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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Indore: Temple debris was also used in the graves of Dhar Bhojshala complex; bodies were buried there until 19

धार भोजशाला परिसर की कब्रों पर नया विवाद: एएसआई सर्वे रिपोर्ट से बढ़ी हलचल, मुस्लिम पक्ष कोर्ट जाने को तैयार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Mon, 02 Mar 2026 07:55 AM IST
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सार

धार के भोजशाला परिसर की कब्रों के निर्माण में भोजशाला के ही टूटे हुए अवशेषों और पत्थरों का उपयोग किया गया है। इस परिसर के टाइटल को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है, जिसे लेकर मुस्लिम पक्ष अब कोर्ट जाने की तैयारी में है।

Indore: Temple debris was also used in the graves of Dhar Bhojshala complex; bodies were buried there until 19
भोजशाला परिसर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

धार के भोजशाला परिसर में लंबे समय से शवों को दफनाने का विवाद चला आ रहा है। यहाँ कुछ परिवारों के सदस्यों की मौत होने पर उन्हें परिसर के भीतर ही दफनाया जाता था। हालांकि, हिंदू समाज द्वारा इसका लगातार विरोध किया गया। विवाद बढ़ता देख साल 1997 में तत्कालीन कलेक्टर ने एक आदेश जारी कर भोजशाला में शव दफनाने पर रोक लगा दी थी। इस आदेश के बाद वहां अंतिम संस्कार बंद हुआ, लेकिन मस्जिद के सामने वाले हिस्से में आज भी कई पुरानी कब्रें मौजूद हैं।

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जांच में यह बात भी सामने आई है कि इन कब्रों को बनाने में उन पत्थरों का इस्तेमाल किया गया जो भोजशाला के हिस्सों को तोड़ने के बाद मलबे के रूप में वहां पड़े थे। एएसआई ने सर्वे के दौरान इन कब्रों के पास के इलाके की भी जांच की है। हालांकि इनके बारे में अभी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन यह साफ है कि शहर में अलग कब्रिस्तान होने के बावजूद कुछ लोग शवों को दफनाने के लिए भोजशाला परिसर का ही इस्तेमाल करते थे।
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भोजशाला के उस हिस्से में जहाँ मस्जिद बनी है, वहां के पत्थरों और गुंबदों पर ऐसी आकृतियां मिली हैं जो आमतौर पर मस्जिद निर्माण में नहीं होतीं। कुछ शिलालेखों पर पशुओं की आकृतियां बनी हुई हैं। वहीं, परिसर के 50 से ज्यादा शिलालेखों पर अरबी और फारसी में आयतें भी लिखी मिली हैं।

दूसरी तरफ, मुस्लिम समाज ने एएसआई की इस सर्वे रिपोर्ट को गलत बताते हुए इसे कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। इसके लिए धार के मुस्लिम प्रतिनिधियों ने वकीलों से मशविरा शुरू कर दिया है। कोर्ट ने इस रिपोर्ट पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए 16 मार्च तक का समय दिया है।

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