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MP: दो दिन पहले केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने प्रशासन की थी तारीफ, अब विधायक ने कलेक्टर को बताया नाकारा; मचा बवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना
Published by: गुना ब्यूरो
Updated Thu, 19 Mar 2026 09:22 PM IST
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सार
गुना में नवसंवत्सर के अवसर पर आयोजित विक्रमोत्सव कार्यक्रम के दौरान विधायक पन्नालाल शाक्य ने मंच से ही जिला प्रशासन को ‘नकारा’ बताते हुए कार्यशैली पर तीखा हमला बोला। कलेक्टर की मौजूदगी में दिए गए इस बयान ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानें इस बीच विधायक ने और क्या-क्या कहा?
गुना विधायक ने प्रशासन पर की गंभीर टिप्पणी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गुना में आयोजित नवसंवत्सर के अवसर पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए। मानस भवन में आयोजित विक्रमोत्सव कार्यक्रम के दौरान गुना विधायक पन्नालाल शाक्य ने मंच से ही जिला प्रशासन की कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी करते हुए उसे ‘नकारा’ तक कह दिया। खास बात यह रही कि कार्यक्रम में कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल स्वयं मौजूद थे, जिससे इस बयान की गंभीरता और भी बढ़ गई।
यह घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि दो दिन पहले में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुना जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली की सराहना की थी। ऐसे में कुछ ही दिनों के भीतर एक ही प्रशासन को लेकर विपरीत प्रतिक्रियाएं सामने आना स्थानीय प्रशासनिक हालात और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय पर सवाल खड़े करता है।
'अधिकारी केवल कागजों में काम करने तक सीमित'
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से नवसंवत्सर उत्सव के तहत हुई, जिसमें सम्राट विक्रमादित्य पर आधारित एक नाटिका का मंचन भी किया गया। इस सांस्कृतिक आयोजन के बीच जब विधायक शाक्य ने संबोधन शुरू किया, तो उनका रुख प्रशासन के प्रति काफी आक्रामक नजर आया। उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल कागजों में काम करने तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर परिणाम दिखाई नहीं देते।
अधिकारियों को किया आगाह
अपने भाषण में उन्होंने गुनिया नदी से जुड़े कार्यों का विशेष उल्लेख करते हुए अधिकारियों को आगाह किया कि इस परियोजना को हल्के में न लिया जाए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में कई प्रभावशाली लोग बाधा डालने की कोशिश करेंगे, जो दिल्ली, भोपाल और ग्वालियर से दबाव बनवा सकते हैं। ऐसे में प्रशासन को दृढ़ता के साथ काम करना होगा और किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आना चाहिए।
'तो भविष्य में भी ऐसे ही “नकारा अफसर” आते-जाते रहेंगे'
विधायक ने यह भी कहा कि वे हर कदम पर प्रशासन के साथ खड़े हैं, लेकिन केवल कागजी कार्रवाई से विकास संभव नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में काम करेंगे, तो जनता उन्हें याद रखेगी, जैसे पहले के कुछ कलेक्टरों को आज भी उनके कार्यों के लिए याद किया जाता है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी भी की और कहा कि यदि अधिकारी सख्ती से काम करें, तो जिले में तेजी से सुधार हो सकता है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि अब भी सुधार नहीं हुआ, तो भविष्य में भी ऐसे ही “नकारा अफसर” आते-जाते रहेंगे और स्थिति जस की तस बनी रहेगी।
ये भी पढ़ें- Indore Fire Tragedy: सात फीट की सीढ़ी और कमजोर वेल्डिंग ने बचाईं चार जिंदगियां, बेडरूम तक पहुंच गई थी आग
कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ अभिषेक दुबे और सांसद प्रतिनिधि हरि सिंह यादव भी उपस्थित रहे। हालांकि इस दौरान प्रशासन की ओर से विधायक के आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। यह पूरा घटनाक्रम न केवल गुना जिले की प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता है। विकास कार्यों की गति और गुणवत्ता को लेकर उठे ये सवाल आने वाले समय में जिले की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
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यह घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि दो दिन पहले में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुना जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली की सराहना की थी। ऐसे में कुछ ही दिनों के भीतर एक ही प्रशासन को लेकर विपरीत प्रतिक्रियाएं सामने आना स्थानीय प्रशासनिक हालात और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय पर सवाल खड़े करता है।
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'अधिकारी केवल कागजों में काम करने तक सीमित'
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से नवसंवत्सर उत्सव के तहत हुई, जिसमें सम्राट विक्रमादित्य पर आधारित एक नाटिका का मंचन भी किया गया। इस सांस्कृतिक आयोजन के बीच जब विधायक शाक्य ने संबोधन शुरू किया, तो उनका रुख प्रशासन के प्रति काफी आक्रामक नजर आया। उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल कागजों में काम करने तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर परिणाम दिखाई नहीं देते।
अधिकारियों को किया आगाह
अपने भाषण में उन्होंने गुनिया नदी से जुड़े कार्यों का विशेष उल्लेख करते हुए अधिकारियों को आगाह किया कि इस परियोजना को हल्के में न लिया जाए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में कई प्रभावशाली लोग बाधा डालने की कोशिश करेंगे, जो दिल्ली, भोपाल और ग्वालियर से दबाव बनवा सकते हैं। ऐसे में प्रशासन को दृढ़ता के साथ काम करना होगा और किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आना चाहिए।
'तो भविष्य में भी ऐसे ही “नकारा अफसर” आते-जाते रहेंगे'
विधायक ने यह भी कहा कि वे हर कदम पर प्रशासन के साथ खड़े हैं, लेकिन केवल कागजी कार्रवाई से विकास संभव नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में काम करेंगे, तो जनता उन्हें याद रखेगी, जैसे पहले के कुछ कलेक्टरों को आज भी उनके कार्यों के लिए याद किया जाता है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी भी की और कहा कि यदि अधिकारी सख्ती से काम करें, तो जिले में तेजी से सुधार हो सकता है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि अब भी सुधार नहीं हुआ, तो भविष्य में भी ऐसे ही “नकारा अफसर” आते-जाते रहेंगे और स्थिति जस की तस बनी रहेगी।
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कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ अभिषेक दुबे और सांसद प्रतिनिधि हरि सिंह यादव भी उपस्थित रहे। हालांकि इस दौरान प्रशासन की ओर से विधायक के आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। यह पूरा घटनाक्रम न केवल गुना जिले की प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता है। विकास कार्यों की गति और गुणवत्ता को लेकर उठे ये सवाल आने वाले समय में जिले की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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