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नशीली कफ सिरपः तीन मास्टरमांइड पर 90 हजार का इनाम, हरिद्वार की कंपनी का स्टिकर, ग्रामीण क्षेत्र में सप्लाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Dinesh Sharma
Updated Mon, 01 Jun 2026 11:13 PM IST
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सार
भोपाल और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में नशीली कफ सिरप के बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का एसटीएफ ने भंडाफोड़ किया। गांधी नगर और मुबारकपुर से कुल दो करोड़ रुपये की कफ सिरप बरामद हुई। तीन फरार मास्टरमाइंडों पर 30-30 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। मेडिकल स्टोरों तक फैले नेटवर्क की जांच जारी है।
एसटीएफ ने मुबारकपुर में नशीली दवाएं पकड़ीं
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी भोपाल और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में नसों में जहर घोलने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने पर्दाफाश किया है। भोपाल के गांधी नगर में डेढ़ करोड़ रुपये की नशीली कफ सिरप पकड़े जाने के बाद, अब परबलिया थाना क्षेत्र के मुबारकपुर में एक और गुप्त गोदाम का खुलासा हुआ है, जहां से 50 लाख रुपये कीमत की कफ सिरप बरामद की गई है। इस पूरे काले कारोबार का जाल भोपाल के ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर आसपास के कई जिलों के मेडिकल स्टोरों तक फैला हुआ था। गिरोह के तीन मुख्य सरगना अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। एसटीएफ ने तीनों फरार मास्टरमाइंडों पर 30-30 हजार रुपये (कुल 90 हजार रुपये) का इनाम घोषित किया।
फर्जी नाम, असली पहचान छुपाने का शातिर पैंतरा
एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि इस सिंडिकेट के तार बेहद गहराई से जुड़े हैं। फरार चल रहे तीन मुख्य आरोपियों की पहचान उजागर हो चुकी है, जो पुलिस और कानून से बचने के लिए लगातार अपने फर्जी नामों का इस्तेमाल कर रहे हैं। फरार आरोपी अर्जुन मालवीय (उर्फ राहुल कुशवाह) निवासी टीला खेड़ी, नितिन साहू (उर्फ निखिल कुशवाह) निवासी करीम बक्स कॉलोनी और सलमान (उर्फ बाबू भाई) है। यह तीनों आरोपी हर जगह अपनी फर्जी पहचान बताते थे, ताकि मुख्य सप्लायर के तौर पर कभी इनका असली नाम सामने न आ सके। पुलिस की टीमें इनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। आरोपी केवल नशीली दवाइयाँ सप्लाई नहीं कर रहे थे, बल्कि भोपाल के गांधी नगर में बाकायदा एक री-पैकिंग और री-सीलिंग फैक्ट्री संचालित कर रहे थे। वहीं, परबलिया के मुबारकपुर में भारी मात्रा में स्टॉक जमा करने के लिए एक गुप्त गोदाम बनाया गया था।
ये भी पढ़ें- नशे का काला कारोबार बेनकाब, 50 लाख की नशीली कफ सिरप बरामद, STF की रेड में ड्रग नेटवर्क का बड़ा खुलासा
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सामान्य सिरप से कई गुना नशीली है यह सिरप
गिरफ्तार मुख्य आरोपी अकील खान और आकाश भाटी से एसटीएफ की पूछताछ में मुबारकपुर वाले गोदाम का राज उगला। आरोपियों ने कबूल किया कि जब्त की गई ओप कफ सिरप का नशा बाजार में मिलने वाली सामान्य नशीली सिरप (जैसे ओनेक्स) से कहीं गुना ज्यादा और घातक है। गिरोह दवाओं की प्रामाणिकता दिखाने के लिए उत्तराखंड के हरिद्वार की एक प्रतिष्ठित दवा कंपनी के नाम का फर्जी स्टीकर इस्तेमाल कर रहे थे। जब्त सिरप के नमूनों की शुरुआती लैब जांच में यह बात सामने आई है कि इसमें कोडीन फॉस्फेट और एक अन्य प्रतिबंधित नशीला पदार्थ अत्यधिक मात्रा में मिलाया गया है। यह एक ऐसा फॉर्मूलेशन है जिसे बिना किसी वैध डॉक्टर के पर्चे (चिकित्सकीय परामर्श) के बेचना या रखना पूरी तरह गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है।
ग्रामीण क्षेत्रों के मेडिकल स्टोर निशाने पर
यह सिंडिकेट युवाओं और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूरों व छात्रों को अपना निशाना बना रहा था। भोपाल के साथ-साथ सीहोर, विदिशा और रायसेन जैसे नजदीकी जिलों के ग्रामीण इलाकों के मेडिकल स्टोरों पर यह नशीली कफ सिरप धड़ल्ले से सप्लाई की जा रही थी। कम समय में अंधाधुंध मुनाफा कमाने के चक्कर में कई छोटे मेडिकल स्टोर संचालक भी इस रैकेट का हिस्सा बन चुके थे। एसटीएफ अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि हरिद्वार से इतनी बड़ी मात्रा में नशीला लिक्विड भोपाल तक कैसे पहुंच रहा था और इस पूरे नेटवर्क में दवा विभाग के स्थानीय स्तर पर कौन से लोग आंखें मूंदे बैठे थे।
फर्जी नाम, असली पहचान छुपाने का शातिर पैंतरा
एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि इस सिंडिकेट के तार बेहद गहराई से जुड़े हैं। फरार चल रहे तीन मुख्य आरोपियों की पहचान उजागर हो चुकी है, जो पुलिस और कानून से बचने के लिए लगातार अपने फर्जी नामों का इस्तेमाल कर रहे हैं। फरार आरोपी अर्जुन मालवीय (उर्फ राहुल कुशवाह) निवासी टीला खेड़ी, नितिन साहू (उर्फ निखिल कुशवाह) निवासी करीम बक्स कॉलोनी और सलमान (उर्फ बाबू भाई) है। यह तीनों आरोपी हर जगह अपनी फर्जी पहचान बताते थे, ताकि मुख्य सप्लायर के तौर पर कभी इनका असली नाम सामने न आ सके। पुलिस की टीमें इनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। आरोपी केवल नशीली दवाइयाँ सप्लाई नहीं कर रहे थे, बल्कि भोपाल के गांधी नगर में बाकायदा एक री-पैकिंग और री-सीलिंग फैक्ट्री संचालित कर रहे थे। वहीं, परबलिया के मुबारकपुर में भारी मात्रा में स्टॉक जमा करने के लिए एक गुप्त गोदाम बनाया गया था।
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ग्रामीण क्षेत्रों के मेडिकल स्टोर निशाने पर
यह सिंडिकेट युवाओं और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूरों व छात्रों को अपना निशाना बना रहा था। भोपाल के साथ-साथ सीहोर, विदिशा और रायसेन जैसे नजदीकी जिलों के ग्रामीण इलाकों के मेडिकल स्टोरों पर यह नशीली कफ सिरप धड़ल्ले से सप्लाई की जा रही थी। कम समय में अंधाधुंध मुनाफा कमाने के चक्कर में कई छोटे मेडिकल स्टोर संचालक भी इस रैकेट का हिस्सा बन चुके थे। एसटीएफ अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि हरिद्वार से इतनी बड़ी मात्रा में नशीला लिक्विड भोपाल तक कैसे पहुंच रहा था और इस पूरे नेटवर्क में दवा विभाग के स्थानीय स्तर पर कौन से लोग आंखें मूंदे बैठे थे।

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