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Indore News: इंदौर में सूखते जलस्रोत और टैंकरों पर टिकती प्यास, जहां नर्मदा नहीं वहां 'वॉटर इमरजेंसी' के हालात

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Arjun Richhariya Updated Sat, 11 Apr 2026 08:37 PM IST
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सार

Indore News: इंदौर में गर्मी की शुरुआत के साथ ही जलसंकट गहरा गया है। गिरते भूजल स्तर के कारण सरकारी बोरिंग और प्रमुख तालाब सूखने लगे हैं। नर्मदा पाइप लाइन के अभाव वाले क्षेत्रों में लोग महंगे निजी टैंकरों पर निर्भर हैं।

Indore News Severe Water Crisis as Groundwater Levels Deplete and Lakes Run Dry
पिपल्याहाना तालाब की दुर्दशा। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार

इंदौर अपनी स्वच्छता के लिए देश भर में विख्यात है लेकिन हर साल गर्मी का मौसम आते ही जलसंकट की गंभीर चुनौती से रूबरू होता है। इस वर्ष अप्रैल के दूसरे सप्ताह में ही तापमान बढ़ने के साथ शहर के विभिन्न हिस्सों से पानी की किल्लत की खबरें आने लगी हैं। स्थिति यह है कि न केवल भूजल स्तर नीचे जा रहा है, बल्कि पारंपरिक जल स्रोत भी दम तोड़ रहे हैं। नगर निगम के टैंकर भी शहर की प्यास बुझाने के लिए कम पड़ने लगे हैं। 
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सूखते सरकारी बोरिंग और जनता परेशान
इंदौर नगर निगम ने शहर की प्यास बुझाने के लिए 6 हजार से अधिक बोरिंग किए हैं, लेकिन गर्मी शुरू होते ही इनमें से अधिकांश जवाब देने लगे हैं। नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, कई क्षेत्रों में बोरिंग पूरी तरह सूख चुके हैं या उनमें पानी का स्तर इतना कम हो गया है कि मोटर चलाना संभव नहीं है। इसके कारण घनी आबादी वाले इलाकों में हाहाकार मचा हुआ है। सुबह होते ही लोग सार्वजनिक नलों और खाली बोरिंग के पास लंबी कतारों में खड़े नजर आते हैं।
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कई क्षेत्रों में नर्मदा लाइन का अभाव और टैंकरों पर निर्भरता बहुत अधिक
इंदौर का एक बड़ा हिस्सा ऐसा है जहां अभी तक नर्मदा पाइप लाइन का विस्तार नहीं हो पाया है। इन क्षेत्रों के निवासी पूरी तरह से निजी या सरकारी बोरिंग पर निर्भर थे। अब जब बोरिंग सूख रहे हैं, तो इन इलाकों के पास पानी के टैंकरों के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। टैंकरों के भरोसे रहने वाली जनता को न केवल पानी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है, बल्कि कई बार महंगे दामों पर निजी टैंकर खरीदने को मजबूर होना पड़ता है।

तालाबों का घटता जलस्तर, भविष्य के लिए खतरे की घंटी
शहर की प्यास बुझाने में यशवंत सागर, बड़ी बिलावली और सिरपुर जैसे तालाबों की बड़ी भूमिका रही है लेकिन इस वर्ष गर्मी के शुरुआती दौर में ही इनका जलस्तर चिंताजनक रूप से कम हो गया है। जलस्तर कम होने से भविष्य में फिल्टर प्लांट की क्षमता पर भी असर पड़ने की आशंका है। तालाबों के किनारे बढ़ता अतिक्रमण और गाद भी पानी संग्रहण की क्षमता को कम कर रहे हैं।

पिपल्याहाना तालाब की दुर्दशा और आसपास का गिरता भूजल
विशेषज्ञों के अनुसार, शहर के प्रमुख पिपल्याहाना तालाब और कई अन्य जल स्त्रोतों को पूरी तरह सुखा दिया जाना शहर के पर्यावरण के लिए एक बड़ा झटका है। तालाब, कुएं और बावड़ी केवल सतही जल का स्रोत नहीं होते, बल्कि वे आसपास के बड़े क्षेत्र के भूजल को रिचार्ज करने का काम करते हैं। पिपल्याहाना तालाब के सूखने से आसपास की कॉलोनियों के बोरिंग अचानक ठप हो गए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि जल स्रोतों के साथ की गई छेड़छाड़ का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है।

टैंकरों के बढ़ते दाम से जनता परेशान
नगर निगम शहर में फिलहाल 300 से अधिक टैंकर चल रहे हैं। शहर की प्यास बुझाने के लिए यह टैंकर कम पड़ने लगे हैं और निजी टैंकर लगभग 500 रुपए से अधिक के मिल रहे हैं। मई और जून में एक टैंकर 700 से 900 रुपए तक मिलता है। शहर में निजी टैंकरों के द्वारा पानी की सप्लाई भी अब एक बड़े व्यापार का रूप ले चुकी है। 

तालाबों को पुनर्जीवित करना होगा
भूजल व पेयजल सुरक्षा विशेषज्ञ सुधींद्र मोहन शर्मा ने कहा कि इंदौर को इस संकट से उबारने के लिए केवल नर्मदा पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। हमें रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य बनाना होगा और पिपल्याहाना जैसे तालाबों को पुनर्जीवित करना होगा। यदि समय रहते भूजल संवर्धन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में और भी मुश्किल हालात पैदा हो सकते हैं।

नर्मदा का चौथा चरण इंदौर को बड़ी राहत देगा
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि इंदौर में पानी की कमी न हो। नर्मदा के चौथे चरण की शुरुआत का जो सपना लंबे समय से देखा जा रहा था वह अब साकार होने जा रहा है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद शहर की पानी की समस्या काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है। आने वाले वर्षों में इंदौर की बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए इस योजना को तैयार किया गया है।

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