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Dhar Bhojshala Case: हाईकोर्ट के जज खुद भोजशाला का स्थल निरीक्षण करेंगे, दो अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू होगी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Abhishek Chendke
Updated Mon, 16 Mar 2026 04:05 PM IST
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सार
इंदौर हाईकोर्ट अब 2 अप्रैल से धार भोजशाला मामले की नियमित सुनवाई करेगा। इससे पहले जज स्वयं स्थल का निरीक्षण कर वास्तविकता का जायजा लेंगे। सभी पक्षों को कोर्ट अपना पक्ष रखने का मौका देगा।
धार भोजशाला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
धार भोजशाला मामले में सोमवार को इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि अब इस मामले में 2 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू होगी। इससे पहले जज खुद भोजशाला जाकर स्थल का निरीक्षण करेंगे। यह पहला मौका होगा जब जज खुद मौके पर जाकर वहां की स्थिति देखेंगे और हकीकत समझेंगे।
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सवा घंटे चली सुनवाई, मुस्लिम पक्ष ने सर्वे पर उठाए सवाल
सोमवार को करीब सवा घंटे तक सुनवाई चली। इस दौरान मुस्लिम पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किए गए सर्वे पर सवाल उठाए और उसके तथ्यों को खारिज किया। उनका कहना था कि सर्वे सही तरीके से नहीं किया गया है। मुस्लिम पक्ष ने अंग्रेजों के शासनकाल में हुए सर्वे का भी हवाला दिया। उनका कहना था कि उस समय हुए सर्वे में भी परिसर में कमाल मौलाना मस्जिद का उल्लेख किया गया था।
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सभी अंतरिम आवेदन रिकॉर्ड पर लिए गए
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी अंतरिम आवेदनों को रिकॉर्ड पर ले लिया है। कोर्ट ने फैसला किया कि इन आवेदनों को मुख्य बहस के साथ ही सुना जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि अब इस मामले में 2 अप्रैल से नियमित सुनवाई की जाएगी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एएसआई के सर्वे पर जो आपत्तियां आई हैं, उन्हें भी रिकॉर्ड पर ले लिया है। अदालत ने कहा कि सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का बराबर मौका दिया जाएगा और हर पक्ष की बात सुनी जाएगी। इस मामले में वक्फ बोर्ड ने भी एक आवेदन दिया है।
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पिछली सुनवाई में एएसआई रिपोर्ट पर मांगी गई थीं आपत्तियां
इससे पहले हुई सुनवाई में कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट पर दावे और आपत्तियां मांगी थीं। इसके लिए कोर्ट ने सभी पक्षों को दो सप्ताह का समय दिया था। आपको बता दें कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने पिछले साल भोजशाला परिसर का 98 दिनों तक सर्वे किया था। इसके बाद एएसआई ने दो हजार से ज्यादा पेज की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी।
रिपोर्ट में परमार काल का बताया गया निर्माण
एएसआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि भोजशाला का निर्माण परमार काल में हुआ था। बाद में पुराने ढांचे के कुछ हिस्सों पर नया निर्माण भी किया गया। सर्वे के दौरान यहां से मूर्तियां और पुराने सिक्के भी मिले थे। रिपोर्ट में इन सभी तथ्यों के साथ खुदाई में मिले अवशेषों के फोटो भी शामिल किए गए हैं।

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