Dhar News: 16 लोगों की मौत के जिम्मेदार चालक पर गैर इरादतन हत्या का केस, बगैर लाइसेंस चला रहा था गाड़ी
धार के तिरला बायपास हादसे में 16 लोगों की मौत हुई, चालक बिना लाइसेंस और दस्तावेज के लापरवाही से वाहन चला रहा था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया। जिले में हादसे घटे हैं, फिर भी 14 ब्लैक स्पॉट और सुरक्षा खामियां चिंता का कारण हैं।
विस्तार
आदिवासी बाहुल्य- अंचल धार में छह साल तक लगातार प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में मौत के मामलों में पहले स्थान पर रहने वाला यह जिला हाल ही में दूसरे पायदान पर आया ही था। किंतु तिरला बायपास पर हुए भीषण हादसे ने एक बार फिर सिस्टम और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। तिरला क्षेत्र में हुए इस दर्दनाक हादसे में 16 लोगों की मौत केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरे सरकारी विभाग के तंत्रों की कमजोरियों का प्रतीक बनकर सामने आई है। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई हैं, पुलिस ने वाहन चालक राधेश्याम पिता कालू को गिरफ्तार किया तो आरोपी के पास ड्राइविंग का लाइसेंस ही नहीं था। साथ ही राधेश्याम रिश्तेदार की गाड़ी को किराए पर चलाता था, वाहन संबंधित दस्तावेज भी नहीं मिले हैं। ऐसे में पुलिस ने आरटीओ विभाग को पत्र लिखकर गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सहित वैध दस्तावेजों की जानकारी मांगी है, ताकि आरोपी के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जा सके। इधर मामले की जांच में जुटी पुलिस ने राधेश्याम के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या के तहत प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है।
खतरनाक तरीके से चलाया था वाहन
दरअसल तिरला थाना अंतर्गत चिकल्यान फाटे पर 29 अप्रैल की रात हादसा हुआ था। हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि चालक की घोर लापरवाही का परिणाम था। मजदूरी कर लौट रहे श्रमिकों से भरी पिकअप एमपी 13 जेडटी 6776 को चालक राधेश्याम ने तेज रफ्तार में गलत दिशा में मोड़ दिया, जिससे 16 परिवारों के चिराग बुझा दिए और 25 से अधिक लोग अब भी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। पुलिस की जांच के अनुसार पिकअप वाहन का ड्राइवर राधेश्याम जानबूझकर तेजगति व खतरनाक तरीके से वाहन चला रहा था। घटना स्थल पर पिकअप को रोड़ के डिवाइडर पर चढ़ाकर रांग साइड पर ले गया और सामने से आ रही एक स्कार्पियो गाड़ी को टक्कर मार कर पिकअप को पलटी खिला दिया था। वाहन की गति अधिक होने के दौरान पिकअप का टायर फटा व स्कार्पियों से टकरा गया। हादसे में मजदूर पिकअप से बाहर गिर गए थे, जिसके कारण ही मतकों की संख्या बढ़ी है। पूछताछ में आरोपी राधेश्याम ने बताया कि हादसे के दौरान गाड़ी से कूद गया था, इसी कारण 16 लोगों की मौत के बावजूद उसे कुछ नहीं हुआ।
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14 ब्लैक स्पॉट चिन्हित
यह घटना ऐसे समय हुई है जब जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर किए गए प्रयासों के सकारात्मक परिणाम दिखने लगे थे। 2026 की पहली तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि जिले में सड़क हादसों में मौतों में 17% की गिरावट दर्ज की गई थी—पिछले छह वर्षों में पहली बार इतनी बड़ी कमी देखने को मिली। यह गिरावट ब्लैक स्पॉट सुधार, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन और त्वरित चिकित्सा सहायता जैसी पहलों का परिणाम मानी जा रही थी। प्रदेश में वर्तमान स्थिति के अनुसार सड़क हादसों में सबसे असुरक्षित जिला जबलपुर है, धार जिला दूसरे स्थान पर आता है, रीवा तीसरे, बैतूल चौथे तो सागर पांचवें स्थान पर है। ट्रैफिक विभाग ने जिले में 14 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए हैं। प्रशासन की सक्रियता से गणेश घाट जैसे डेथ जोन पर 108 करोड़ की लागत से बायपास बनाकर सुधार किया गया, जहां कभी 300 से अधिक मौतें हुई थीं, हालांकि, अन्य स्थानों पर अब भी खतरा बरकरार है। सुधार के बावजूद हकीकत यह है कि धार आज भी देश के सबसे खतरनाक जिलों में गिना जा सकता है।
आंकडों में समझें हादसे
• हर महीने औसतन 190 सड़क हादसे
• हर महीने 50+ मौतें
• 2023: 711 मौतें
• 2024: 614 मौतें
• 2025: 600+ मौतें
इन थाना क्षेत्रों में घटी संख्या
• धामनोद: 20 से घटकर 17
• मनावर: 19 से 18
• बदनावर: 18 से 16
• पीथमपुर: 15 से 8
• कुक्षी: 10 से 3
सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ओवरलोडिंग वाहनों पर सतत कार्रवाई करें, साथ ही यातायात नियमों की जानकारी देने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। जिले में सड़क हादसों में हो रही मौत के आंकड़ों को कम करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले 6 वर्षों के बाद सड़क हादसों में होने वाली मृत्यु के आंकड़ों में 18 फीसदी की कमी इस साल आई है।
-मयंक अवस्थी, पुलिस अधीक्षक, धार

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