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Indore News: बिजासन मंदिर पर श्रद्धालुओं के लिए पीने का पानी और शौचालय भी नहीं, पार्किंग पड़ने लगी छोटी
Tue, 18 Aug 2026 08:04 AM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Tue, 18 Aug 2026 08:04 AM IST
सार
Indore News: बिजासन माता मंदिर की जमीन अलग-अलग विभागों को दिए जाने और एयरपोर्ट विस्तार के कारण मंदिर का सीधा मार्ग, नाहर गुफा और भेरू बाबा मंदिर का रास्ता भी बंद हो गया है।
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बिजासन माता मंदिर
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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इंदौर का लोकप्रिय बिजासन माता मंदिर अव्यवस्थाओं और अनदेखी की भेंट चढ़ता जा रहा है। बिजासन माता होलकर राजवंश के समय से शहर की कुलदेवी रही हैं। अब यहां की परेशानियों पर स्थानीय रहवासियों सहित मंदिर के पुजारियों और शहर के प्रबुद्धजनों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। मंदिर बचाओ अभियान के तहत बिजासन सांस्कृतिक चेतना सेवा समिति का गठन किया गया है और यह समिति अब अपनी मांगों के लिए आंदोलन करने पर विचार कर रही है। समिति के सदस्यों का कहना है कि हम मंदिर की परेशानियों के विषय में जिम्मेदारों को कई बार अवगत करवा चुके हैं लेकिन अब थक चुके हैं। जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारी तक हमारी सुन नहीं रहे हैं और अब हम आंदोलन करने के विषय में सोच रहे हैं।
तालाब का निर्माण कार्य अधूरा छोड़ा।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
पक्का निर्माण करके प्राकृतिक तालाब की हत्या की
पुजारी अशोक वन गोस्वामी और रतन गोस्वामी ने बताया कि यह विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां माता के 9 स्वरूपों की प्रतिमाएं स्वयंभू प्रकट हैं। यहां एनजीटी के निर्देशों को ताक में रखकर मंदिर के तालाब पर 1.31 करोड़ की लागत से पक्का निर्माण कर प्राकृतिक स्वरूप को खत्म कर दिया गया। पहाड़ी पर तालाब को सीमेंट-कांक्रीट से ढक दिया गया। इससे बड़ी संख्या में यहां पर मछलियां मरने लगीं और अब तो यहां पर मछलियां बची ही नहीं हैं। तालाब में पानी आने का पूरा रास्ता अवरुद्ध कर दिया गया जिससे धीरे-धीरे यह तालाब मरने लगा है। बाद में तालाब का काम भी अधूरा छोड़ दिया गया। पार्किंग की जमीन भी अब कम पड़ने लगी है।
नाहर गुफा और भेरू बाबा मार्ग बंद
समिति संरक्षक विजय सिंह परिहार ने बताया कि मंदिर की स्थापना काल से भेरू बाबा का मंदिर एवं नाहर गुफा है। 2 साल पहले तक श्रद्धालु यहां जाते थे। अब बीएसएफ को जमीन आवंटित करने के बाद से वह मार्ग बंद कर दिया गया है। मजबूरी में मंदिर परिसर में भेरू बाबा की अन्य मूर्ति स्थापित करना पड़ी। पहले बच्चों को शेर की गुफा से गुजरना काफी रोमांचक लगता था।
पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं
पुजारियों और समिति के सदस्यों ने बताया कि मंदिर परिसर में पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। रोज सैकड़ों श्रद्धालु देशभर से यहां पर आते हैं लेकिन उन्हें इन बुनियादी सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ता है। कचरा उठाने की भी समुचित व्यवस्था नहीं है।
