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Indore News: उज्जैन सिंहस्थ के दौरान इन 8 जगहों पर जाना न भूलें, वरना बाद में पछताएंगे

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Arjun Richhariya Updated Mon, 08 Jun 2026 06:42 AM IST
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सार

सिंहस्थ 2028 महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग इंदौर, उज्जैन, महेश्वर, ओंकारेश्वर और खंडवा में करोड़ों रुपये की लागत से धार्मिक और पर्यटक स्थलों का कायाकल्प कर रहा है।

Indore News Infrastructure Plan for Simhastha 2028 in Ujjain Omkareshwar
इंदौर का लालबाग पैलेस। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार

सिंहस्थ 2028 के भव्य आयोजन को लेकर उज्जैन के साथ-साथ अब इंदौर, ओंकारेश्वर और खंडवा में भी तैयारियां बेहद तेज हो गई हैं। यह धार्मिक मेला न केवल उज्जैन बल्कि पूरे मालवा निमाड़ अंचल के पर्यटन क्षेत्र को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाला साबित होगा। सिंहस्थ के आयोजन के दौरान इंदौर शहर को सबसे बड़े सहयोगी केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग इंदौर संभाग के अंतर्गत आने वाले इंदौर-ओंकारेश्वर, महेश्वर और खंडवा में करोड़ों रुपए के विभिन्न विकास कार्य संचालित करने जा रहा है। इन विकास कार्यों के लिए सरकारी बजट के साथ-साथ कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी सीएसआर फंड और आम जनता के सहयोग का भी सहारा लिया जा रहा है। क्षेत्र की कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं भी इन पवित्र स्थलों पर निर्माण कार्यों में खुद आगे बढ़कर रुचि दिखा रही हैं। विभाग ने इन सभी प्रमुख परियोजनाओं को साल 2027 तक पूरी तरह से मुकम्मल करने का लक्ष्य तय किया है। 


1. डेढ़ क्विंटल चांदी निकाली, 10 फीट चौड़ा करेंगे खजराना का द्वार
सिंहस्थ में आने वाले देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं को देखते हुए खजराना गणेश मंदिर में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई। भक्तों को बप्पा के सुगम व नजदीक से दर्शन कराने के लिए मंदिर प्रबंध समिति ने गर्भगृह के मुख्य प्रवेश द्वार को 10 फीट चौड़ा करने का निर्णय लिया। इस जीर्णोद्धार के लिए मुख्य द्वार के ढांचे पर मढ़ी हुई करीब 150 किलो (1.5 क्विंटल) चांदी निकाली गई। निर्माण के दौरान मूल ढांचे की मजबूती परखने के लिए SGSITS की इंजीनियरिंग टीम ने मौके पर पहुंचकर विशेष तकनीकी टेस्टिंग की है। गेट को 10 फीट चौड़ा करने से वीआईपी और आम श्रद्धालुओं की कतारें समानांतर रूप से आसानी से आगे बढ़ सकेंगी। भक्तों को दूर से ही बप्पा के स्पष्ट दर्शन होंगे। इसके अलावा परिसर में कई अन्य निर्माण भी किए जाने हैं।
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2. सात करोड़ में बन रहा रणजीत हनुमान का भव्य कॉरिडोर
शहर के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित अतिप्राचीन श्री रणजीत हनुमान मंदिर जल्द ही नए स्वरूप में श्रद्धालुओं के सामने होगा। यहां तैयार किए जा रहे रणजीत लोक का काम काफी तेजी से चल रहा है। सात करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा रणजीत लोक अगले डेढ़ साल में श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट में 25 फीट चौड़ा पाथवे, सुंदरकांड के प्रसंगों वाली दीवारें और आधुनिक जनसुविधाएं शामिल होंगी, जिसका लाभ भक्तों को सिंहस्थ से पहले मिलने लगेगा। 
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3. राजबाड़ा दरबार हॉल का कायाकल्प
इंदौर के ऐतिहासिक राजबाड़ा स्थित दरबार हॉल के संरक्षण और विकास की कमान भी सिंहस्थ मद को सौंपी गई है। इस ऐतिहासिक परिसर के लिए। इस योजना के तहत इस साल के अंत तक सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। उज्जैन आने वाले अधिकतर पर्यटक यहां पर जरूर आते हैं। यहां पर अभी हॉल का जीर्णोद्धार चल रहा है और पुरानी संरचना को संरक्षित रखते हुए सभी कार्य किए जा रहे हैं। 

