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Eco Friendly: मिट्टी-चूने का घर बनाया, 5 डिग्री कम हुआ तापमान, बारिश का पानी ही पर्याप्त
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Wed, 17 Jun 2026 06:20 AM IST
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सार
इस घर में 20 हजार लीटर का रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, 5 किलोवाट का सोलर पैनल और ग्रे-वॉटर रीसाइक्लिंग की व्यवस्था है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना जीवन की बुनियादी जरूरतें पूरी होती हैं।
अर्चना और मनीष गेहलोद
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
आईआईटी से पढ़ाई और अमेरिका में शानदार करियर को अलविदा कहकर एक दंपति ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनोखी मिसाल पेश की है। अर्चना और मनीष गेहलोद ने वर्ष 2013 में अपनी मोटी तनख्वाह वाली नौकरी छोड़ दी और अपनी जिंदगी को पूरी तरह से प्रकृति के रंग में ढालने का फैसला किया। इस दंपति ने अपने लिए एक ऐसा इको-नेचुरल घर तैयार किया है, जहाँ रोजमर्रा की ज्यादातर जरूरतें प्रकृति के संसाधनों से ही पूरी होती हैं। पानी, बिजली, निर्माण सामग्री और कचरा प्रबंधन तक, हर व्यवस्था को इसी सोच के साथ तैयार किया गया है कि पर्यावरण पर इसका कम से कम असर पड़े। आज यह घर पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुका है।
पारंपरिक और प्राकृतिक तरीकों से हुआ निर्माण
इस अनोखे आशियाने को बनाने में आधुनिक सीमेंट की जगह पारंपरिक और प्राकृतिक तरीकों को अपनाया गया है। इसकी दीवारों की चुनाई में चूने के साथ उड़द दाल, मेथी, गुड़ और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों का मिश्रण लगाया गया है। सबसे खास बात यह है कि घर की दीवारों पर किसी भी तरह का रासायनिक प्लास्टर नहीं किया गया है। निर्माण कार्य में स्थानीय स्तर पर मिलने वाले पत्थर, ईंटें और बबूल की लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, यह इको-नेचुरल हाउस आम पारंपरिक घरों की तुलना में लगभग 50 फीसदी कम कार्बन फुटप्रिंट उत्पन्न करता है, जो पर्यावरण के लिए बेहद फायदेमंद है।
सालाना 20 हजार लीटर बारिश के पानी का संचय
इस घर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसका बेहतरीन रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है। मानसून के दौरान बारिश के पानी को विशेष रूप से फिल्टर करके 20 हजार लीटर क्षमता के एक बड़े भूमिगत टैंक में जमा किया जाता है। इस टैंक की बनावट ऐसी है कि इसमें न तो हवा पहुंचती है और न ही रोशनी, जिसके कारण पानी बिना खराब हुए लंबे समय तक पूरी तरह सुरक्षित रहता है। अर्चना के मुताबिक, उनके परिवार में पीने और खाना बनाने के लिए पूरे साल इसी संचित पानी का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पानी की बर्बादी पूरी तरह रुक गई है।
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सौर ऊर्जा से रोशन और प्राकृतिक रूप से ठंडा
घर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि दिनभर इसमें पर्याप्त धूप, रोशनी और शुद्ध हवा मिलती रहे। अपनी बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए दंपति ने घर की छत पर 5 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाया है। बेहतरीन वेंटिलेशन और नेचुरल कूलिंग सिस्टम के कारण इस घर का तापमान शहर के सामान्य तापमान की तुलना में हमेशा 5 डिग्री तक कम रहता है, जिससे यहाँ एसी या कूलर की जरूरत नहीं पड़ती। यह सस्टेनेबल लाइफस्टाइल इस घर के कुल कार्बन फुटप्रिंट को हर साल 70 फीसदी तक कम कर देती है।
