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Indore News: हनीट्रैप में फंसा शराब कारोबारी, दो महिलाओं समेत 5 गिरफ्तार, हेड कॉन्स्टेबल भी शामिल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Tue, 19 May 2026 03:58 PM IST
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सार
क्राइम ब्रांच ने 2019 के बहुचर्चित हनीट्रैप कांड की मुख्य आरोपी श्वेता विजय जैन, महिला अपराधी अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप और सहयोगी लाखन चौधरी को हिरासत में लिया है। एक हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा की भी इस साजिश में संलिप्तता पाई गई है।
श्वेता और अलका
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर में एक प्रमुख शराब कारोबारी को हनीट्रैप में फंसाकर करोड़ों रुपए की वसूली करने का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में क्राइम ब्रांच ने तत्परता दिखाते हुए एक महिला शराब तस्कर, उसके बेटे, एक प्रॉपर्टी कारोबारी और पुलिस विभाग के एक हेड कॉन्स्टेबल समेत कई लोगों को हिरासत में लिया है। आरोपियों पर पीड़ित कारोबारी के निजी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर मोटी रकम वसूलने का आरोप है। इस पूरे घटनाक्रम की मुख्य सूत्रधार वर्ष 2019 के चर्चित हनीट्रैप मामले की मुख्य आरोपी रही श्वेता विजय जैन को बताया जा रहा है, जिसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।
अलका का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा
पुलिस उपायुक्त (क्राइम) राजेश त्रिपाठी से प्राप्त जानकारी के अनुसार बाणगंगा क्षेत्र के निवासी 45 वर्षीय शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान ने इस संबंध में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि द्वारकापुरी क्षेत्र की रहने वाली अलका दीक्षित से उनका पुराना परिचय था। अलका का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और वह अवैध शराब की तस्करी के मामलों में संलिप्त रही है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उस पर पहले से ही कई गंभीर मामले दर्ज हैं, जिसके चलते वह पुलिस की नजरों में थी।
प्रॉपर्टी में साझेदारी का दबाव बना रही थी अलका
पीड़ित कारोबारी के अनुसार अलका दीक्षित ने कुछ समय पूर्व उनकी मुलाकात खंडवा निवासी लाखन चौधरी से करवाई थी। लाखन मूल रूप से पीथमपुर के समीप खंडवा गांव का रहने वाला है। मुलाकात के दौरान लाखन ने स्वयं को एक बड़ा निवेशक और उद्योगपति बताते हुए देवास, धार, खंडवा तथा आसपास के अन्य जिलों में चल रहे प्रॉपर्टी बिजनेस में आधी हिस्सेदारी का प्रस्ताव दिया। जब कारोबारी ने घाटे और अन्य कारणों से इस व्यापारिक प्रस्ताव को पूरी तरह ठुकरा दिया, तो अलका और लाखन ने उन पर मानसिक दबाव बनाना प्रारंभ कर दिया।
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अश्लील वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी
कारोबारी चौहान ने शिकायत में आरोप लगाया कि कुछ दिनों के पश्चात लाखन ने उनसे दोबारा संपर्क किया और धमकी भरे लहजे में कहा कि उन्हें प्रॉपर्टी के व्यवसाय में 50 प्रतिशत की साझेदारी देनी ही होगी, अन्यथा उनके पास मौजूद कारोबारी के अश्लील फोटो और वीडियो को सार्वजनिक कर दिया जाएगा। कारोबारी द्वारा इस धमकी को नजरअंदाज करने पर करीब 20 दिन पहले जब वह किसी कार्य से सुपर कॉरिडोर गए थे, तब अलका, उसका बेटा जयदीप और लाखन वहां पहुंचे। तीनों ने कारोबारी के साथ मारपीट की और एक करोड़ रुपए की मांग करते हुए जान से मारने की धमकी दी।
ये भी पढ़ें: ट्विशा के शरीर पर चोट के निशान', परिजनों का आरोप; पति समर्थ के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी
क्राइम ब्रांच का गुप्त ऑपरेशन तय हुआ
कारोबारी की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर क्राइम ब्रांच ने एक गुप्त कार्ययोजना तैयार की। 17 मई की देर रात वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एक आपात बैठक हुई, जिसमें आरोपियों को दबोचने के लिए 'मिशन सीक्रेट' की रूपरेखा तैयार की गई। इसके लिए 40 कुशल जवानों को शामिल कर 7 अलग-अलग टीमें गठित की गईं। इन टीमों ने रात के समय द्वारिकापुरी और पीथमपुर में एक साथ छापेमारी की। पुलिस ने अलका के बेटे जयदीप, स्वयं अलका दीक्षित और लाखन चौधरी को अलग-अलग स्थानों से घेराबंदी कर हिरासत में ले लिया। इसके बाद भोपाल से मुख्य सूत्रधार श्वेता जैन को भी हिरासत में लेकर इंदौर लाया गया।
पुलिस विभाग के हेड कॉन्स्टेबल की संलिप्तता सामने आई
इस पूरे मामले में उस समय एक नया मोड़ आया जब जांच के दौरान इंटेलिजेंस ब्रांच के हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा की भूमिका संदिग्ध पाई गई। तकनीकी जांच और मोबाइल चैटिंग से यह सिद्ध हुआ कि विनोद शर्मा लगातार अलका दीक्षित के संपर्क में था। अलका ने कारोबारी के आपत्तिजनक वीडियो और फोटो विनोद को भेजे थे, जिसके बाद विनोद ने ही अलका को कारोबारी को डराने और ब्लैकमेल करने की रणनीति सुझाई थी। इस इनपुट के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हेड कॉन्स्टेबल को उसके सरकारी आवास से हिरासत में ले लिया और उसका लैपटॉप तथा मोबाइल फोन जब्त कर लिया।
