{"_id":"6a8292cec080cfa46d0ca7e2","slug":"female-students-jumped-out-of-the-window-and-set-out-on-foot-at-midnight-dhar-news-c-1-1-noi1504-4619535-2026-08-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP News: दूषित पानी-खराब भोजन के खिलाफ छात्राओं ने निकाला मार्च, प्रशासन ने शुरू की जांच, अधीक्षिका को हटाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP News: दूषित पानी-खराब भोजन के खिलाफ छात्राओं ने निकाला मार्च, प्रशासन ने शुरू की जांच, अधीक्षिका को हटाया
Mon, 17 Aug 2026 11:18 PM IST
धार ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
Published by: धार ब्यूरो
Updated Mon, 17 Aug 2026 11:18 PM IST
सार
40 आदिवासी छात्राओं ने छात्रावास की बदहाली, दूषित पानी, खराब भोजन और अधीक्षिका की अनुपस्थिति से परेशान होकर आधी रात खिड़की से बाहर निकलकर कलेक्टोरेट की ओर पैदल मार्च किया। प्रशासन ने शिकायतें दर्ज कर जांच समिति गठित की। अधीक्षिका को हटाकर विभागीय जांच शुरू की गई और सुविधाएं तत्काल सुधारने के निर्देश दिए।
विज्ञापन
छात्राओं की बातें सुनते अधिकारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
शासकीय कन्या आदिवासी छात्रावास की बदहाली और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से परेशान होकर 40 आदिवासी छात्राओं ने आधी रात को खिड़की खोलकर बाहर निकलकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्राओं ने छात्रावास प्रबंधन की लापरवाही और खराब खाने की शिकायतों पर सुनवाई न होने पर रात में ही ढाई किलोमीटर की दूरी पैदल तय करके कलेक्टोरेट का रुख किया।
छात्राओं के इस अप्रत्याशित कदम से जिला प्रशासन और जनजातीय कार्य विभाग में हड़कंप मच गया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, बालिकाओं ने छात्रावास अधीक्षिका पर नियमित रूप से अनुपस्थित रहने, दूषित पेयजल आपूर्ति और गुणवत्ताहीन भोजन देने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
खिड़की तोड़कर बाहर निकलीं छात्राएं
पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात लगभग 12 बजे छात्रावास का मुख्य द्वार बंद था। समस्याओं से त्रस्त छात्राओं ने बाहर निकलने के लिए कमरे की खिड़की का सहारा लिया। एक-एक करके 40 छात्राएं खिड़की से बाहर निकलीं और गोलबंद होकर सड़क पर पैदल चलने लगीं। छात्राओं ने बताया कि वे लंबे समय से साफ पानी, स्वच्छ शौचालयों और पौष्टिक भोजन की मांग कर रही थीं। कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन देने के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्हें मजबूरन यह कदम उठाना पड़ा। अंधेरी रात में छात्राओं के पैदल मार्च की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक दल मौके पर पहुंचा।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- सराफा व्यापारी से करोड़ों की लूट: सातवां आरोपी भी 20 तक पुलिस रिमांड पर, आठवें में इंदौर में की जा रही तलाश
प्रशासनिक अमले में मचा हड़कंप
प्रशासन के अधिकारियों ने रात में ही छात्राओं को बीच रास्ते में रोककर उनसे बातचीत की। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त ने छात्राओं की शिकायतों को दर्ज किया और सुरक्षा का पूरा भरोसा दिया। अधिकारियों ने छात्राओं को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और उनकी मांगों पर त्वरित जांच का आश्वासन दिया। राजस्व अधिकारी के अनुसार, छात्राओं ने अधीक्षिका के खिलाफ लिखित शिकायत सौंपी है, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं और कमरों में गंदगी की बात कही गई है।
जांच समिति गठित और कार्रवाई का आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। जिला प्रशासन की विज्ञप्ति में कहा गया है कि जांच समिति 24 घंटे के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि छात्रावास अधीक्षिका को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है और विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद ही छात्राओं ने धरना समाप्त किया। प्रशासन ने छात्रावास में तत्काल प्रभाव से नए टैंकर और सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
विज्ञापन
छात्राओं के इस अप्रत्याशित कदम से जिला प्रशासन और जनजातीय कार्य विभाग में हड़कंप मच गया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, बालिकाओं ने छात्रावास अधीक्षिका पर नियमित रूप से अनुपस्थित रहने, दूषित पेयजल आपूर्ति और गुणवत्ताहीन भोजन देने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
विज्ञापन
खिड़की तोड़कर बाहर निकलीं छात्राएं
पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात लगभग 12 बजे छात्रावास का मुख्य द्वार बंद था। समस्याओं से त्रस्त छात्राओं ने बाहर निकलने के लिए कमरे की खिड़की का सहारा लिया। एक-एक करके 40 छात्राएं खिड़की से बाहर निकलीं और गोलबंद होकर सड़क पर पैदल चलने लगीं। छात्राओं ने बताया कि वे लंबे समय से साफ पानी, स्वच्छ शौचालयों और पौष्टिक भोजन की मांग कर रही थीं। कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन देने के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्हें मजबूरन यह कदम उठाना पड़ा। अंधेरी रात में छात्राओं के पैदल मार्च की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक दल मौके पर पहुंचा।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- सराफा व्यापारी से करोड़ों की लूट: सातवां आरोपी भी 20 तक पुलिस रिमांड पर, आठवें में इंदौर में की जा रही तलाश
प्रशासनिक अमले में मचा हड़कंप
प्रशासन के अधिकारियों ने रात में ही छात्राओं को बीच रास्ते में रोककर उनसे बातचीत की। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त ने छात्राओं की शिकायतों को दर्ज किया और सुरक्षा का पूरा भरोसा दिया। अधिकारियों ने छात्राओं को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और उनकी मांगों पर त्वरित जांच का आश्वासन दिया। राजस्व अधिकारी के अनुसार, छात्राओं ने अधीक्षिका के खिलाफ लिखित शिकायत सौंपी है, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं और कमरों में गंदगी की बात कही गई है।
जांच समिति गठित और कार्रवाई का आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। जिला प्रशासन की विज्ञप्ति में कहा गया है कि जांच समिति 24 घंटे के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि छात्रावास अधीक्षिका को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है और विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद ही छात्राओं ने धरना समाप्त किया। प्रशासन ने छात्रावास में तत्काल प्रभाव से नए टैंकर और सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

छात्राओं की बातें सुनते अधिकारी
