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हिरासत में मौत मामला: 'आपके सारे प्रयास दिखावटी, लाचारी प्रकट मत करिए', मप्र सरकार और सीबीआई को सुप्रीम फटकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/ गुना Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Thu, 25 Sep 2025 08:18 PM IST
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सार

गुना जिले में हिरासत में हुई देवा पारधी की मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मप्र सरकार और सीबीआई को फटकार लगाई। फरार पुलिस अधिकारी संजीत मावई व उत्तम कुशवाहा को निलंबित करने में देरी पर अवमानना की चेतावनी दी। दोनों पर 2-2 लाख का इनाम घोषित, गैर-जमानती वारंट जारी हुए।

Guna News: CBI announces reward of Rs 2 lakh each on two absconding police officers
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार

मध्य प्रदेश के गुना जिले के म्याना थाना क्षेत्र में हुई देवा पारधी की हिरासत में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार और सीबीआई को फटकार लगाई है। शीर्ष कोर्ट ने मामले के दो फरार पुलिस अधिकारियों के निलंबन में देरी को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार व केंद्रीय जांच एजेंसी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी भी दी। कोर्ट ने सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट असंतोषजनक बताई और राज्य सरकार के वकील व गृह सचिव को स्पष्टीकरण सहित शुक्रवार को पेश होने का आदेश दिया। इस बीच, सीबीआई ने मामले में फरार पुलिस अधिकारी संजीत सिंह मावई और उत्तम सिंह कुशवाहा के बारे में जानकारी देने पर 2-2 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है।

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सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने मामले में गुरुवार को आगे सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि दोनों पुलिस अधिकारी अप्रैल से फरार हैं, लेकिन उन्हें अब तक निलंबित नहीं किया गया है। 24 वर्षीय मृतक देवा पारधी की मां ने सुप्रीम कोर्ट के 15 मई के आदेश का पालन नहीं होने का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर की है। शीर्ष कोर्ट ने 15 मई के आदेश में मामले की जांच मप्र पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि स्थानीय पुलिस मामले को रफा दफा करने और जांच को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। 
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बुधवार को निलंबित किया गया : सीबीआई
सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील ने शीर्ष कोर्ट को बताया कि दोनों फरार पुलिस अधिकारियों को बुधवार को निलंबित कर दिया गया है। इस पर शीर्ष कोर्ट ने वकील से कहा कि निलंबन कल क्यों किया गया? आपने कहा कि दोनों अप्रैल से फरार हैं, इसका मतलब है कि आप उनका बचाव कर रहे हैं। यह सच में अवमानना है। आप अप्रैल से उन्हें खोज रहे हैं, लेकिन आपने उन्हें निलंबित क्यों नहीं किया। आपके सारे प्रयास दिखावटी हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी आप कार्रवाई करने में विफल रहे और लाचारी प्रकट कर रहे हो। आप अब तक उन्हें पकड़ने में विफल रहे हैं। लाचारी प्रकट मत करिये।

चश्मदीद गवाह की चिंता
जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मामले के एकमात्र चश्मदीद गवाह गंगाराम सुरक्षित रहें। गंगाराम, जो मृतक देवा पारधी का चाचा है, इस समय न्यायिक हिरासत में है। कोर्ट ने कहा कि वह नहीं चाहती कि उसका भी देवा जैसा हश्र हो। 

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गैर जमानती वारंट जारी, भगोड़ा घोषित
सीबीआई वकील ने कोर्ट के कड़े तेवर देख कहा कि हमने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए हैं और दोनों को भगोड़ा घोषित किया है। उनकी संपत्ति कुर्क करने के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई है। छापे मारे जा रहे हैं और उन पर डिजिटल नजर रखी जा रही है। सीबीआई के वकील ने कोर्ट को बताया कि फरार पुलिस अधिकारियों संजीत सिंह मावई और उत्तम सिंह कुशवाहा के बारे में जानकारी देने पर 2-2 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। दोनों अधिकारी हिरासत में मौत के समय थाने में तैनात थे और तब से फरार हैं।

चोरी के आरोप में हिरासत में लिया था
बता दें, देवा पारधी को चोरी के आरोप में हिरासत में लिया गया था और पुलिस हिरासत में रहते हुए रहस्यमयी परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई थी। सीबीआई की जांच में पहले ही सब इंस्पेक्टर देवराज सिंह परिहार, टाउन इंस्पेक्टर जुबेर खान और एक निजी व्यक्ति को गिरफ्तार कर चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, लेकिन मावई और कुशवाहा अब भी गिरफ्तारी से बच रहे हैं।

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