4. लाल बाग पैलेस को मिला नया स्वरूप
इंदौर के प्रसिद्ध लाल बाग पैलेस में भी आधुनिकीकरण और बाउंड्री वॉल के निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। सिंहस्थ मद से यहां पर बड़े स्तर पर काम चल रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि एक इस साल इस पूरे परिसर का काम संपन्न कर लिया जाएगा। 

5. इंदौर, महेश्वर और ओंकारेश्वर में ठहरने की हाईटेक व्यवस्था
पर्यटकों को बेहतर आवास सुविधाएं देने के लिए महेश्वर स्थित नर्मदा रिसॉर्ट का नवीनीकरण सीधे पर्यटन विभाग द्वारा कराया जा रहा है। इसके साथ ही इंदौर जिले के चोरल रिसॉर्ट को भी सिंहस्थ के आगमन को ध्यान में रखकर नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। यहां पर्यटन विभाग विकास कार्य करवा रहा है, जिसे बाद में पीपीपी मोड यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर संचालित करने की योजना है। इन दोनों रिसॉर्ट्स को इस प्रकार से अपग्रेड किया जा रहा है जिससे देश के साथ-साथ विदेशों से आने वाले वीआईपी मेहमान भी विश्वस्तरीय सुविधाओं का आनंद ले सकें। वहीं, ओंकारेश्वर में भी पचास करोड़ रुपये के निवेश से पीपीपी मोड पर एक नए अंतरराष्ट्रीय स्तर के होटल का निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है।

6. महेश्वर में अहिल्या लोक का भव्य निर्माण
ऐतिहासिक नगरी महेश्वर में सिंहस्थ मद के अंतर्गत अहिल्या लोक का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। साइट पर काम शुरू हो चुका है और इसे पूरा करने की अंतिम समय सीमा साल 2027 तय की गई है। 

7. ओंकारेश्वर परिक्रमा पथ और गुफाओं का संरक्षण
पवित्र धार्मिक स्थल ओंकारेश्वर में परिक्रमा पथ के चौड़ीकरण और विकास का काम सिंहस्थ बजट से चल रहा है। प्रशासन का दावा है कि यह काम साल 2027 के शुरुआत तक हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही आदिगुरु शंकराचार्य की ऐतिहासिक गुफा के मूल स्वरूप को संरक्षित करने का काम भी इसी मद से किया जा रहा है, जो अगले दो महीनों में पूर्ण हो जाएगा। ओंकारेश्वर परिक्रमा पथ के तहत मुख्य रास्तों को चौड़ा करना, सुंदर फ्लोरिंग बिछाना, श्रद्धालुओं के लिए शेड का निर्माण, आकर्षक स्वागत द्वार और कई नए व्यू पॉइंट्स बनाना शामिल है।

8. संत सिंगाजी समाधि स्थल का विकास
खंडवा जिले के प्रसिद्ध धार्मिक केंद्र संत सिंगाजी समाधि स्थल पिपल्या माफी के विकास कार्यों को जनवरी 2027 तक पूरा करने की समय सीमा दी गई है। इस स्थल पर सरकार और स्थानीय प्रशासन विभिन्न स्तरों पर काम करवा रहा है। यहां जनसहयोग तथा विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड से भी करोड़ों रुपए जुटाकर कई विकास कार्य किए जा रहे हैं। मालवा निमाड़ अंचल के निवासियों के लिए यह बेहद आस्था का केंद्र है, जहां प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु मत्था टेकने पहुंचते हैं।

बदलेगी पूरे मालवा अंचल के पर्यटन की तस्वीर
ट्रेवल एजेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ चैप्टर के चेयरमैन हेमेंद्र सिंह जादौन ने इस संबंध में बताया कि सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु इंदौर, उज्जैन और ओंकारेश्वर के त्रिकोण के बीच प्रवास करेंगे। मध्य प्रदेश के धार्मिक पर्यटन उद्योग के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक अवसर साबित होने वाला है। इस महाआयोजन को सफल बनाने के लिए सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों की टीमें लगातार समीक्षा बैठकें आयोजित कर रही हैं, जिसमें पर्यटन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया जाता है। सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि सिंहस्थ में आने वाले किसी भी श्रद्धालु को उज्जैन, इंदौर या ओंकारेश्वर की यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और उनकी यात्रा पूरी तरह से सुगम और आरामदायक बनी रहे। इसी दूरगामी सोच को ध्यान में रखकर इन सभी विकास योजनाओं का खाका खींचा गया है।
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