सदस्य बनने से अयोग्य करार दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करने पर कठोर वसूली की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
इसी प्रकार ग्राम पंचायत भिटोरा में किचन शेड निर्माण के लिए 60 हजार रुपये निकाले गए, परंतु कार्य पूर्ण नहीं कराया गया। इस मामले में तत्कालीन सरपंच विक्रम दांगी को छह वर्ष के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। साथ ही उस समय पदस्थ सचिव वीरेन्द्र दांगी की एक वेतन वृद्धि रोकने का आदेश दिया गया है। ग्राम पंचायत सुजैड़ में आंगनवाड़ी भवन निर्माण के नाम पर 50 हजार रुपये की राशि का समुचित उपयोग नहीं पाया गया। जांच उपरांत तत्कालीन सरपंच अरविन्द यादव को छह वर्ष के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। इस प्रकरण में जिम्मेदार सचिव धर्मेन्द्र यादव और राधेश्याम यादव की वेतन वृद्धि पर भी रोक लगाई गई है। बरगांय पंचायत में तीन अलग-अलग निर्माण कार्यों के लिए 3 लाख 34 हजार 560 रुपये की राशि निकाली गई थी।
ये भी पढ़ें- 'अंजाम पता था फिर भी बच्चों को बांटा जहर, राहत दी तो उठ जाएगा भरोसा', हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
हालांकि बाद में राशि जमा कराई गई, लेकिन वित्तीय अनियमितता सिद्ध होने पर पूर्व सरपंच लली को छह वर्ष के लिए अयोग्य घोषित किया गया। संबंधित सचिव नरेन्द्र शर्मा की एक वेतन वृद्धि भी रोकी गई है। दिसवार पंचायत में पेवर ब्लॉक निर्माण के लिए 13 हजार 500 रुपये आहरित किए गए थे, जबकि मौके पर निर्माण नहीं मिला और राशि भी समय पर जमा नहीं की गई। इस मामले में भी संबंधित को छह वर्ष के लिए पंचायत से बाहर कर दिया गया है।
वहीं, बुहारा पंचायत में 71 हजार 365 रुपये के निर्माण कार्यों में अनियमितता सामने आई। इस प्रकरण में तत्कालीन सचिव कुसुमा कुशवाहा को छह वर्ष के लिए अयोग्य घोषित किया गया है, जबकि जिम्मेदार सचिव ईश्वरनाथ दांगी और कौशलकिशोर दांगी की वेतन वृद्धि रोक दी गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई को पंचायत स्तर पर वित्तीय अनुशासन स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि शासकीय राशि के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी शिकायतों की गंभीरता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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जनपद पंचायत दतिया की ग्राम पंचायत भागोर में ई-कक्ष निर्माण के लिए 12 हजार रुपये की राशि आहरित की गई थी, लेकिन मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं पाया गया। जांच में अनियमितता सिद्ध होने पर तत्कालीन सरपंच रजनी अहिरवार को छह साल के लिए पंचायत सदस्य बनने से अयोग्य करार दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करने पर कठोर वसूली की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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इसी प्रकार ग्राम पंचायत भिटोरा में किचन शेड निर्माण के लिए 60 हजार रुपये निकाले गए, परंतु कार्य पूर्ण नहीं कराया गया। इस मामले में तत्कालीन सरपंच विक्रम दांगी को छह वर्ष के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। साथ ही उस समय पदस्थ सचिव वीरेन्द्र दांगी की एक वेतन वृद्धि रोकने का आदेश दिया गया है। ग्राम पंचायत सुजैड़ में आंगनवाड़ी भवन निर्माण के नाम पर 50 हजार रुपये की राशि का समुचित उपयोग नहीं पाया गया। जांच उपरांत तत्कालीन सरपंच अरविन्द यादव को छह वर्ष के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। इस प्रकरण में जिम्मेदार सचिव धर्मेन्द्र यादव और राधेश्याम यादव की वेतन वृद्धि पर भी रोक लगाई गई है। बरगांय पंचायत में तीन अलग-अलग निर्माण कार्यों के लिए 3 लाख 34 हजार 560 रुपये की राशि निकाली गई थी।
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हालांकि बाद में राशि जमा कराई गई, लेकिन वित्तीय अनियमितता सिद्ध होने पर पूर्व सरपंच लली को छह वर्ष के लिए अयोग्य घोषित किया गया। संबंधित सचिव नरेन्द्र शर्मा की एक वेतन वृद्धि भी रोकी गई है। दिसवार पंचायत में पेवर ब्लॉक निर्माण के लिए 13 हजार 500 रुपये आहरित किए गए थे, जबकि मौके पर निर्माण नहीं मिला और राशि भी समय पर जमा नहीं की गई। इस मामले में भी संबंधित को छह वर्ष के लिए पंचायत से बाहर कर दिया गया है।
वहीं, बुहारा पंचायत में 71 हजार 365 रुपये के निर्माण कार्यों में अनियमितता सामने आई। इस प्रकरण में तत्कालीन सचिव कुसुमा कुशवाहा को छह वर्ष के लिए अयोग्य घोषित किया गया है, जबकि जिम्मेदार सचिव ईश्वरनाथ दांगी और कौशलकिशोर दांगी की वेतन वृद्धि रोक दी गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई को पंचायत स्तर पर वित्तीय अनुशासन स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि शासकीय राशि के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी शिकायतों की गंभीरता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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