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Indore News: इंदौर की 5 हजार से ज्यादा महिलाओं ने बयां किया अपनों का जुल्म, अहिल्या की नगरी हो रही शर्मसार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Sat, 04 Apr 2026 12:07 PM IST
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सार
Indore News: इंदौर में पिछले एक वर्ष के दौरान घरेलू हिंसा के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है। यह रिपोर्ट शहर की आधुनिकता और स्वच्छता के दावों के बीच महिलाओं की असुरक्षित स्थिति और सामाजिक संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
इंदौर में महिला अपराधों मे चिंताजनक बढ़ोतरी।
- फोटो : istock
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विस्तार
बाहर से चमकता, आधुनिकता में दौड़ता और स्वच्छता में लगातार नंबर वन आने वाला इंदौर शहर आज एक ऐसे घिनौने सच का सामना कर रहा है जो समाज के चेहरे से नकाब खींच देता है। महिला बाल विकास विभाग के वन स्टॉप सेंटर (सखी) द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़े बताते हैं कि शहर की चकाचौंध के पीछे घरों के अंदर महिलाएं दर्दनाक यातनाएं झेल रही हैं। पिछले एक साल में हजारों महिलाएं अपनों के ही खिलाफ मदद मांगने के लिए मजबूर हुई हैं।
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घरेलू हिंसा के मामलों में चिंताजनक वृद्धि
देश के सबसे स्वच्छ शहर और शिक्षा व चिकित्सा के उभरते हब के रूप में पहचान बनाने वाला इंदौर अब घरेलू हिंसा के ग्राफ में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच कुल 5266 महिलाएं मदद के लिए वन स्टॉप सेंटर पहुंचीं। इन आंकड़ों का सबसे भयावह पहलू यह है कि इनमें से 5078 मामले सीधे तौर पर घरेलू हिंसा से जुड़े थे। यह स्थिति दर्शाती है कि शहर में हर 10 में से 9 महिलाएं घर की चारदीवारी के भीतर शारीरिक, मानसिक या आर्थिक प्रताड़ना का शिकार हो रही हैं।
समझौते के बाद भी नहीं थम रहा प्रताड़ना का दौर
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि कई महीनों में पीड़ित महिलाओं की संख्या 450 से 550 के बीच रही है। प्रशासन और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद कई मामलों में परिवार समझौते का रास्ता अपनाते हैं, लेकिन यह समाधान स्थाई साबित नहीं हो रहा है। अक्सर देखा गया है कि समझौते के बाद भी प्रताड़ना जारी रहती है और अंततः ये मामले कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई तक पहुंच जाते हैं। यह स्थिति महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
शिक्षित और नौकरीपेशा महिलाएं भी निशाने पर
वन स्टॉप सेंटर के विशेषज्ञों के अनुसार, हिंसा का शिकार होने वाली महिलाओं में केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ही नहीं, बल्कि शिक्षित और नौकरीपेशा महिलाएं भी शामिल हैं। इनमें नवविवाहिताओं से लेकर बुजुर्ग महिलाएं तक अपनी आपबीती लेकर पहुंच रही हैं। समाज में आज भी यह धारणा व्याप्त है कि घरेलू विवाद घर का निजी मामला है, जिसके कारण पड़ोसी और रिश्तेदार चुप्पी साध लेते हैं। जब कोई महिला वर्षों के शोषण के बाद आवाज उठाती है, तो उसे ही घर तोड़ने वाली करार दे दिया जाता है।
नवंबर में दर्ज हुए सर्वाधिक मामले
शहर में नवंबर 2025 के दौरान सर्वाधिक 522 मामले दर्ज किए गए, जो पारिवारिक असंतुलन और मानसिक तनाव के बढ़ते स्तर को दर्शाते हैं। इसके अलावा दिसंबर में 457 और जनवरी 2026 में 465 मामले सामने आए। विशेषज्ञों का मानना है कि ये आंकड़े तो केवल वे हैं जो दर्ज हो पाए, जबकि लोक-लाज और मान-मर्यादा के डर से शिकायत न करने वाली महिलाओं की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
समाज की हकीकत बताते आंकड़े...
