Indore News: नर्मदा को नगर परिषद के कर्मचारी ही कर रहे मैला, घाटों से उठाया कचरा नदी में डाला
इंदौर के समीप महेश्वर घाट पर नगर परिषद के कर्मचारी ही नर्मदा नदी को मेला करने पर उतारु है। मुक्तिधाम से निकले कचरे और राख को कर्मचारियों ने थैलों में भरकर नदी में बहा दिया। इसके वीडियों भी वायरल हो रहे है।
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नर्मदा नदी को साफ रखने और उसका प्रवाह बनाए रखने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन नदी में गंदगी फैलाने के मामले में आम लोगों से पहले महेश्वर में नगर परिषद के कर्मचारी ही आगे नजर आ रहे हैं। महेश्वर का वायरल वीडियो स्वच्छता के दावों पर सवाल खड़े कर रहा है।
घाटों की सफाई के दौरान एकत्रित कचरे को नगर परिषद के आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा नर्मदा किनारे, घाट के ठीक समीप खाली करते हुए देखा गया। जिस स्थान पर कचरा डाला गया, वहां से बरसात या तेज बहाव के दौरान उसके नदी में बह जाने की आशंका बनी रहती है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नगर परिषद के आउटसोर्स कर्मचारी घाटों से एकत्रित कचरे को नदी किनारे बने हिस्से में खाली करते दिखाई दिए। घाट पर मौजूद लोगों ने इसकी तस्वीरें भी लीं। उनका कहना है कि घाटों से निकले कचरे को सीधे नगर परिषद के ट्रैक्टर-ट्रॉली या कचरा वाहन के माध्यम से निर्धारित डंपिंग स्थल तक पहुंचाया जाना चाहिए था।बरसात या तेज बहाव के दौरान खुले में पड़ा कचरा बहकर नदी तक पहुंच सकता है।
नगर परिषद समय-समय पर नदी की स्वच्छता बनाए रखने की अपील करती है। सफाई कर्मचारियों को भी निर्देश दिए जाते हैं कि कचरे को ट्रेंचिंग ग्राउंड तक पहुंचाया जाए। ऐसे में घाट के समीप कचरा डाले जाने की घटना ने नगर परिषद की निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
लोगों का कहना है कि महेश्वर की पहचान मां नर्मदा से है। इसी नदी का जल हजारों लोगों की आस्था के साथ-साथ पेयजल का भी महत्वपूर्ण स्रोत है। पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से यह आवश्यक है कि घाटों से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निस्तारण किया जाए। नर्मदा का जल इंदौर और महू सहित अन्य क्षेत्रों में भी पेयजल के रूप में सप्लाई किया जाता है। इसलिए नदी की स्वच्छता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
