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Indore News: अपेंडिक्स के ऑपरेशन में गई 9 साल के निखिल की जान, माता-पिता ने खो दिया इकलौता बेटा

Tue, 14 Jul 2026 06:28 AM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Arjun Richhariya Updated Tue, 14 Jul 2026 06:28 AM IST
सार

आक्रोशित परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए परिसर में हंगामा किया। पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की बात कह रही है।

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निखिल मीणा - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

विस्तार

इंदौर के देवगुराड़िया क्षेत्र में स्थित एनर्जी अस्पताल से एक दुखद मामला सामने आया है। यहां सोमवार को अपेंडिक्स के एक सामान्य ऑपरेशन के दौरान एक 9 वर्षीय मासूम बच्चे की जान चली गई। इस दुखद घटना के सामने आने के बाद बच्चे के आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टरों पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने के सीधे आरोप लगाए हैं। घटना के बाद पीड़ित परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और प्रबंधन के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रात के समय पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा और परिजनों को पूरे मामले की निष्पक्ष व गहन जांच करने का ठोस आश्वासन देकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामले को जांच में ले लिया है और अधिकारियों का कहना है कि बच्चे की मृत्यु की वास्तविक और सटीक वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह से साफ हो पाएगी।
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इस हृदयविदारक घटना में जान गंवाने वाले 9 वर्षीय बच्चे की पहचान निखिल मीणा के रूप में हुई है, जो नवलगांव, खातेगांव के निवासी दीपक मीणा का पुत्र था। उसे पेट में अपेंडिक्स की अचानक बढ़ी समस्या के कारण इलाज के लिए एनर्जी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मृतक बच्चे के चाचा दिनेश मीणा ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी साझा करते हुए बताया कि सोमवार को दोपहर में करीब 1:30 बजे बच्चे को ऑपरेशन के लिए ऑपरेशन थिएटर के भीतर ले जाया गया था। उस वक्त परिवार के सभी सदस्य बाहर बैठकर ऑपरेशन के सफलतापूर्वक होने का इंतजार कर रहे थे।
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ऑपरेशन के दो घंटे बाद मिली मौत की सूचना
पीड़ित परिवार के सदस्यों ने अस्पताल के पूरे स्टाफ और व्यवस्था पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन थिएटर में ले जाने के करीब दो घंटे बाद, यानी लगभग 3:30 बजे अस्पताल के कर्मचारियों ने उन्हें आकर यह जानकारी दी कि बच्चे की तीन अलग-अलग सर्जरी करनी पड़ी हैं और इसके बाद उसे तुरंत आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया है। इस सूचना के कुछ ही समय बाद अचानक परिवार को यह बता दिया गया कि निखिल की मौत हो चुकी है। इस अचानक मिली खबर से हर कोई स्तब्ध रह गया। परिजनों का यह भी बड़ा आरोप है कि इस समय कोई भी जिम्मेदार मुख्य डॉक्टर या सर्जन उनके सामने नहीं आया और न ही किसी ने मासूम बच्चे की मौत के असली कारणों के बारे में उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी देने की जहमत उठाई।
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इकलौते बेटे की मौत से बदहवास हुआ परिवार
मृतक निखिल अपने माता-पिता की इकलौती संतान था और घर का चिराग था। अचानक अपने मासूम और इकलौते बेटे की मौत की खबर मिलते ही पिता दीपक मीणा और मां मोना मीणा पूरी तरह से बदहवास हो गए और उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। घटना की भनक लगते ही परिवार के अन्य कई सदस्य और परिचित भी भारी संख्या में अस्पताल परिसर में जमा हो गए। वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पीड़ित माता-पिता और परिजन लगातार अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों से यह बुनियादी सवाल पूछने की कोशिश करते रहे कि एक बेहद सामान्य से माने जाने वाले अपेंडिक्स के ऑपरेशन के दौरान आखिर बच्चे की मौत कैसे हो सकती है, लेकिन अस्पताल के किसी भी व्यक्ति ने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया।

अस्पताल में हंगामा, रात 9 बजे पहुंची पुलिस
मासूम बच्चे की इस तरह अचानक हुई संदिग्ध मौत के बाद गुस्साए परिजनों और रिश्तेदारों ने अस्पताल के प्रांगण में ही जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने इलाज करने वाले डॉक्टरों की पूरी भूमिका और उनकी कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े किए। जैसे-जैसे समय बीता, अस्पताल में तनाव और हंगामा बढ़ने लगा। स्थिति के अनियंत्रित होने की सूचना मिलते ही रात को लगभग 9 बजे पुलिस की एक टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से बात की और उन्हें विश्वास दिलाया कि कानून के दायरे में रहकर पूरी निष्पक्षता से इस मामले की जांच की जाएगी। इस भरोसे के बाद ही नाराज परिजन थोड़े शांत हुए। इसके बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को अपने कब्जे में लिया और विस्तृत पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया।

वरिष्ठ अधिकारियों से करेंगे शिकायत
अस्पताल में हुए इस पूरे घटनाक्रम के बाद दुखी परिजनों ने अपना रुख साफ किया है कि वे इस मामले को यहीं नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि मंगलवार को वे इस पूरे मामले में शामिल डॉक्टरों की भूमिका, उनकी डिग्री और इलाज की प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच कराने के लिए जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों से भी लिखित में शिकायत दर्ज कराएंगे। पीड़ित परिवार का स्पष्ट कहना है कि यदि ऑपरेशन के दौरान या इलाज में किसी भी स्तर पर डॉक्टरों की कोई भी छोटी या बड़ी लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के तहत बेहद सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि किसी और के साथ ऐसा न हो।


पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चलेंगे कारण
स्थानीय पुलिस प्रशासन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए अपनी शुरुआती जांच की कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस की एक टीम अस्पताल प्रबंधन से मिलकर इलाज से जुड़े तमाम आवश्यक दस्तावेज, केस शीट और ऑपरेशन से जुड़ी तकनीकी जानकारियां व सीसीटीवी फुटेज आदि जुटाने का प्रयास कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक बेहद संवेदनशील चिकित्सा मामला है, इसलिए बच्चे की मौत की वास्तविक और वैज्ञानिक वजह क्या रही, यह पूरी तरह से पोस्टमॉर्टम की विस्तृत और अंतिम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट तौर पर कहा जा सकेगा।
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