फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   How to children of indian mothers and chinese fathers facing identity crises 1962-war news in hindi

मां हिंदुस्तानी, बाप चीनी...: अब बच्चों की पहचान पर क्यों खड़ा हुआ सवाल? 1962 के भारत-चीन युद्ध से जुड़ा मामला

Mon, 10 Aug 2026 11:29 AM IST
बालाघाट ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाट Published by: बालाघाट ब्यूरो Updated Mon, 10 Aug 2026 11:29 AM IST
सार

Balaghat: बालाघाट के एक परिवार का दावा है कि 1962 युद्ध में बंदी बने चीनी सैनिक ने भारत में बसकर भारतीय महिला से शादी की थी। अब उनकी तीसरी पीढ़ी को पिता की नागरिकता और जाति संबंधी नियमों के कारण जाति प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा। पढ़ें पूरी खबर

विज्ञापन
How to children of indian mothers and chinese fathers facing identity crises 1962-war news in hindi
परिवार संग वांग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

1962 के भारत-चीन युद्ध से जुड़ी एक कहानी आज भी बालाघाट जिले के एक परिवार की जिंदगी को प्रभावित कर रही है। तिरोड़ी गांव में रहने वाले विष्णु वांग का दावा है कि उनके पिता 1962 के युद्ध के दौरान चीनी सेना के सैनिक थे। युद्ध के दौरान उन्हें भारत ने युद्धबंदी बनाया और करीब सात साल तक दिल्ली, भोपाल और जबलपुर सहित कई जेलों में रखा गया। सजा पूरी होने के बाद उन्हें चीन वापस नहीं भेजा गया, बल्कि भारत में ही रहने की अनुमति दे दी गई। यहीं उन्होंने एक भारतीय महिला से विवाह कर परिवार बसाया।

विज्ञापन




अब इस परिवार की तीसरी पीढ़ी पहचान के संकट से जूझ रही है। विष्णु वांग का कहना है कि उनके पिता चीनी सैनिक थे, लेकिन उनकी मां भारतीय थीं। उनका जन्म, शिक्षा और सभी सरकारी दस्तावेज भारत के हैं। इसके बावजूद उनके बच्चों का जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है। परिवार का सवाल है कि आखिर इसका खामियाजा उनके बच्चों को क्यों भुगतना पड़ रहा है।
विज्ञापन


भारत की युवती से की शादी, सात साल तक रहे जेल में
विष्णु वांग के अनुसार, उनके पिता वांग को 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान युद्धबंदी बनाया गया था। करीब सात साल तक विभिन्न जेलों में रहने के बाद उन्हें भारत में बसने की अनुमति मिली। इसके बाद वे बालाघाट जिले के तिरोड़ी गांव में रहने लगे। गांव के लोगों ने उन्हें राज बहादुर नाम दिया। उन्होंने कुनबी समाज की एक भारतीय युवती से विवाह किया और यहीं परिवार बसाया। विष्णु का कहना है कि उनका जन्म और पढ़ाई भारत में हुई है तथा उनके सभी सरकारी दस्तावेज भारतीय हैं। वहीं उनके पिता वांग उर्फ राज बहादुर ने सरकार से मांग की है कि उनके बच्चों का जाति प्रमाण पत्र बनवाया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


पढे़ं: श्रावण सोमवार पर बाबा महाकाल भी रखते हैं उपवास, कब लगता है भोग? जानिए व्रत और इसकी पूरी परंपरा को


बच्चों का सवाल- हमारा क्या दोष?
विष्णु वांग का कहना है कि जब उन्होंने अपने बच्चों का जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया तो यह कहते हुए मना कर दिया गया कि उनके पिता चीनी सैनिक थे। परिवार का कहना है कि बच्चों की दादी भारतीय थीं, माता-पिता के सभी दस्तावेज भारतीय हैं और बच्चों का जन्म भी भारत में हुआ है। ऐसे में जाति प्रमाण पत्र नहीं मिलने से बच्चों की पढ़ाई और भविष्य प्रभावित हो रहा है। परिवार ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी दर्ज कराई है और सरकार से विशेष परिस्थितियों को देखते हुए समाधान निकालने की मांग की है।

प्रशासन ने क्या कहा?
अपर कलेक्टर जी.एस. धुर्वे ने बताया कि वर्तमान नियमों के अनुसार जाति प्रमाण पत्र पिता की जाति के आधार पर जारी किया जाता है। हालांकि, यह मामला असाधारण परिस्थितियों से जुड़ा है। इसलिए शासन से मार्गदर्शन और आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए पत्र भेजा जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed