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Jabalpur News: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सौरभ शर्मा को राहत, जबलपुर हाईकोर्ट ने मंजूर की जमानत

Wed, 05 Aug 2026 12:32 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Wed, 05 Aug 2026 12:32 PM IST
सार

सौ करोड़ रुपये से अधिक के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार आरटीओ विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। कोर्ट ने 16 माह की न्यायिक हिरासत, जांच पूरी होने और ट्रायल में समय लगने को राहत का आधार माना।

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Saurabh Sharma granted bail in money laundering case involving over ₹100 crore
जबलपुर हाईकोर्ट।

विस्तार

जबलपुर में सौ करोड़ रुपये से अधिक के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किए गए आरटीओ विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी ने अपने आदेश में कहा कि प्रवर्तन निदेशालय जांच पूरी कर न्यायालय के समक्ष चालान प्रस्तुत कर चुका है। न्यायालय द्वारा आरोप भी तय किए जा चुके हैं। आरोपी पिछले 16 माह से न्यायिक हिरासत में है और ट्रायल कोर्ट में सुनवाई पूरी होने में अभी समय लगने की संभावना है। इसी आधार पर एकलपीठ ने आरोपी को जमानत का लाभ प्रदान किया।

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याचिकाकर्ता सौरभ शर्मा की ओर से हाईकोर्ट में नियमित जमानत के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था। इससे पहले हाईकोर्ट दो बार उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर चुका था। बीमार पत्नी के ऑपरेशन के लिए दायर अंतरिम जमानत आवेदन भी निरस्त कर दिया गया था।

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जमानत आवेदन में कहा गया कि वह मध्य प्रदेश परिवहन विभाग में आरक्षक के पद पर पदस्थ था और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले चुका था। उस पर आरोप है कि उसने परिवार के सदस्यों, सहयोगियों और अन्य संबंधित संस्थाओं के नाम पर चल एवं अचल संपत्तियां, निवेश और वित्तीय लेनदेन किए। सार्वजनिक सेवा के दौरान उसने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की थी।

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19 दिसंबर 2024 को हुई थी लोकायुक्त की कार्रावई
लोकायुक्त द्वारा 19 दिसंबर 2024 को की गई कार्रवाई के दौरान आवेदक के विभिन्न परिसरों से नकदी, सोने के आभूषण और अन्य कीमती सामान बरामद किए गए थे। इसके अलावा, उसी दिन आयकर विभाग ने सह-आरोपी चेतन सिंह गौर के नाम से पंजीकृत एक वाहन से नकदी और सोने की ईंटें बरामद की थीं, जिसका उपयोग वर्तमान आवेदक कर रहा था।

इसी आधार पर प्रवर्तन निदेशालय, भोपाल ने उसके खिलाफ 21 दिसंबर 2024 को मामला दर्ज किया था। लोकायुक्त द्वारा दर्ज प्रकरण में आवेदक पहले से ही न्यायिक हिरासत में था। इसी दौरान ईडी ने 10 फरवरी 2025 को उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया था। लोकायुक्त प्रकरण में निर्धारित समय-सीमा के भीतर चालान प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण उसे जमानत मिल गई थी।

जानिए जमानत आवेदन पर क्या-क्या कहा गया?
जमानत आवेदन में यह भी कहा गया कि ईडी की जांच पूरी हो चुकी है और चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है। न्यायालय आरोप तय कर चुका है। अभियोजन का मामला मुख्य रूप से दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है। अभियोजन की ओर से लगभग तीन हजार पृष्ठों के दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं। गवाहों और आरोपियों की संख्या को देखते हुए मुकदमे के निष्कर्ष तक पहुंचने में काफी समय लग सकता है। आवेदक पिछले 16 माह से न्यायिक हिरासत में है, जबकि अपराध में अधिकतम सजा सात वर्ष है।

जमानत आवेदन का विरोध करते हुए ईडी की ओर से कहा गया कि मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम, 2002 के तहत अपराध अधिनियम की धारा 45 में दिए गए विशेष प्रावधानों से नियंत्रित होते हैं। ऐसे मामलों में जमानत पर विचार करते समय अदालत को सामान्य सिद्धांतों के साथ-साथ धारा 45 में निहित वैधानिक प्रतिबंधों का भी पालन करना होता है। आर्थिक अपराधों को अलग श्रेणी का गंभीर अपराध माना जाता है, विशेषकर तब जब उनमें गहरी साजिश, सार्वजनिक धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग या देश की अर्थव्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव शामिल हो।

ईडी ने यह भी आशंका जताई कि आरोपी को जमानत मिलने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है, साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है या न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने का प्रयास कर सकता है। साथ ही, अपराध से अर्जित संपत्तियों को छिपाने, स्थानांतरित करने या ठिकाने लगाने की भी संभावना है।



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एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि कथित अपराध के लिए अधिकतम सजा सात वर्ष है और निकट भविष्य में सुनवाई पूरी होने की संभावना नहीं है। आवेदक पिछले 16 माह से न्यायिक हिरासत में है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए उसे जमानत का लाभ दिया जाता है। न्यायालय ने निर्देश दिया कि आवेदक ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार 10 लाख रुपये का व्यक्तिगत मुचलका और समान राशि की एक सक्षम स्थानीय जमानत प्रस्तुत करे। इसके साथ ही एकलपीठ ने आरोपी को सशर्त जमानत प्रदान कर दी।

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