सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   krishna guruji on gudi padwa hindu new year new consciousness not just calendar

MP News: 'एक जनवरी देती है नया कैलेंडर, गुड़ी पड़वा देती है नई चेतना', कृष्णा गुरुजी ने दिया बड़ा संदेश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Ashutosh Pratap Singh Updated Mon, 16 Mar 2026 07:52 PM IST
विज्ञापन
सार

प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक कृष्णा गुरुजी ने कहा कि सनातन परंपरा में नववर्ष की वास्तविक शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी गुड़ी पड़वा से होती है। उन्होंने बताया कि 1 जनवरी आधुनिक कैलेंडर का नया साल है, जबकि गुड़ी पड़वा प्रकृति और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ा नववर्ष है।

krishna guruji on gudi padwa hindu new year new consciousness not just calendar
आध्यात्मिक चिंतक कृष्णा गुरुजी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक कृष्णा गुरुजी के अनुसार सनातन परंपरा में नववर्ष की वास्तविक शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी गुड़ी पड़वा से मानी जाती है। उन्होंने यह विचार अपनी पुस्तक “कलयुग पुराण” में विस्तार से बताए हैं। उनके अनुसार सनातन संस्कृति में यह दिन केवल नया साल नहीं बल्कि आध्यात्मिक और प्राकृतिक रूप से नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
Trending Videos


1 जनवरी और गुड़ी पड़वा के बीच अंतर

कृष्णा गुरुजी ने कहा कि आज पूरी दुनिया में 1 जनवरी को आधुनिक नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। यह मुख्य रूप से कैलेंडर और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। इसके विपरीत सनातन संस्कृति में गुड़ी पड़वा को प्रकृति और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ा नववर्ष माना गया है। उन्होंने बताया कि इस समय वसंत ऋतु अपने पूरे प्रभाव में होती है। पेड़ों पर नई पत्तियां निकलती हैं और प्रकृति में नए जीवन का संचार होता है। इसलिए सनातन परंपरा में इसी दिन से वर्ष का आरंभ माना गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


गुड़ी पड़वा का आध्यात्मिक महत्व

कृष्णा गुरुजी के अनुसार पुराणों में बताया गया है कि इसी दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने प्रकृति की रचना शुरू की थी। इसलिए इस दिन को सृष्टि के आरंभ का दिन भी माना जाता है। इसी दिन से विक्रम संवत की शुरुआत भी मानी जाती है, जो भारतीय कालगणना का महत्वपूर्ण आधार है।

ये भी पढ़ें- Dhar News: भोजशाला मामले में 16 मार्च को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई, ASI सर्वे रिपोर्ट पर पेश होंगी आपत्तियां

भगवान श्रीराम की विजय से भी जुड़ी है परंपरा

सनातन परंपरा में यह भी माना जाता है कि भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के बाद विजय ध्वज स्थापित करने की परंपरा से भी गुड़ी लगाने की प्रथा जुड़ी हुई है। यह विजय, सकारात्मक ऊर्जा और धर्म की स्थापना का प्रतीक मानी जाती है। कृष्णा गुरुजी ने कहा कि सनातन धर्म में हमारे अधिकांश त्योहार और उत्सव इसी आध्यात्मिक नववर्ष से शुरू होते हैं। इसलिए गुड़ी पड़वा केवल नया साल नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति में नए आध्यात्मिक चक्र की शुरुआत भी है।

गुड़ी और नीम-गुड़ की परंपरा का संदेश

गुड़ी पड़वा के दिन घरों के बाहर जो गुड़ी (ध्वज) लगाई जाती है, उसे समृद्धि, विजय और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वहीं इस दिन नीम और गुड़ खाने की परंपरा भी है। यह परंपरा जीवन का यह संदेश देती है कि मनुष्य को जीवन की कड़वाहट और मिठास दोनों को समान भाव से स्वीकार करना चाहिए।

कलयुग में इंसान जी रहा है दोहरा जीवन

कृष्णा गुरुजी ने कहा कि कलयुग में इंसान एक तरह से दोहरा जीवन जी रहा है। लोग अपना जन्मदिन तो अंग्रेज़ी कैलेंडर की तारीख से मनाते हैं, लेकिन जन्मपत्रिका और ज्योतिषीय गणना सनातन पंचांग की तिथि के अनुसार होती है। उनके अनुसार यह स्थिति बताती है कि आधुनिक जीवन में हम धीरे-धीरे अपनी परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं।

परंपराओं से जुड़ने का अवसर है गुड़ी पड़वा

कृष्णा गुरुजी ने समाज से आग्रह किया कि गुड़ी पड़वा जैसे पर्व हमें अपनी सनातन जड़ों और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ने का अवसर देते हैं। उन्होंने कहा कि यदि लोग अपने जन्मदिन को जन्मतिथि यानी पंचांग की तिथि के अनुसार भी मनाएं तो इससे हमारी संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

19 मार्च 2026 को मनाया जाएगा गुड़ी पड़वा

कृष्णा गुरुजी ने बताया कि इस वर्ष गुड़ी पड़वा 19 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। इस अवसर पर उन्होंने सभी देशवासियों को हिंदू नववर्ष और गुड़ी पड़वा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मकता और समृद्धि लेकर आए। साथ ही उन्होंने आग्रह किया कि इस आध्यात्मिक नववर्ष पर लोग यह संकल्प लें कि अपने जन्मदिन को केवल अंग्रेज़ी तारीख से ही नहीं बल्कि सनातन पंचांग की जन्म तिथि के अनुसार भी मनाएं, ताकि हमारी संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़े।

सनातन त्योहारों में प्रकृति और विज्ञान का समन्वय

कृष्णा गुरुजी के अनुसार सनातन धर्म के त्योहार केवल आस्था तक सीमित नहीं हैं। इनमें प्रकृति, विज्ञान और जीवन दर्शन का गहरा समन्वय दिखाई देता है। उन्होंने कहा, “1 जनवरी हमें केवल नया कैलेंडर देती है, लेकिन गुड़ी पड़वा हमें नई चेतना और जीवन का नया दृष्टिकोण देती है।”
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed