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Dewas News: साइबर ठगी में नौ आरोपी गिरफ्तार, युवाओं को लालच देकर उनके बैंक खातों का करते थे इस्तेमाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
Published by: देवास ब्यूरो
Updated Sun, 01 Feb 2026 10:56 PM IST
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सार
देवास में ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत पुलिस ने म्यूल बैंक खातों से करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया। 9 आरोपी गिरफ्तार किए गए। 2 लाख नकद, 13 लाख फ्रीज, 19 मोबाइल, बैंक दस्तावेज और टाटा नेक्सॉन कार जब्त की गई।
देवास में ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत पुलिस ने म्यूल बैंक खातों से करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया। 9 आरोपी गिरफ्तार किए गए। 2 लाख नकद, 13 लाख फ्रीज, 19 मोबाइल, बैंक दस्तावेज और टाटा नेक्सॉन कार जब्त की गई।
cyber crime
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। म्यूल बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये की साइबर ठगी में लिप्त एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान दो लाख रुपये नकद, 13 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में फ्रीज, 19 अत्याधुनिक मोबाइल फोन, दर्जनों बैंक दस्तावेज और एक कार जब्त की गई है।
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पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (राज्य साइबर सेल) ए. साईं मनोहर के निर्देशन में प्रदेशभर में साइबर अपराधियों के वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने के लिए ऑपरेशन मैट्रिक्स चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद के निर्देश पर जिले को म्यूल अकाउंट मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जयवीरसिंह भदौरिया के मार्गदर्शन और नगर पुलिस अधीक्षक सुमित अग्रवाल के निर्देशन में औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस को सूचना मिली कि कुछ संदिग्ध म्यूल बैंक खाते देवास से संचालित हो रहे हैं। सूचना के आधार पर 8 जनवरी को गंगानगर स्थित होटल श्रीजी में दबिश दी गई।
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होटल के कमरे से हो रहा था करोड़ों का लेन-देन
पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद ने बताया कि आरोपी युवाओं को लालच देकर उनके बैंक खातों का उपयोग करते थे। इन खातों के जरिए शेयर बाजार में निवेश का झांसा देकर लोगों से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी की जाती थी। ठगी की रकम को असली अपराधियों की पहचान छिपाने के लिए म्यूल खातों के माध्यम से इधर-उधर ट्रांसफर किया जाता था।
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होटल के एक कमरे से पांच आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। आरोपियों के मोबाइल फोन और बैंक खातों की जांच में सामने आया कि दो करंट खातों में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है, जिसका कोई वैध स्पष्टीकरण वे नहीं दे सके। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश का लालच देकर ठगी की गई राशि खातों में ट्रांसफर करवाते थे और बाद में रकम निकालकर फरार हो जाते थे। पुलिस ने बीएनएस और मध्यप्रदेश निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रेल के आधार पर गिरोह के चार एजेंटों सहित कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों में मुनेश्वर उर्फ मनीष सेन (38) दमोह, पीयूष बिल्लोरे (24) इंदौर, शुभम जोशी (29) टोंक (राजस्थान), आशीष उर्फ गोलू जैन (42) दमोह, गौरव जैन (42) सिवनी/जबलपुर, मंजीत सिंह भाटी (31) इंदौर, नितेश बिरला (26) इंदौर, जितेंद्र उर्फ जितू उर्फ लेफ्टी राजपूत (27) इंदौर और शुभम उर्फ शुब्बु परमार (28) इंदौर शामिल हैं।
29.77 लाख की संपत्ति जब्त
आरोपियों के कब्जे से 19 मोबाइल फोन, चेकबुक, एटीएम कार्ड, आधार-पैन कार्ड, वाई-फाई डिवाइस, सीसीटीवी कैमरे और एक टाटा नेक्सॉन कार जब्त की गई है। जब्त संपत्ति की अनुमानित कीमत 29 लाख 77 हजार रुपये आंकी गई है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

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