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Indore: सरदार सरोवर मुआवजा विवाद पर फिर सवाल, बांध प्रभावितों ने पूछा- 2900 करोड़ के दावे की अनदेखी क्यों?

Sun, 12 Jul 2026 08:34 AM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Sun, 12 Jul 2026 08:34 AM IST
सार

सरदार सरोवर बांध मुआवजा विवाद केंद्र सरकार की मध्यस्थता के बाद सुलझने की ओर बढ़ा है। मध्य प्रदेश सरकार ने डूब क्षेत्र की सरकारी जमीन, जंगल और अन्य परिसंपत्तियों के बदले सात हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था।

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Indore: Dam-affected people ask on what grounds the ₹2,900 crore rehabilitation claim was ignored.
सरदार सरोवर मुआवजा विवाद पर नया मोड़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरदार सरोवर बांध से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मुआवजा विवाद पर केंद्र सरकार की मध्यस्थता के बाद नई सहमति बनी है। मध्य प्रदेश सरकार ने डूब में आई सरकारी जमीन, जंगल और अन्य परिसंपत्तियों के बदले करीब सात हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा था। बैठक में पुनर्वास की लागत पर नए सिरे से चर्चा हुई और गुजरात सरकार से 75 प्रतिशत लागत वहन करने को कहा गया। हालांकि, इस फैसले पर नर्मदा बचाओ आंदोलन और डूब प्रभावितों ने सवाल उठाते हुए सरकार से पूरी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

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मुआवजे की राशि में हुआ बड़ा बदलाव

बैठक में हुए निर्णय के बाद पहले जहां मध्य प्रदेश सरकार को गुजरात सरकार को करीब 1,500 करोड़ रुपये देने थे, अब यह राशि घटाकर करीब 550 करोड़ रुपये कर दी गई है। सरकार इसे राहत भरा फैसला मान रही है, लेकिन प्रभावितों का कहना है कि इससे कई महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान अभी भी बाकी है।

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डूब प्रभावितों ने उठाए सवाल

नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर और राहुल यादव ने कहा कि सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े विवाद के समाधान को लेकर सरकार को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। उनका कहना है कि बांध की ऊंचाई बढ़ने के बाद डूब क्षेत्र में भारी विस्तार हुआ, जिसके आधार पर गुजरात सरकार से करीब 2,900 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। इस मांग पर क्या निर्णय हुआ, इसकी जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।

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बांध की ऊंचाई बढ़ने से बढ़ा डूब क्षेत्र

प्रभावितों के अनुसार, वर्ष 2000 तक जब सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई 90 मीटर थी, तब मध्य प्रदेश सरकार ने कुल 281.46 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की थी। इसमें वन भूमि, सरकारी जमीन और जलमग्न वन क्षेत्र का मुआवजा शामिल था।

बाद में बांध की ऊंचाई पहले 110 मीटर, फिर 121.92 मीटर और वर्ष 2017 में बढ़ाकर 138.68 मीटर कर दी गई। इसके बाद मध्य प्रदेश में डूब क्षेत्र काफी बढ़ गया। बड़ी मात्रा में वन भूमि, सरकारी जमीन, कृषि क्षेत्र और अन्य प्राकृतिक संसाधन जलमग्न हो गए। कई नए गांव प्रभावित हुए और ऐसे परिवार भी डूब क्षेत्र में आ गए, जिन्हें पहले पुनर्वास के लिए अपात्र माना गया था। प्रभावितों का आरोप है कि गुजरात सरकार अब भी केवल 281 करोड़ रुपये के पुराने दावे पर ही विचार कर रही है।

इंदौर में पुनर्वास की समीक्षा बैठक

इधर, सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों को दिए गए प्लॉटों की रजिस्ट्री और पुनर्वास प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए इंदौर में संभागायुक्त सुदाम खाड़े की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि विस्थापन से जुड़े मामलों में किसी तरह की अनावश्यक देरी न हो। साथ ही, सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों का भी जल्द से जल्द निराकरण करने के निर्देश दिए गए।

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