भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट का आदेश- इंदौर खंडपीठ करेगी मामले की सुनवाई;3 हफ्ते में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश
मप्र हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ ने भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद से जुड़ी याचिकाओं का मामला इंदौर खंडपीठ के अधिकार क्षेत्र का मानते हुए सभी संबंधित याचिकाएं इंदौर बेंच को स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं।
विस्तार
भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद से संबंधित लंबित याचिकाओं पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ में चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगल पीठ ने संयुक्त सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि विवादित स्थल धार जिले में स्थित है, जो इंदौर खंडपीठ के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए सभी संबंधित याचिकाओं की सुनवाई अब इंदौर बेंच द्वारा की जाएगी।
इंदौर खंडपीठ का पूर्व आदेश
गौरतलब है कि इंदौर खंडपीठ ने 16 फरवरी को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी धार बनाम हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस एवं अन्य मामले में 22 अप्रैल 2026 को दिए गए निर्देशों का हवाला देते हुए कहा था कि रिट पिटीशन क्रमांक 10497/2022 की सुनवाई चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली या वरिष्ठ न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच द्वारा तीन सप्ताह के भीतर की जाए।
निर्देशों में यह भी कहा गया था कि सर्वे रिपोर्ट ओपन कोर्ट में खोली जाए और उसकी प्रति दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई जाए। यदि रिपोर्ट का कोई हिस्सा साझा नहीं किया जा सकता तो पक्षकारों को अपने विशेषज्ञों और वकीलों की मौजूदगी में उसे देखने की अनुमति दी जा सकती है। आपत्तियां, सुझाव और सिफारिशें दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया जाए। अंतिम निर्णय तक भोजशाला सरस्वती मंदिर-कम-मौलाना कमाल मौला मस्जिद की वर्तमान स्थिति (स्टेटस) को बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही सभी पक्षकारों को आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के डायरेक्टर जनरल द्वारा 7 अप्रैल 2003 को जारी आदेश का पालन करने को कहा गया है।
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एएसआई आदेश पर भी चुनौती
एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को अलग से रिट याचिका में चुनौती दी गई थी, जिसे एकल पीठ ने खारिज कर दिया था। उस आदेश के खिलाफ दायर अपील अभी लंबित है, जिसकी सुनवाई भी संबंधित याचिकाओं के साथ की जाएगी।
सर्वे और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
उल्लेखनीय है कि 11 मार्च 2024 को इंदौर खंडपीठ ने भोजशाला परिसर का आधुनिक तकनीकों से सर्वे कराने का निर्देश एएसआई को दिया था। एएसआई की पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने परिसर की फोटोग्राफी की, सीलबंद कमरों को खोला और संरचनात्मक व कलात्मक अवशेषों की वैज्ञानिक जांच की। रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में प्रस्तुत की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल 2024 को निर्देश दिया था कि सर्वे के निष्कर्षों पर फिलहाल कोई कार्रवाई न की जाए और ऐसी कोई खुदाई न हो जिससे स्थल की प्रकृति में बदलाव आए।
बता दें कि भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद लंबे समय से विवाद का विषय रही है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यहां पहले वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर था, जबकि मुस्लिम पक्ष इस दावे का विरोध करता है और 1902-03 के एएसआई सर्वे का हवाला देता है, जिसमें मंदिर होने के प्रमाण नहीं मिलने की बात कही गई थी। मामले की अगली सुनवाई अब इंदौर खंडपीठ में होगी।
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