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Dhar News: इदौर–दाहोद रेल प्रोजेक्ट भुगतान में देरी के बाद काम रुका, छोटे वेंडरों का करोड़ों बकाया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार Published by: धार ब्यूरो Updated Mon, 04 May 2026 08:25 PM IST
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सार

धार के इंदौर–दाहोद रेल प्रोजेक्ट का काम भुगतान विवाद में फंसा है। 25 किमी सेक्शन में प्रगति 10% से कम है। वेंडरों के करोड़ों रुपए बकाया हैं, भुगतान न मिलने पर काम ठप है। एजेंसी बदलने के बाद भी विवाद जारी, प्रोजेक्ट में देरी बढ़ती जा रही है।

Indore-Dahod Rail ProjectWork halted due to delayed payments, with small vendors owed crores
विरोध करते हुए ठेकेदार
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विस्तार

धार में इंदौर–दाहोद रेल प्रोजेक्ट इन दिनों निर्माण से ज्यादा भुगतान विवाद में फंसा हुआ है। धार से अमझेरा तक 25 किलोमीटर के इस महत्वपूर्ण रेल सेक्शन का काम तय समय-सीमा के बाद भी 10 प्रतिशत तक नहीं पहुंच पाया है।

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इस प्रोजेक्ट का ठेका जीकेसी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को दिया गया था। कंपनी ने काम सीधे करने के बजाय पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर सौंप दिया। शुरुआत में सनवर्स रेल टेक बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड को काम दिया गया, जिसने स्थानीय स्तर पर मशीनें, मजदूर और संसाधन लगाकर काम शुरू कराया। लेकिन धीरे-धीरे भुगतान में देरी शुरू हुई और वेंडरों का बकाया बढ़ता चला गया। उनका साफ कहना है कि जब तक बकाया भुगतान नहीं मिलेगा, तब तक प्लांट से कोई भी मशीन या सामग्री बाहर नहीं जाने दी जाएगी। वेंडरों का दावा है कि प्लांट में अभी भी 2 से 2.5 करोड़ रुपए का माल मौजूद है, जिससे उन्हें अपने भुगतान की उम्मीद है।
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आरोप है कि जैसे ही भुगतान का दबाव बढ़ा, कंपनी ने एजेंसी बदल दी और काम कोंडर कंपनी को सौंप दिया। एजेंसी बदलने के बाद भी पुराने वेंडरों का भुगतान नहीं हुआ। यही वजह है कि अब विवाद खुलकर सामने आ गया है और काम लगभग ठप पड़ गया है। भजनलाल इंटरप्राइजेज के ओम प्रकाश बिश्नोई का कहना है कि वे पिछले 18 महीनों से काम कर रहे थे, लेकिन पिछले 6 महीनों से भुगतान बंद है। उनका अकेले 80 से 85 लाख रुपए फंसा हुआ है, जबकि कुल बकाया 3 करोड़ रुपए से अधिक तक पहुंच चुका है। उनका आरोप है कि भुगतान मांगने पर कंपनी के जिम्मेदार लोग बदल जाते हैं और उन्हें टाल दिया जाता है, यहां तक कि धमकियां भी दी जा रही हैं। कोंडर कंपनी के पार्टनर भागचंद का कहना है कि पुराने भुगतान से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट पहले से ही भूमि अधिग्रहण और अन्य तकनीकी कारणों से देरी का शिकार रहा है। इसी वजह से सरकार से एक साल का एक्सटेंशन मांगा गया है और कंपनी जल्द काम पूरा करने का दावा कर रही है।

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