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Jabalpur: इच्छामृत्यु याचिका पर कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, पिछली सुनवाई में भ्रूण लेकर आया था याचिकाकर्ता

Wed, 11 Mar 2026 09:11 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Wed, 11 Mar 2026 09:11 PM IST
सार

जबलपुर हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले याचिकाकर्ता दया शंकर पांडे पिछली सुनवाई के दौरान अपने बच्चे का भ्रूण लेकर हाईकोर्ट पहुंच गया था, जिससे मामला चर्चा में आ गया था।

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Decision reserved on petition seeking euthanasia
इच्छा मृत्यु की मांग संबंधित याचिका पर फैसला सुरक्षित

विस्तार

जबलपुर हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। स्वयं की जान को खतरा होने और पुलिस द्वारा शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में इच्छामृत्यु की अनुमति देने का आग्रह किया गया था। याचिकाकर्ता पिछली सुनवाई के दौरान बच्चे का भ्रूण लेकर हाईकोर्ट पहुंच गया था। हाईकोर्ट के जस्टिस हिमांशु जोशी ने याचिका की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।

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इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग की गई थी
गौरतलब है कि रीवा लोकसभा के पूर्व उम्मीदवार दया शंकर पांडे की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि उन्हें जान का खतरा है और इसके कारण परिवार के सदस्यों को भी खतरा बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पारिवारिक सदस्यों के साथ जाते समय उन पर कई बार सड़क दुर्घटना के माध्यम से जानलेवा हमले किए गए। शिकायत करने के बावजूद पुलिस द्वारा अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। याचिका में पूर्व में हुए हमलों तथा संबंधित मामलों में दायर याचिकाओं का भी उल्लेख किया गया था। याचिका में सभी शिकायतों की जांच और इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग की गई थी।

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याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुआ और एकलपीठ को अपने साथ हुई घटनाओं तथा इस संबंध में पहले दायर की गई याचिकाओं की जानकारी दी। सुनवाई के बाद एकलपीठ ने फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी कर दिए।

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पिछली सुनवाई में बच्चे का भ्रूण लेकर पहुंचा था हाईकोर्ट
याचिका पर पिछली सुनवाई के दौरान 9 मार्च को याचिकाकर्ता पॉलीथिन में अपने बच्चे का भ्रूण लेकर हाईकोर्ट पहुंच गया था। उसने एकलपीठ को बताया था कि रीवा में 1 मार्च को गर्भवती पत्नी के साथ जाते समय सड़क दुर्घटना के माध्यम से उस पर जानलेवा हमला हुआ था। इस हमले में उसकी पत्नी घायल हो गई थी और 7 मार्च को उसका गर्भपात करवाना पड़ा था।

हाईकोर्ट की सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने याचिकाकर्ता को नियंत्रित करते हुए भ्रूण को अपने कब्जे में ले लिया था। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने हाईकोर्ट सुरक्षा में तैनात एक एएसआई, दो प्रधान आरक्षक और एक आरक्षक को निलंबित कर दिया था।

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