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Indore News: 100 करोड़ के आधुनिक बस टर्मिनल में तली गईं पूरियां, भंडारे में पहुंचे नेता, अधिकारी अनजान
Tue, 18 Aug 2026 07:24 PM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Tue, 18 Aug 2026 07:24 PM IST
सार
Indore News: आईएसबीटी कुमेड़ी से 2 वर्ष बीत जाने के बाद भी बसों का परिचालन शुरू नहीं हो सका है, लेकिन परिसर में भंडारे का आयोजन कर दिया गया। भंडारे में यात्रियों की सीटों पर बैठाकर भोजन कराया गया और टर्मिनल के भीतर खाना पकाया गया।
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टंट्या मामा भील बस टर्मिनल से बसों की जगह शुरू हुआ भंडारा।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) द्वारा 100 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से निर्मित टंट्या मामा भील अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) कुमेड़ी अभी तक यात्रियों के लिए आरंभ नहीं हो पाया है, लेकिन अब इसका उपयोग भंडारे के लिए होने लगा है। सावन मास के अवसर पर आईएसबीटी परिसर में स्थित एक प्राचीन मंदिर में भंडारे का आयोजन किया गया।
टर्मिनल के भीतर हुआ आयोजन
एयरपोर्ट जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं वाले इस टर्मिनल के अंदर पूरियां तली गईं और यात्रियों के बैठने के लिए बनाई गई सीटों पर लोगों को कतार में बैठाकर प्रसाद परोसा गया। आईएसबीटी से बसों के संचालन की तिथि अभी तक तय नहीं हो पाई है। इस प्रकार 100 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस टर्मिनल का मुख्य उद्देश्य पूरा होने के स्थान पर इसका उपयोग धार्मिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।
2 वर्ष से बंद पड़ा है परिसर
प्राधिकरण ने आईएसबीटी के निर्माण हेतु भूमि अधिग्रहण कर करोड़ों रुपये व्यय किए थे, किंतु लगभग 2 वर्ष बीत जाने के बाद भी यहां से नियमित बसों का संचालन शुरू नहीं हो सका है। आम जनता के लिए बंद पड़े इस परिसर में बिना अनुमति आयोजन होने से इसकी उपयोगिता और देखरेख पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। यह आयोजन क्षेत्र के स्थानीय निवासियों के द्वारा कराया गया था, जिसके लिए संबंधित विभाग से कोई औपचारिक अनुमति भी नहीं ली गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मामले में अनभिज्ञता व्यक्त करते हुए जांच कराने की बात कही है। आईडीए के सीईओ परीक्षित झाड़े ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। मामले में जांच कराई जाएगी।
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आयोजन में जनप्रतिनिधि और पार्षद भी पहुंचे
आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिनमें स्थानीय जनप्रतिनिधि और पार्षद भी शामिल हुए। जिस टर्मिनल के संचालन को लेकर लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं, उसी परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में विरोध के स्थान पर राजनीतिक सहभागिता देखने को मिली, जिसे लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
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टर्मिनल के भीतर हुआ आयोजन
एयरपोर्ट जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं वाले इस टर्मिनल के अंदर पूरियां तली गईं और यात्रियों के बैठने के लिए बनाई गई सीटों पर लोगों को कतार में बैठाकर प्रसाद परोसा गया। आईएसबीटी से बसों के संचालन की तिथि अभी तक तय नहीं हो पाई है। इस प्रकार 100 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस टर्मिनल का मुख्य उद्देश्य पूरा होने के स्थान पर इसका उपयोग धार्मिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।
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2 वर्ष से बंद पड़ा है परिसर
प्राधिकरण ने आईएसबीटी के निर्माण हेतु भूमि अधिग्रहण कर करोड़ों रुपये व्यय किए थे, किंतु लगभग 2 वर्ष बीत जाने के बाद भी यहां से नियमित बसों का संचालन शुरू नहीं हो सका है। आम जनता के लिए बंद पड़े इस परिसर में बिना अनुमति आयोजन होने से इसकी उपयोगिता और देखरेख पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। यह आयोजन क्षेत्र के स्थानीय निवासियों के द्वारा कराया गया था, जिसके लिए संबंधित विभाग से कोई औपचारिक अनुमति भी नहीं ली गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मामले में अनभिज्ञता व्यक्त करते हुए जांच कराने की बात कही है। आईडीए के सीईओ परीक्षित झाड़े ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। मामले में जांच कराई जाएगी।
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आयोजन में जनप्रतिनिधि और पार्षद भी पहुंचे
आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिनमें स्थानीय जनप्रतिनिधि और पार्षद भी शामिल हुए। जिस टर्मिनल के संचालन को लेकर लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं, उसी परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में विरोध के स्थान पर राजनीतिक सहभागिता देखने को मिली, जिसे लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
