सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   After getting bail, he had to stay in jail for more than 12 days due to the mistake of the court reader

Jabalpur News: रीडर की गलती से जमानत मिलने पर भी 12 दिन जेल में रखने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Tue, 10 Mar 2026 10:53 PM IST
विज्ञापन
सार

हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद ट्रायल कोर्ट के रीडर की त्रुटि के कारण आरोपी जीशान खान को 12 दिन अतिरिक्त जेल में रहना पड़ा। इस पर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि रीडर को दस्तावेज स्पेशल जज के सामने प्रस्तुत करने चाहिए थे। 

After getting bail, he had to stay in jail for more than 12 days due to the mistake of the court reader
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद ट्रायल कोर्ट के रीडर की गलती के कारण आरोपी को 12 दिनों से अधिक समय तक जेल में रहना पड़ा। हाईकोर्ट के जस्टिस एके सिंह की एकलपीठ ने इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि रीडर द्वारा अपनाया गया तरीका सही नहीं था।
Trending Videos


गौरतलब है कि जबलपुर की हनुमान ताल थाना पुलिस ने आरोपी जीशान खान के खिलाफ एससी एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया था। आरोपी उक्त अपराध में विगत 10 जुलाई 2025 से न्यायिक अभिरक्षा में है। हाईकोर्ट से आरोपी को उक्त अपराधिक प्रकरण में विगत 18 फरवरी 2026 को जमानत मिल गई थी। आरोपी की तरफ से 20 फरवरी को जमानत के दस्तावेज ट्रायल कोर्ट के स्पेशल जज की अदालत में प्रस्तुत किए गए थे। रीडर ने हाईकोर्ट के आदेश में एक धारा का उल्लेख नहीं किए जाने की त्रुटि निकालते हुए उसे स्पेशल जज के समक्ष प्रस्तुत नहीं करते हुए सुधार कार्य करवाने के लिए वापस कर दिया। इसके बाद जमानत आदेश में सुधार के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- बीपीएल व्यक्ति से 15 हजार की रिश्वत लेते सरपंच रंगे हाथ गिरफ्तार, ईओडब्ल्यू ने आरोपी को धर दबोचा

एकलपीठ ने सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा है कि जमानत ऑर्डर में यदि कुछ कमी थी तो उनका फर्ज था कि वे कागजात स्पेशल जज के सामने प्रस्तुत करें। स्पेशल जज को कानूनी ऑर्डर पास करना चाहिए। किसी केस में जरूरी बातें केस नंबर होता है, जिसका जिक्र आदेश में था। इसके अलावा क्राइम नंबर और आरोपी के नाम का उल्लेख भी आदेश में था। आदेश आरोपी और उस केस की पहचान करने के लिए काफी था। एकलपीठ ने उक्त आदेश को पूर्व में पारित आदेश के साथ पढ़ने के निर्देश जारी किए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed