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MP: सिवनी के बाद अब गुना पुलिस पर हवाला-वसूली के आरोप ने चौंकाया, बात यहां तक पहुंची कि CM को लेना पड़ा एक्शन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना Published by: गुना ब्यूरो Updated Sun, 22 Mar 2026 10:38 PM IST
सार

मध्य प्रदेश में पुलिस पर गंभीर आरोपों ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। लोग सिवनी हवाला कांड को अभी तक भूले भी नहीं थे कि अब गुना नकदी प्रकरण में जब्ती व ‘सेटलमेंट’ में गड़बड़ी ने हिला दिया। मामले में सीएम डॉ. मोहन यादव ने बड़ा एक्शन लिया है। एसपी को बदल दिया गया है। 

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MP: From Seoni to Guna, allegations of 'hawala and extortion' rocked system, leading to the CM taking action
मप्र पुलिस पर लग रहे गंभीर आरोप - फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश में कानून-व्यवस्था हो रही है बेलगाम, जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस पर लगातार गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं, जिसने आम जनता के भरोसे को झकझोर कर रख दिया है। कुछ दिनों पहले सिवनी में और अब गुना से सामने आए मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब कानून का पालन कराने वाली वर्दी ही कटघरे में खड़ी हो जाए, तो आम नागरिक खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करे। इन घटनाओं ने न केवल पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि सरकार के सामने भी सख्त कार्रवाई की चुनौती खड़ी कर दी है। आइए जानते हैं दोनो मामले-


 
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MP: From Seoni to Guna, allegations of 'hawala and extortion' rocked system, leading to the CM taking action
गुना मामले में पुलिस ने थाना प्रभारी समेत चार को निलंबित कर दिया था। - फोटो : अमर उजाला
गुना में फिर दोहराई गई सिवनी कांड की कहानी
सिवनी के बाद दूसरा बड़ा मामला गुना जिले से सामने आया, जिसने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। धरनावदा थाना क्षेत्र की रूठियाई पुलिस चौकी पर हाईवे चेकिंग के दौरान गुजरात नंबर की एक स्कॉर्पियो से करीब 1 करोड़ रुपए से अधिक की नकदी बरामद होने का दावा किया गया।

जानकारी के अनुसार, नेशनल हाईवे-46 पर नियमित वाहन चेकिंग के दौरान इस गाड़ी को रोका गया। तलाशी में बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद नियमानुसार आयकर विभाग या वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने के बजाय मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों पर ‘सेटलमेंट’ करने के आरोप लगे। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस और वाहन मालिक के बीच करीब 20 लाख रुपए में समझौता हुआ, जिसके बाद गाड़ी को छोड़ दिया गया। हालांकि बाद में यह भी चर्चा सामने आई कि किसी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के फोन के बाद पुलिस ने कथित रूप से लिए गए पैसे भी लौटा दिए। इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी, लेकिन इससे मामले ने और तूल पकड़ लिया।

जैसे ही मामला सामने आया, ग्वालियर रेंज के डीआईजी अमित सांघी देर रात मौके पर पहुंचे और घंटों तक जांच की। उन्होंने मौके पर मौजूद दस्तावेजों की जांच की और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के अलग-अलग बयान दर्ज किए। डीआईजी ने स्पष्ट कहा कि प्रथमदृष्टया मामला संदिग्ध है और नियमानुसार कार्रवाई नहीं की गई। प्राथमिक जांच के आधार पर धरनावदा थाना प्रभारी प्रभात कटारे, रूठियाई चौकी प्रभारी एएसआई साजिद हुसैन, प्रधान आरक्षक देवेंद्र सिकरवार और पुलिस वाहन चालक सह आरक्षक सुंदर रमन को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि जांच में एक पेंच यह भी सामने आया कि वाहन मालिक की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, जिससे जांच प्रक्रिया और जटिल हो गई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने गुना के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी को तत्काल प्रभाव से हटा दिया और पुलिस मुख्यालय भोपाल कर दिया। वहीं, गुना जिले की नई कमान हितिका वसाल को सौंपी गई है। इस कार्रवाई को सरकार की सख्ती के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों सामने आ रही हैं।

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MP: From Seoni to Guna, allegations of 'hawala and extortion' rocked system, leading to the CM taking action
सिवनी में हवाला घोटाला - फोटो : अमर उजाला
सिवनी का तीन करोड़ हवाला कांड: जब्ती में गड़बड़ी और पुलिस पर डकैती के आरोप
कुछ समय पहले पुलिस पर गंभीर आरोप तब लगे, जब सिवनी हवाला कांड में लेन-देन की बात सामने आई। केस के मुताबिक, पुलिस ने नागपुर निवासी सोहन परमार से करीब 3 करोड़ रुपए की नकदी जब्त की थी। हालांकि, आरोप है कि पुलिस ने आधिकारिक रिकॉर्ड में सिर्फ 1 करोड़ 45 लाख रुपए ही दर्शाए। बाकी रकम का हिसाब सामने नहीं आने से मामला संदिग्ध हो गया था।

इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपी को भी बिना ठोस कार्रवाई के छोड़ दिया गया और वरिष्ठ अधिकारियों को भी पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। जैसे ही यह मामला उजागर हुआ, पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। 9 अक्टूबर को सीएसपी पूजा पांडे और एसआई अर्पित भैरम द्वारा 1.45 करोड़ रुपए जमा कराए गए, लेकिन जांच में बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी प्रमोद वर्मा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी समेत 9 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। इसके बाद अगले ही दिन डीजीपी कैलाश मकवाना के निर्देश पर सीएसपी पूजा पांडे सहित कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ डकैती, अपहरण, अवैध रोकथाम और आपराधिक षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने 6 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार भी किया, जिससे यह साफ हो गया कि मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं बल्कि संगठित भ्रष्टाचार का था।  मामले में सीएम मोहन यादव ने त्वरित कार्रवाई कर कड़ा संदेश दिया था। 

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