सावन विशेष: उज्जैन ही नहीं, इंदौर में भी विराजते हैं महाकाल, होल्कर काल का है ऐतिहासिक मंदिर; जानें विशेषताएं
Sawan: सावन में इंदौर का हरसिद्धि माता मंदिर के समीप स्थित 125 वर्ष से अधिक प्राचीन महाकालेश्वर शिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। होल्कर काल में निर्मित इस मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व आज भी कायम है।
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सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। होल्कर राजवंश के शासनकाल में इंदौर में शिव, गणेश और देवी के अनेक मंदिरों का निर्माण कराया गया। शहर के अधिकांश प्राचीन मंदिर जूनी इंदौर क्षेत्र में स्थित हैं। इंदौर का नामकरण भी इन्द्रेश्वर महादेव मंदिर के नाम पर माना जाता है। खान (कान्ह) और सरस्वती नदी के तट पर स्थित छत्रीबाग क्षेत्र में आज भी कई प्राचीन शिव मंदिर मौजूद हैं।
जूनी इंदौर के साउथ तोड़ा क्षेत्र में स्थित 16वीं-17वीं शताब्दी के प्राचीन गणेश मंदिर का उल्लेख होल्करकालीन इतिहास की पुस्तकों में मिलता है। इस मंदिर के रखरखाव और पूजा-पाठ की व्यवस्था के लिए होल्कर राजवंश के प्रथम शासक मल्हारराव होल्कर ने पुजारी को कृषि भूमि दान में दी थी।
हरसिद्धि माता मंदिर का निर्माण हरिराव होल्कर (1834-1843) के शासनकाल में कराया गया था। इसी मंदिर के समीप स्थित महाकालेश्वर शिव मंदिर भी ऐतिहासिक महत्व रखता है। इंदौर के इतिहास संबंधी पुस्तकों में इसका निर्माण 19वीं शताब्दी में होना बताया गया है। मंदिर का निर्माण होल्कर शासकों ने कराया था।
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मंदिर में संगमरमर से निर्मित नंदी की आकर्षक प्रतिमा स्थापित है। गर्भगृह में प्रस्तर निर्मित शिवलिंग विराजमान है, जिस पर धातु से निर्मित सर्प का फन स्थापित है। गर्भगृह में देवी की प्रतिमा भी स्थापित है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर दोनों ओर द्वारपालों तथा भगवान गणेश की सुंदर प्रतिमाएं अंकित हैं।
इंदौर के निकट विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर (उज्जैन) और ममलेश्वर (ओंकारेश्वर) स्थित हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इंदौर शहर में भी हरसिद्धि माता मंदिर के समीप महाकालेश्वर शिव मंदिर मौजूद है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य प्रमुख पर्वों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं।
वर्तमान में मंदिर की पूजा-अर्चना का दायित्व विजय पुरी जी महाराज निभा रहे हैं। यह मंदिर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतर्गत संचालित होता है, जिसकी शाखा उज्जैन में भी है। जूना अखाड़ा शैव संप्रदाय का सबसे प्राचीन और सबसे बड़ा अखाड़ा माना जाता है।