5266 महिलाओं ने अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच वन स्टॉप सेंटर पहुंचकर अपनी पीड़ा दर्ज कराई है।
5078 मामले केवल घरेलू हिंसा के पाए गए हैं जो कुल शिकायतों का एक बड़ा हिस्सा हैं।
188 मामले अन्य श्रेणियों जैसे छेड़छाड़ या बाहरी विवादों के अंतर्गत दर्ज किए गए।
522 का आंकड़ा नवंबर माह में दर्ज किया गया जो साल भर में सर्वाधिक रहा।
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घरेलू हिंसा के मामलों में चिंताजनक वृद्धि
देश के सबसे स्वच्छ शहर और शिक्षा व चिकित्सा के उभरते हब के रूप में पहचान बनाने वाला इंदौर अब घरेलू हिंसा के ग्राफ में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच कुल 5266 महिलाएं मदद के लिए वन स्टॉप सेंटर पहुंचीं। इन आंकड़ों का सबसे भयावह पहलू यह है कि इनमें से 5078 मामले सीधे तौर पर घरेलू हिंसा से जुड़े थे। यह स्थिति दर्शाती है कि शहर में हर 10 में से 9 महिलाएं घर की चारदीवारी के भीतर शारीरिक, मानसिक या आर्थिक प्रताड़ना का शिकार हो रही हैं।
समझौते के बाद भी नहीं थम रहा प्रताड़ना का दौर
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि कई महीनों में पीड़ित महिलाओं की संख्या 450 से 550 के बीच रही है। प्रशासन और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद कई मामलों में परिवार समझौते का रास्ता अपनाते हैं, लेकिन यह समाधान स्थाई साबित नहीं हो रहा है। अक्सर देखा गया है कि समझौते के बाद भी प्रताड़ना जारी रहती है और अंततः ये मामले कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई तक पहुंच जाते हैं। यह स्थिति महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
शिक्षित और नौकरीपेशा महिलाएं भी निशाने पर
वन स्टॉप सेंटर के विशेषज्ञों के अनुसार, हिंसा का शिकार होने वाली महिलाओं में केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ही नहीं, बल्कि शिक्षित और नौकरीपेशा महिलाएं भी शामिल हैं। इनमें नवविवाहिताओं से लेकर बुजुर्ग महिलाएं तक अपनी आपबीती लेकर पहुंच रही हैं। समाज में आज भी यह धारणा व्याप्त है कि घरेलू विवाद घर का निजी मामला है, जिसके कारण पड़ोसी और रिश्तेदार चुप्पी साध लेते हैं। जब कोई महिला वर्षों के शोषण के बाद आवाज उठाती है, तो उसे ही घर तोड़ने वाली करार दे दिया जाता है।
नवंबर में दर्ज हुए सर्वाधिक मामले
शहर में नवंबर 2025 के दौरान सर्वाधिक 522 मामले दर्ज किए गए, जो पारिवारिक असंतुलन और मानसिक तनाव के बढ़ते स्तर को दर्शाते हैं। इसके अलावा दिसंबर में 457 और जनवरी 2026 में 465 मामले सामने आए। विशेषज्ञों का मानना है कि ये आंकड़े तो केवल वे हैं जो दर्ज हो पाए, जबकि लोक-लाज और मान-मर्यादा के डर से शिकायत न करने वाली महिलाओं की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
समाज की हकीकत बताते आंकड़े...
5266 महिलाओं ने अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच वन स्टॉप सेंटर पहुंचकर अपनी पीड़ा दर्ज कराई है।
5078 मामले केवल घरेलू हिंसा के पाए गए हैं जो कुल शिकायतों का एक बड़ा हिस्सा हैं।
188 मामले अन्य श्रेणियों जैसे छेड़छाड़ या बाहरी विवादों के अंतर्गत दर्ज किए गए।
522 का आंकड़ा नवंबर माह में दर्ज किया गया जो साल भर में सर्वाधिक रहा।
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