कई लोगों को ब्लैकमेल करने की संभावना
पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि अलका दीक्षित का आपराधिक इतिहास काफी लंबा है और उस पर पूर्व में 17 से अधिक मामले दर्ज हैं। वह प्रारंभ में अवैध शराब के परिवहन और तस्करी में लिप्त थी, किंतु बाद में वह अवैध मादक पदार्थों और ड्रग्स के नेटवर्क से भी जुड़ गई थी। पुलिस प्रशासन को यह आशंका है कि यह गिरोह लंबे समय से शहर के कई संभ्रांत और धनी लोगों को अपने जाल में फंसाकर ब्लैकमेल कर रहा था। वर्तमान में पुलिस सभी आरोपियों को रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ कर रही है।
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अलका का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा
पुलिस उपायुक्त (क्राइम) राजेश त्रिपाठी से प्राप्त जानकारी के अनुसार बाणगंगा क्षेत्र के निवासी 45 वर्षीय शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान ने इस संबंध में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि द्वारकापुरी क्षेत्र की रहने वाली अलका दीक्षित से उनका पुराना परिचय था। अलका का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और वह अवैध शराब की तस्करी के मामलों में संलिप्त रही है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उस पर पहले से ही कई गंभीर मामले दर्ज हैं, जिसके चलते वह पुलिस की नजरों में थी।
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प्रॉपर्टी में साझेदारी का दबाव बना रही थी अलका
पीड़ित कारोबारी के अनुसार अलका दीक्षित ने कुछ समय पूर्व उनकी मुलाकात खंडवा निवासी लाखन चौधरी से करवाई थी। लाखन मूल रूप से पीथमपुर के समीप खंडवा गांव का रहने वाला है। मुलाकात के दौरान लाखन ने स्वयं को एक बड़ा निवेशक और उद्योगपति बताते हुए देवास, धार, खंडवा तथा आसपास के अन्य जिलों में चल रहे प्रॉपर्टी बिजनेस में आधी हिस्सेदारी का प्रस्ताव दिया। जब कारोबारी ने घाटे और अन्य कारणों से इस व्यापारिक प्रस्ताव को पूरी तरह ठुकरा दिया, तो अलका और लाखन ने उन पर मानसिक दबाव बनाना प्रारंभ कर दिया।
अश्लील वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी
कारोबारी चौहान ने शिकायत में आरोप लगाया कि कुछ दिनों के पश्चात लाखन ने उनसे दोबारा संपर्क किया और धमकी भरे लहजे में कहा कि उन्हें प्रॉपर्टी के व्यवसाय में 50 प्रतिशत की साझेदारी देनी ही होगी, अन्यथा उनके पास मौजूद कारोबारी के अश्लील फोटो और वीडियो को सार्वजनिक कर दिया जाएगा। कारोबारी द्वारा इस धमकी को नजरअंदाज करने पर करीब 20 दिन पहले जब वह किसी कार्य से सुपर कॉरिडोर गए थे, तब अलका, उसका बेटा जयदीप और लाखन वहां पहुंचे। तीनों ने कारोबारी के साथ मारपीट की और एक करोड़ रुपए की मांग करते हुए जान से मारने की धमकी दी।
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कारोबारी की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर क्राइम ब्रांच ने एक गुप्त कार्ययोजना तैयार की। 17 मई की देर रात वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एक आपात बैठक हुई, जिसमें आरोपियों को दबोचने के लिए 'मिशन सीक्रेट' की रूपरेखा तैयार की गई। इसके लिए 40 कुशल जवानों को शामिल कर 7 अलग-अलग टीमें गठित की गईं। इन टीमों ने रात के समय द्वारिकापुरी और पीथमपुर में एक साथ छापेमारी की। पुलिस ने अलका के बेटे जयदीप, स्वयं अलका दीक्षित और लाखन चौधरी को अलग-अलग स्थानों से घेराबंदी कर हिरासत में ले लिया। इसके बाद भोपाल से मुख्य सूत्रधार श्वेता जैन को भी हिरासत में लेकर इंदौर लाया गया।
पुलिस विभाग के हेड कॉन्स्टेबल की संलिप्तता सामने आई
इस पूरे मामले में उस समय एक नया मोड़ आया जब जांच के दौरान इंटेलिजेंस ब्रांच के हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा की भूमिका संदिग्ध पाई गई। तकनीकी जांच और मोबाइल चैटिंग से यह सिद्ध हुआ कि विनोद शर्मा लगातार अलका दीक्षित के संपर्क में था। अलका ने कारोबारी के आपत्तिजनक वीडियो और फोटो विनोद को भेजे थे, जिसके बाद विनोद ने ही अलका को कारोबारी को डराने और ब्लैकमेल करने की रणनीति सुझाई थी। इस इनपुट के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हेड कॉन्स्टेबल को उसके सरकारी आवास से हिरासत में ले लिया और उसका लैपटॉप तथा मोबाइल फोन जब्त कर लिया।
कई लोगों को ब्लैकमेल करने की संभावना
पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि अलका दीक्षित का आपराधिक इतिहास काफी लंबा है और उस पर पूर्व में 17 से अधिक मामले दर्ज हैं। वह प्रारंभ में अवैध शराब के परिवहन और तस्करी में लिप्त थी, किंतु बाद में वह अवैध मादक पदार्थों और ड्रग्स के नेटवर्क से भी जुड़ गई थी। पुलिस प्रशासन को यह आशंका है कि यह गिरोह लंबे समय से शहर के कई संभ्रांत और धनी लोगों को अपने जाल में फंसाकर ब्लैकमेल कर रहा था। वर्तमान में पुलिस सभी आरोपियों को रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ कर रही है।

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