पार्किंग की जगह भी नहीं बची
मंदिर परिसर में पार्किंग के लिए भी बहुत कम जगह बची है। मेले के समय लाखों की संख्या में वाहन यहां पर आते हैं और मंदिर की पहाड़ी के नीचे के क्षेत्र में पार्किंग की व्यवस्था करना पड़ती है। सामान्य दिनों में भी जो वाहन आते हैं उनके लिए भी पार्किंग छोटी पड़ती है।
मेला धर्मस्व विभाग की आधिकारिक सूची में शामिल
मंदिर के पुजारियों ने बताया कि शासन के रिकॉर्ड में आज भी बिजासन रमणा नाम से मंदिर की 750 एकड़ से अधिक जमीन दर्ज है। यहां लगने वाला मेला भी धर्मस्व विभाग की सूची में शामिल है। अब मेट्रो के लिए बिजासन तिराहे के पास करीब 3 एकड़ एवं एयरपोर्ट के लिए 15 एकड़ जमीन आवंटित की है। इस तरह अलग अलग विभागों को लगातार जमीनें देने से मंदिर के लिए जमीन ही नहीं बची है।
पुजारी अशोक वन गोस्वामी और रतन गोस्वामी ने बताया कि यह विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां माता के 9 स्वरूपों की प्रतिमाएं स्वयंभू प्रकट हैं। यहां एनजीटी के निर्देशों को ताक में रखकर मंदिर के तालाब पर 1.31 करोड़ की लागत से पक्का निर्माण कर प्राकृतिक स्वरूप को खत्म कर दिया गया। पहाड़ी पर तालाब को सीमेंट-कांक्रीट से ढक दिया गया। इससे बड़ी संख्या में यहां पर मछलियां मरने लगीं और अब तो यहां पर मछलियां बची ही नहीं हैं। तालाब में पानी आने का पूरा रास्ता अवरुद्ध कर दिया गया जिससे धीरे-धीरे यह तालाब मरने लगा है। बाद में तालाब का काम भी अधूरा छोड़ दिया गया। पार्किंग की जमीन भी अब कम पड़ने लगी है।
नाहर गुफा और भेरू बाबा मार्ग बंद
समिति संरक्षक विजय सिंह परिहार ने बताया कि मंदिर की स्थापना काल से भेरू बाबा का मंदिर एवं नाहर गुफा है। 2 साल पहले तक श्रद्धालु यहां जाते थे। अब बीएसएफ को जमीन आवंटित करने के बाद से वह मार्ग बंद कर दिया गया है। मजबूरी में मंदिर परिसर में भेरू बाबा की अन्य मूर्ति स्थापित करना पड़ी। पहले बच्चों को शेर की गुफा से गुजरना काफी रोमांचक लगता था।
पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं
पुजारियों और समिति के सदस्यों ने बताया कि मंदिर परिसर में पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। रोज सैकड़ों श्रद्धालु देशभर से यहां पर आते हैं लेकिन उन्हें इन बुनियादी सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ता है। कचरा उठाने की भी समुचित व्यवस्था नहीं है।
पार्किंग की जगह भी नहीं बची
मंदिर परिसर में पार्किंग के लिए भी बहुत कम जगह बची है। मेले के समय लाखों की संख्या में वाहन यहां पर आते हैं और मंदिर की पहाड़ी के नीचे के क्षेत्र में पार्किंग की व्यवस्था करना पड़ती है। सामान्य दिनों में भी जो वाहन आते हैं उनके लिए भी पार्किंग छोटी पड़ती है।
मेला धर्मस्व विभाग की आधिकारिक सूची में शामिल
मंदिर के पुजारियों ने बताया कि शासन के रिकॉर्ड में आज भी बिजासन रमणा नाम से मंदिर की 750 एकड़ से अधिक जमीन दर्ज है। यहां लगने वाला मेला भी धर्मस्व विभाग की सूची में शामिल है। अब मेट्रो के लिए बिजासन तिराहे के पास करीब 3 एकड़ एवं एयरपोर्ट के लिए 15 एकड़ जमीन आवंटित की है। इस तरह अलग अलग विभागों को लगातार जमीनें देने से मंदिर के लिए जमीन ही नहीं बची है।