ग्रे-वॉटर रीसाइक्लिंग और पक्षियों का प्राकृतिक बसेरा
यह पूरा घर और उसका परिसर करीब 1100 घने पेड़ों से घिरा हुआ है, जो इसे एक छोटे जंगल का रूप देता है। इस हरियाली के बीच वर्तमान में 100 से ज्यादा मोर और 50 से अधिक अन्य प्रजातियों के पक्षी निवास करते हैं। घर की डिजाइन तैयार करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि परिसर में मौजूद पुराने आम के पेड़ों को कोई नुकसान न पहुंचे। इसके अलावा, घर में इस्तेमाल होने वाले गंदे पानी के लिए ग्रे-वॉटर रीसाइक्लिंग और सूखे कचरे के लिए कम्पोस्टिंग सिस्टम भी लगाया गया है, जिससे घर का सारा कचरा एक संसाधन के रूप में दोबारा इस्तेमाल हो जाता है।
पारंपरिक और प्राकृतिक तरीकों से हुआ निर्माण
इस अनोखे आशियाने को बनाने में आधुनिक सीमेंट की जगह पारंपरिक और प्राकृतिक तरीकों को अपनाया गया है। इसकी दीवारों की चुनाई में चूने के साथ उड़द दाल, मेथी, गुड़ और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों का मिश्रण लगाया गया है। सबसे खास बात यह है कि घर की दीवारों पर किसी भी तरह का रासायनिक प्लास्टर नहीं किया गया है। निर्माण कार्य में स्थानीय स्तर पर मिलने वाले पत्थर, ईंटें और बबूल की लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, यह इको-नेचुरल हाउस आम पारंपरिक घरों की तुलना में लगभग 50 फीसदी कम कार्बन फुटप्रिंट उत्पन्न करता है, जो पर्यावरण के लिए बेहद फायदेमंद है।
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सालाना 20 हजार लीटर बारिश के पानी का संचय
इस घर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसका बेहतरीन रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है। मानसून के दौरान बारिश के पानी को विशेष रूप से फिल्टर करके 20 हजार लीटर क्षमता के एक बड़े भूमिगत टैंक में जमा किया जाता है। इस टैंक की बनावट ऐसी है कि इसमें न तो हवा पहुंचती है और न ही रोशनी, जिसके कारण पानी बिना खराब हुए लंबे समय तक पूरी तरह सुरक्षित रहता है। अर्चना के मुताबिक, उनके परिवार में पीने और खाना बनाने के लिए पूरे साल इसी संचित पानी का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पानी की बर्बादी पूरी तरह रुक गई है।
सौर ऊर्जा से रोशन और प्राकृतिक रूप से ठंडा
घर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि दिनभर इसमें पर्याप्त धूप, रोशनी और शुद्ध हवा मिलती रहे। अपनी बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए दंपति ने घर की छत पर 5 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाया है। बेहतरीन वेंटिलेशन और नेचुरल कूलिंग सिस्टम के कारण इस घर का तापमान शहर के सामान्य तापमान की तुलना में हमेशा 5 डिग्री तक कम रहता है, जिससे यहाँ एसी या कूलर की जरूरत नहीं पड़ती। यह सस्टेनेबल लाइफस्टाइल इस घर के कुल कार्बन फुटप्रिंट को हर साल 70 फीसदी तक कम कर देती है।
ग्रे-वॉटर रीसाइक्लिंग और पक्षियों का प्राकृतिक बसेरा
यह पूरा घर और उसका परिसर करीब 1100 घने पेड़ों से घिरा हुआ है, जो इसे एक छोटे जंगल का रूप देता है। इस हरियाली के बीच वर्तमान में 100 से ज्यादा मोर और 50 से अधिक अन्य प्रजातियों के पक्षी निवास करते हैं। घर की डिजाइन तैयार करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि परिसर में मौजूद पुराने आम के पेड़ों को कोई नुकसान न पहुंचे। इसके अलावा, घर में इस्तेमाल होने वाले गंदे पानी के लिए ग्रे-वॉटर रीसाइक्लिंग और सूखे कचरे के लिए कम्पोस्टिंग सिस्टम भी लगाया गया है, जिससे घर का सारा कचरा एक संसाधन के रूप में दोबारा इस्तेमाल हो जाता है।
