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यासीन मछली केस: मकान तोड़ने का मामला, भोपाल कलेक्टर और DCP क्राइम हुए दस्तावेजों के साथ हाईकोर्ट में उपस्थित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Fri, 26 Sep 2025 08:54 PM IST
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सार

भोपाल गैंगस्टर यासीन उर्फ मछली के परिजनों ने प्रशासनिक कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने भेदभाव और बिना नोटिस संपत्ति ध्वस्तीकरण व बैंक खाते फ्रीज करने का आरोप लगाया। कलेक्टर व डीसीपी क्राइम ने कार्रवाई को विधिसम्मत बताया। सुनवाई पूरी होने पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा। 

Bhopal Collector and DCP Crime appeared in the High Court with documents
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

भोपाल के गैंगस्टर यासीन अहमद उर्फ मछली के पारिवारिक सदस्यों ने जिला व पुलिस प्रशासन द्वारा निशाना बनाकर उनके खिलाफ कार्रवाई किए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। पूर्व में पारित आदेश का पालन करते हुए भोपाल कलेक्टर तथा डीसीपी क्राइम कार्रवाई संबंधित दस्तावेजों के साथ हाईकोर्ट में उपस्थित हुए। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने उनका पक्ष सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किए हैं।

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भोपाल के गैंगस्टर यासीन अहमद उर्फ मछली के परिवारिक सदस्यों की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उनके अलावा अन्य लोगों ने भी सरकारी भूमि पर निर्माण किया है और वर्षों से निवासरत है। जिला व पुलिस प्रशासन ने निशाना बनाते हुए सिर्फ उनकी संपत्तियों को ध्वस्त किया है। इसके अलावा किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। संपत्तियों को ध्वस्त करने से पहले याचिकाकर्ताओं को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था। इसके अलावा उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं और शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। ईमेल आईडी ब्लॉक कर दी गई है, जिसके कारण वह कोई भी व्यावसायिक गतिविधि करने की स्थिति में नहीं हैं। 
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ये भी पढ़ें- यासीन मछली केस: मकान तोड़ने पर हाईकोर्ट सख्त, भोपाल कलेक्टर और DCP क्राइम को हाईकोर्ट ने किया तलब

याचिका की सुनवाई के दौरान एकलपीठ की तरफ से पूछा गया कि याचिका किसी भी मामले में आरोपी हैं। सरकारी अधिवक्ता की तरफ से बताया गया कि मामले अधिकारियों के पास जांच के लिए लंबित हैं, वह अभी तक किसी भी मामले में आरोपी नहीं है। एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि संपत्ति के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को प्रमाणित करने के लिए जवाब के साथ कोई भी सामग्री प्रस्तुत नहीं की गई है। एकलपीठ ने गुरुवार को याचिका की सुनवाई करते हुए कलेक्टर तथा डीसीपी अपराध शाखा भोपाल को कार्यवाही संबंधित दस्तावेज के साथ 24 घंटों में उपस्थित होने के आदेश जारी किए थे।

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याचिका पर शुक्रवार को दो चरणों में सुनवाई हुई और इस दौरान भोपाल कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह तथा डीसीपी क्राइम अखिल पटेल व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि अवैध रूप से निर्मित मकान को तोड़ने के लिए विधिवत कार्रवाई की गई थी। अनावेदकों को नोटिस जारी करते हुए जवाब प्रस्तुत करने समय प्रदान किया गया था। इसके अलावा कार्रवाई के संबंध में नोटिस चस्पा किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने मकान में रखे सामान को खुद हटाया था। इसके बाद मकान तोड़ने की कार्रवाई की गई। मकान तोड़ने की कार्रवाई तहसीलदार द्वारा एमपीएलआरसी 1959 की धारा 248 के तहत पारित आदेश के तक किया गया है।

दोनों अधिकारियों की तरफ से बताया गया कि बैंक खातों से बड़ी रकम का लेन-देन होने के कारण उन्हें फ्रीज किया गया है। एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई के बाद दोनों अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति को माफ करते हुए आदेश सुरक्षित रखने के निर्देश जारी किए।

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