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MP News: कोर्ट के आदेश के बाद धार में 130 ताजिए निकालने की तैयारी; छह डीएसपी समेत 350 जवानों का पुलिस बल तैनात

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार Published by: धार ब्यूरो Updated Thu, 25 Jun 2026 07:02 PM IST
सार

सरकारी इमामबाड़े में ताजिया निर्माण की अनुमति मिलने के कोर्ट के फैसले का धार के मुस्लिम समुदाय ने स्वागत किया है। अंतरिम राहत मिलने के बाद शहर में अब 130 ताजिए निकालने की तैयारी की जा रही है। वहीं प्रशासन ने धार में 350 का पुलिसबल तैनात कर दिया है।  

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MP High Court Orders issued to open the Imambara, SDO to hand over the keys
शहर में पुलिस बल तैनात

विस्तार

शहर में स्थित सरकारी इमामबाड़े में ताजिया निर्माण को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने सुनवाई के दौरान नया आदेश जारी किया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता पक्ष को बड़ी राहत देते हुए मोहर्रम के त्योहार के मद्देनजर केवल कुछ दिनों के लिए सरकारी इमामबाड़े की चाबियां सौंपने का आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट के जस्टिस सुबोध अभयंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह अंतरिम राहत प्रदान की है। नए आदेश आने के बाद शहर में पुलिस की चौकसी बढ़ा दी गई हैं, नगर में लगातार पुलिस के वाहन पेट्रोलिंग कर रहे है। 

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शहर में निकलेंगे 130 ताजिए
इमामबाड़े को लेकर कानूनी दांवपेच के बीच समाज मोहर्रम पर्व के अंतिम दिन शहर में ताजिये लेकर निकलेंगे। नगर की प्रमुख मुस्लिम बाहुल्य बस्तियों में छोटे व बड़े मिलाकर कुल 130 ताजियों का निर्माण किया गया है। गुरुवार देर रात को ताजिए निकालने का क्रम शुरू हो जाएगा, शुक्रवार सुबह तक सभी ताजिए जिला प्रशासन द्वारा तय मार्ग से होकर निकलेंगे। इसके बाद पुन शुक्रवार शाम को ताजिए निकलने की शुरुआत होगी। अंत में सभी ताजिए प्रशासन द्वारा नियत कर्बला तक पहुंचेंगे। जहां पर नगर पालिका द्वारा उचित व्यवस्था की गई है। आदेश के बाद अब सभी ताजिए इमामबाड़ा भी पहुंचेंगे, यहीं से रूट मार्ग पर ताजिये निकलने की शुरुआत होगी।
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शहर में पुलिस बल तैनात
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प्रशासन की पैनी नजर
इमामबाड़ा विवाद को लेकर प्रशासन पिछले एक सप्ताह से अलर्ट है। दो दिन पूर्व फैली एक अफवाह के कारण बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज इमामबाड़ा पहुंच गया था। ऐसे में प्रशासनिक अमला गुरुवार सुबह से ही पूरे क्षेत्र में लगातार भ्रमण कर रहा है। ताजिए मार्ग पर पुलिस के जवानों को मुस्तैद किया गया है, मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र की संकरी गालियों में जवान पैदल ही भ्रमण करेंगे। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। शहर में एसएएफ की एक कंपनी, एक दर्जन थाना प्रभारी, छह डीएसपी सहित सीएसपी व 350 का पुलिसबल तैनात किया गया है। संवेदनशील इलाकों में बाइक और मोबाइल पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है, जबकि हाइराइज भवनों से भी निगरानी रखी जाएगी। 

दरअसल शहर के सरकारी इमामबाड़े में पारंपरिक रूप से ताजिया निर्माण की अनुमति को लेकर दो अलग-अलग याचिकाएं (डब्ल्यूपी-नंबर. 37514/2025 और डब्ल्यूपी- नंबर 15440/2026) कोर्ट में लंबित हैं। जिला प्रशासन ने पूर्व में इस आधार पर अनुमति देने से इनकार कर दिया था कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाए थे कि वे आधिकारिक तौर पर 'सरकारी ताजिया समिति' के सदस्य या पदाधिकारी हैं। इसके अलावा, प्रशासन की ओर से छोटा इमामबाड़ा और जमात खाना में ताजिया निर्माण के लिए एक वैकल्पिक जगह भी सुझाई गई थी। प्रशासन का तर्क था कि इस संपत्ति को लेकर दीवानी मुकदमा पहले ही तय हो चुका है और मध्य प्रदेश लोक परिसर बेदखली अधिनियम, 1974 के तहत बेदखली के आदेश जारी किए जा चुके हैं।

ये भी पढ़ें:धार के इमामबाड़ा में ताजिए रखने की कोर्ट ने दी अनुमति; चाबियां एक जुलाई को फिर लौटाई जाएंगी

त्यौहार को देखते हुए निर्णय
याचिकाकर्ता सिद्दीकी और अन्य की ओर से पेश हुए वकील ने कोर्ट के समक्ष एसडीओ कार्यालय और प्रशासन के ही कुछ पुराने नोटिस और दस्तावेज पेश किए, जिनमें याचिकाकर्ताओं को 'सरकारी ताजिया समिति' का 'सदर' (अध्यक्ष) और पूर्व उपाध्यक्ष संबोधित किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि उन्हें मोहर्रम के त्योहार को संपन्न करने के लिए केवल सिर्फ कुछ दिनों के लिए ही अस्थायी कब्जा चाहिए, जिसके बाद वे संपत्ति को सुरक्षित प्रशासन को सौंप देंगे। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि चूंकि मुख्य मामले में पक्षों के कानूनी अधिकारों का पूरी तरह तय होना अभी बाकी है, और पिछले साल भी यथास्थिति के तहत यहां ताजिया निर्माण हुआ था, इसलिए त्योहार की संवेदनशीलता को देखते हुए मुस्लिम समुदाय को पांच दिनों के लिए समायोजित करने से राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया जब तक विवादित संपत्ति याचिकाकर्ताओं के कब्जे में रहेगी, याचिकाकर्ताओं द्वारा निर्माण के माध्यम से कोई बदलाव या उसका कोई हिस्सा हटाया नहीं जाएगा और संपत्ति साफ-सुथरी स्थिति में राज्य को सौंपी जाएगी।

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