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Jabalpur: नर्सिंग कॉलेज में फैकल्टी की जाली मार्कशीट पर हाईकोर्ट सख्त, CBI से जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Sat, 26 Jul 2025 03:27 PM IST
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सार
MP High Court: नर्सिंग कॉलेज में फैकल्टी की जाली मार्कशीट पर हाईकोर्ट ने एमपी ऑनलाइन को निर्देश दिए हैं कि वह प्रदेश की नर्सिंग काउंसलिंग से संबंधित समस्त डाटा को तत्काल प्रभाव से सीज करे, जिससे किसी प्रकार की छेड़छाड़ संभव न हो।
एमपी हाईकोर्ट जबलपुर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नर्सिंग कॉलेजों में फैकल्टी के दस्तावेजों में फर्जीवाड़े को बेहद गंभीर मानते हुए बड़ा निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने एमपी ऑनलाइन को निर्देश दिए हैं कि वह प्रदेश की नर्सिंग काउंसलिंग से संबंधित समस्त डाटा को तत्काल प्रभाव से सीज करे, जिससे किसी प्रकार की छेड़छाड़ संभव न हो। यह आदेश हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस डी.के. पालीवाल की युगलपीठ ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान पारित किया।
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फैकल्टी की मार्कशीट में सामने आया विरोधाभास
लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और सीबीआई की ओर से प्रस्तुत की गई फैकल्टी की मार्कशीट में भिन्नता पाई गई। याचिकाकर्ता का दावा था कि संबंधित नर्सिंग कॉलेज की फैकल्टी की मार्कशीट उन्होंने एमपी नर्सिंग काउंसलिंग पोर्टल से निकाली थी, जबकि सीबीआई ने अलग रिकॉर्ड पेश किया। कोर्ट ने स्वयं पोर्टल की पड़ताल की और पाया कि याचिकाकर्ता द्वारा पेश की गई मार्कशीट पोर्टल पर मौजूद है, जिससे डाटा में गड़बड़ी की आशंका और गहरी हो गई।
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पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता पर रोक बरकरार
हाईकोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिए कि वह जांच पूरी कर रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करे। साथ ही प्रदेश में चल रहे पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता और प्रवेश प्रक्रिया पर पूर्व में लगाई गई रोक को यथावत रखते हुए, संबंधित आवेदन और निरीक्षण रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष 24 घंटे में प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
दो बार जांच के बाद भी कॉलेज को बताया गया ‘सूटेबल’
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि सेंधवा के जिस नर्सिंग कॉलेज की फैकल्टी पर फर्जीवाड़े के आरोप हैं, उसे दो बार जांच के बाद भी ‘सूटेबल’ घोषित किया गया। इसके बावजूद उसी कॉलेज में कार्यरत फैकल्टी की मार्कशीट को सीबीआई ने फर्जी करार दिया है। इससे पूरे निरीक्षण और मान्यता प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।
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कोर्ट ने याचिका को लिया संज्ञान में, अगली सुनवाई 28 जुलाई को
हाईकोर्ट ने याचिका को संज्ञान याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई सोमवार 28 जुलाई को निर्धारित की है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि यदि डाटा में कोई भी गड़बड़ी या छेड़छाड़ पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की।

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