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MP: जबलपर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, शादीशुदा बेटी को भी मिलेगा अनुग्रह और अवकाश नकदीकरण का अधिकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Tue, 24 Feb 2026 10:34 PM IST
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सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा है कि यदि मृत कर्मचारी की शादीशुदा बेटी ही उसकी एकमात्र कानूनी वारिस है, तो वह अनुग्रह राशि और अवकाश नकदीकरण की हकदार होगी। अदालत ने 60 दिनों में भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।

Legal heir married daughter should be paid ex-gratia and leave encashment amount
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फाइल फोटो।
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विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि मृत कर्मचारी की शादीशुदा बेटी ही उसकी एकमात्र कानूनी वारिस है, तो वह अनुग्रह राशि तथा अवकाश नकदीकरण की हकदार होगी। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने निर्देश दिया कि संबंधित राशि का भुगतान 60 दिनों के भीतर किया जाए।

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नरसिंहपुर निवासी याचिकाकर्ता प्रसन्ना नामदेव ने अपने पिता प्रभात कुमार नामदेव की मृत्यु के बाद अनुग्रह राशि और अवकाश नकदीकरण का भुगतान न किए जाने को चुनौती दी थी। प्रभात कुमार नामदेव जिला न्यायालय नरसिंहपुर में ड्राइवर के पद पर पदस्थ थे और 4 मई 2024 को सेवा के दौरान उनका निधन हो गया था।

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याचिका में बताया गया कि प्रसन्ना नामदेव अपने पिता की एकमात्र जीवित कानूनी वारिस हैं और उन्हें सर्विस रिकॉर्ड में नामांकित (नॉमिनी) भी किया गया था। पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने सेवानिवृत्ति और अन्य सेवा लाभों के भुगतान के लिए आवेदन किया। अन्य सभी भुगतान नॉमिनी मानते हुए कर दिए गए, लेकिन अनुग्रह राशि और अवकाश नकदीकरण का भुगतान इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि वह शादीशुदा हैं। याचिकाकर्ता ने इसे प्राकृतिक न्याय और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया।

नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए दिया तर्क
अनावेदक पक्ष की ओर से राज्य सरकार के एक नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए तर्क दिया गया कि अनुग्रह और अवकाश नकदीकरण का भुगतान मृतक कर्मचारी के पति या पत्नी को किया जाएगा। एक से अधिक पत्नी होने की स्थिति में राशि बराबर बांटी जाएगी। इसके अलावा मृतक कर्मचारी का सबसे बड़ा बेटा या सबसे बड़ी अविवाहित बेटी ही उक्त राशि की हकदार होगी। चूंकि याचिकाकर्ता शादीशुदा हैं, इसलिए उनका आवेदन निरस्त किया गया।


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युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित नोटिफिकेशन में यह उल्लेख नहीं है कि यदि शादीशुदा बेटी के अलावा कोई अन्य वारिस न हो, तो अनुग्रह राशि किसे दी जाएगी। इसका अर्थ यह है कि यदि शादीशुदा बेटी ही मृतक की एकमात्र कानूनी वारिस है, तो उसे इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी कहा कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद अनुग्रह राशि अंतिम संस्कार के लिए तत्काल दी जाती है। इस आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि शादीशुदा बेटी इसका दावा नहीं कर सकती। मृतक कर्मचारी की अनुग्रह तथा अवकाश नकदीकरण राशि उसके कानूनी वारिसों को दी जानी चाहिए, चाहे वे शादीशुदा हों या नहीं।

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