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Indore News: महिला श्रद्धालु की आस्था ने कांवड़ियों को भी किया प्रभावित, 70 दिन में पूरी होगी कांवड़ यात्रा
Mon, 03 Aug 2026 09:53 AM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Mon, 03 Aug 2026 09:53 AM IST
सार
Indore News: भिंड के अति प्राचीन वनखंडेश्वर मंदिर से निकली वंदना राठौर अपने कंधे पर 11 किलोग्राम वजनी भगवान शिव की प्रतिमा लेकर पैदल इंदौर पहुंची हैं।
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वंदना राठौर और नितिन शर्मा
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर शहर में शिव भक्ति और दृढ़ संकल्प का एक अद्भुत उदाहरण देखने को मिला है। भिंड जिले के अति प्राचीन और प्रसिद्ध वनखंडेश्वर मंदिर से पैदल यात्रा पर निकलीं महिला श्रद्धालु वंदना राठौर रविवार को इंदौर पहुंचीं। कंधे पर भगवान भोलेनाथ की 11 किलोग्राम वजनी प्रतिमा लेकर चल रहीं वंदना की इस निष्ठापूर्ण पदयात्रा को देखकर हर कोई आश्चर्यचकित और अभिभूत है।
700 किलोमीटर और 70 दिन का लक्ष्य
वंदना राठौर ने अपनी इस यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने यह पदयात्रा 17 जून को भिंड से शुरू की थी। उनका मुख्य लक्ष्य 70 दिन की अवधि में लगभग 700 किलोमीटर की दूरी तय करना है। इंदौर के इस पड़ाव के बाद यह यात्रा कुल 2 महीने 10 दिन का समय पूरा करके वापस भिंड पहुंचकर विधिवत संपन्न होगी। जब वह भारी-भरकम शिव प्रतिमा को कंधे पर उठाकर इंदौर पहुंचीं, तो स्थानीय निवासियों और अन्य शिवभक्तों ने उनका स्वागत किया।
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सावन के महीने में उमड़ी अपार आस्था
पवित्र सावन मास के दौरान इंदौर में आस्था के ऐसे अनोखे दृश्य लगातार देखने को मिल रहे हैं। वंदना के साथ इस आध्यात्मिक यात्रा में मुरैना निवासी नितिन शर्मा भी शामिल हैं। यह दोनों ही श्रद्धालु उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध बाबा महाकाल के दर्शन करने के उद्देश्य से निकले हैं। यात्रा के दौरान वंदना लगातार 11 किलोग्राम वजनी भगवान शिव की प्रतिमा को अपने कंधे पर रखकर सफर तय कर रही हैं।
48 दिन से जारी है नितिन का सफर
मुरैना के रहने वाले नितिन शर्मा ने बताया कि उन्होंने मुरैना शहर से लगभग 500 किलोमीटर लंबी पदयात्रा का संकल्प लिया है। उनकी इस यात्रा को चलते हुए 48 दिन का समय बीत चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महाकाल मंदिर में दर्शन और पूजन करने के बाद वे आगे ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए भी जाएंगे।
प्रतिदिन 10 से 23 किलोमीटर का सफर
भिंड निवासी वंदना राठौर ने अपनी दिनचर्या के बारे में बताते हुए कहा कि वह प्रतिदिन 10 से 23 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करती हैं। भगवान शिव की 11 किलोग्राम वजनी प्रतिमा को हमेशा कंधे पर धारण किए रहना उनकी अटूट श्रद्धा को दर्शाता है। उनकी यह पूरी पदयात्रा लगभग 70 दिनों में समाप्त होगी। रास्ते में पड़ने वाले विभिन्न मंदिरों और स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा उनके रहने और भोजन की समुचित व्यवस्था की जाती है। उज्जैन में महाकाल के दर्शन पूर्ण करने के पश्चात् वह भी ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए प्रस्थान करेंगी।
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700 किलोमीटर और 70 दिन का लक्ष्य
वंदना राठौर ने अपनी इस यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने यह पदयात्रा 17 जून को भिंड से शुरू की थी। उनका मुख्य लक्ष्य 70 दिन की अवधि में लगभग 700 किलोमीटर की दूरी तय करना है। इंदौर के इस पड़ाव के बाद यह यात्रा कुल 2 महीने 10 दिन का समय पूरा करके वापस भिंड पहुंचकर विधिवत संपन्न होगी। जब वह भारी-भरकम शिव प्रतिमा को कंधे पर उठाकर इंदौर पहुंचीं, तो स्थानीय निवासियों और अन्य शिवभक्तों ने उनका स्वागत किया।
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पवित्र सावन मास के दौरान इंदौर में आस्था के ऐसे अनोखे दृश्य लगातार देखने को मिल रहे हैं। वंदना के साथ इस आध्यात्मिक यात्रा में मुरैना निवासी नितिन शर्मा भी शामिल हैं। यह दोनों ही श्रद्धालु उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध बाबा महाकाल के दर्शन करने के उद्देश्य से निकले हैं। यात्रा के दौरान वंदना लगातार 11 किलोग्राम वजनी भगवान शिव की प्रतिमा को अपने कंधे पर रखकर सफर तय कर रही हैं।
48 दिन से जारी है नितिन का सफर
मुरैना के रहने वाले नितिन शर्मा ने बताया कि उन्होंने मुरैना शहर से लगभग 500 किलोमीटर लंबी पदयात्रा का संकल्प लिया है। उनकी इस यात्रा को चलते हुए 48 दिन का समय बीत चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महाकाल मंदिर में दर्शन और पूजन करने के बाद वे आगे ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए भी जाएंगे।
प्रतिदिन 10 से 23 किलोमीटर का सफर
भिंड निवासी वंदना राठौर ने अपनी दिनचर्या के बारे में बताते हुए कहा कि वह प्रतिदिन 10 से 23 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करती हैं। भगवान शिव की 11 किलोग्राम वजनी प्रतिमा को हमेशा कंधे पर धारण किए रहना उनकी अटूट श्रद्धा को दर्शाता है। उनकी यह पूरी पदयात्रा लगभग 70 दिनों में समाप्त होगी। रास्ते में पड़ने वाले विभिन्न मंदिरों और स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा उनके रहने और भोजन की समुचित व्यवस्था की जाती है। उज्जैन में महाकाल के दर्शन पूर्ण करने के पश्चात् वह भी ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए प्रस्थान करेंगी।
