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Indore: भागीरथपुरा में अब दूषित पानी नहीं, लेकिन जलसंकट ने घेरा बस्ती को, नहीं पहुंच रहे टैंकर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Wed, 13 May 2026 08:30 AM IST
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सार

इंदौर की भागीरथपुरा बस्ती, जो कभी दूषित पानी के कारण 35 से ज्यादा मौतों के लिए चर्चा में रही, अब नलों में साफ पानी मिलने के बावजूद गंभीर जलसंकट का सामना कर रही है। संकरी गलियों तक नर्मदा पानी की आपूर्ति नहीं पहुंच पा रही है।

Indore: Contaminated water is no longer available in Bhagirathpura, but water crisis engulfs the settlement, t
इस तरह पानी ले रहे भागीरथपुरा के लोग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

दूषित पानी के कारण 35 से ज्यादा मौतों के लिए चर्चित हुई इंदौर की भागीरथपुरा बस्ती में अब नलों में दूषित पानी नहीं आ रहा है, लेकिन बस्ती के बड़े हिस्से में जलसंकट का सामना करना पड़ रहा है।

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बस्ती के जिस हिस्से में चौड़ी सड़क है, वहां तक तो टैंकर पहुंच रहे हैं, लेकिन जहां संकरी गलियाँ हैं, वहां न टैंकर जा रहे हैं और न नल आ रहे हैं, क्योंकि नर्मदा लाइन बस्ती के 30 प्रतिशत हिस्से में ही पहुंच पाई है। लोगों को पानी के लिए केन लेकर इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। भागीरथपुरा बस्ती में जिस टंकी से पानी सप्लाई होता है, वहां दिन भर लोग पानी के बर्तन के साथ नजर आते हैं। वे रोज पानी केन और ड्रमों में भरकर घरों तक ले जाते हैं।
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बोरिंग ने भी साथ छोड़ा
भागीरथपुरा वार्ड में 30 से ज्यादा सार्वजनिक बोरिंग हैं। उनमें से कुछ दूषित हैं, क्योंकि बस्ती के पास ही नाला भी बहता है। 30 में से ज्यादातर बोरिंग बंद हो चुकी हैं या उनमें पानी आना कम हो चुका है। इस कारण लोग नर्मदा के जल पर ही निर्भर हैं।


रहवासी राम सिंह मोर्य बताते हैं कि पहले हम बोरिंग से पानी भर लेते थे, लेकिन अब बोरिंग ने पानी देना बंद कर दिया है। नर्मदा लाइन हमारी गली तक नहीं पहुंची है। रहवासी रमा बाई ने बताया कि पुरानी पाइपलाइन हटाने के बाद नगर निगम ने हमारी गली में नई लाइन तो डाल दी, लेकिन हम हौज में कनेक्शन नहीं जुड़वा पाए हैं। इसमें दस हजार रुपये से ज्यादा खर्च करना पड़ेंगे। अफसरों ने खुले में नीले रंग के पाइप हौज में डाल दिए। ज्यादातर घरों में इसी तरह की स्थिति है।
 

भोजशाला मामले में सुनवाई आज
भोजशाला दूषित पेयजल कांड को लेकर हाईकोर्ट में लगी याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी। याचिका में महापौर परिषद सदस्य अभिषेक शर्मा बबलू, पार्षद कमल वाघेला और तत्कालीन अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को भी पक्षकार बनाया गया है। तीनों ने याचिका से अपना नाम हटाने के लिए आवेदन दिया है। जिस पर बुधवार को सुनवाई होगी। आपको बता दें कि दूषित पेयजल कांड के कारण भागीरथपुरा में 35 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। बस्ती के डेढ़ हजार से ज्यादा लोग दूषित पेयजल के कारण बीमार हो गए थे।

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