Indore:एमबीए छात्रा मर्डर केस- शक और चाहत के साथ नशे की आदत ले गई सलाखों के पीछे
प्यार जब जुनून और शंका में बदल जाए, तो अंजाम कितना घातक हो सकता है, एमबीए छात्रा हत्याकांड इसकी जीती-जागती मिसाल है। क्या बच्चों को दी गई बेहिसाब आजादी,दोस्तों के चयन में बरती गई लापरवाही इस घटना की वजह बनी? यह वारदात इस बात को सोचने पर मजबूर कर देती है।
विस्तार
इंदौर के द्वारकापुरी क्षेत्र में एमबीए छात्रा की हत्या ने शहरवासियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बच्चों को दी जाने वाली आजादी कई बार घातक साबित होती है। युवक पीयूष ने अपनी उस दोस्त को मौत के घाट उतार दिया जिससे वह शादी करना चाहता था, लेकिन वह छात्रा के दूसरे दोस्तों से चैट करने से नाराज था। वह उस पर एकाधिकार चाहता था। वह उसे जितना चाहता था, उससे कहीं ज्यादा उस पर शक करता था। उसकी नशे की आदत ने आग में घी का काम किया और उसने उस युवती को ही मार दिया जिसे वह चाहता था।
परिजनों को दोनों की नजदीकी की जानकारी थी
छात्रा और आरोपी एक-दूसरे के दोस्त थे और अक्सर साथ आते-जाते थे। इसकी जानकारी छात्रा की बहन और उसके पिता को भी थी, लेकिन उन्होंने कभी यह जानने की कोशिश नहीं की कि जिस युवक से उनकी बेटी की दोस्ती है, वह किस मानसिक प्रवृत्ति का है। प्रजापत नगर की जिस गली में हत्या हुई, वहां के लोगों का कहना है कि अक्सर युवती गली में आरोपी के साथ आती-जाती नजर आती थी, जिस दिन पीयूष ने छात्रा की हत्या की, उस दिन भी मृतका की बहन को पता था कि वह आरोपी के साथ जा रही है। बताया जाता है कि आरोपी के माता-पिता को भी इस बात की जानकारी थी।
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पहले से कर रखी थी हत्या की प्लानिंग
आरोपी ने जिस तरह छात्रा की हत्या की और घर से भागा, उससे पता चलता है कि उसने पहले से हत्या की प्लानिंग कर रखी थी। हाथ-पैर बांधने के लिए उसने कमरे में रस्सी रखी थी। हत्या के बाद वह तत्काल नहीं भागा, बल्कि दो से तीन घंटे तक कमरे में ही शव के साथ बैठा रहा। उसने शव के साथ दुष्कर्म किया, उसके वीडियो बनाकर कॉलेज के ग्रुप पर डाल दिए और अपने चेहरे पर इमोजी लगा दी ताकि पहचान न हो सके। उसने छात्रा को कॉल कर कमरे पर बुलाया था और कहा था कि शाम को पार्टी करने चलेंगे। हत्या के बाद उसने एक पत्र भी लिखा और छात्रा के नाम का उल्लेख करते हुए कहा कि उसकी हत्या मैंने की है, मुझे फांसी की सजा दी जाए।
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पकड़े जाने के डर से एक जगह नहीं रुका
हत्या के बाद वह फरार होकर मुंबई चला गया। दो दिन तो वह इत्मीनान से रहा, लेकिन जब उसने मोबाइल पर छात्रा का शव मिलने की खबर देखी तो वह सतर्क हो गया। वह किसी होटल में नहीं रुका क्योंकि उसे पकड़े जाने का डर था। वह ट्रेनों में सौ-पचास किलोमीटर की यात्राएं करता रहा। उसने नई सिम खरीदकर मोबाइल की व्यवस्था की और परिजनों के संपर्क में था। जब पुलिस ने उसके पिता को हिरासत में लिया तो उसने मुंबई के पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण कर दिया।

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