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MP: संदिग्ध मौत मामले में हाईकोर्ट सख्त, कब्र से शव निकालकर दोबारा पोस्टमार्टम के आदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Wed, 08 Apr 2026 08:30 AM IST
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सार
मध्य प्रदेश के जबलपुर में संदिग्ध मौत के मामले में हाईकोर्ट ने अहम आदेश देते हुए शव को कब्र से निकालकर दोबारा पोस्टमार्टम कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को तय समय पर एसडीएम के समक्ष उपस्थित होने को कहा है और मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।
शव को कब्र से निकालकर करवाया जाये पोस्टमार्टम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश के जबलपुर में संदिग्ध मौत के एक मामले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि मृतक का शव कब्र से निकालकर दोबारा पोस्टमार्टम कराया जाए, ताकि मौत की असली वजह सामने आ सके। हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस ए.के. सिंह की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि शव को कब्र से निकालकर जबलपुर मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम कराया जाए।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता बुधवार सुबह 11 बजे एसडीएम अधारताल के सामने उपस्थित हो। इसके बाद दोपहर 1 बजे तक शव को कब्र से निकालकर मेडिकल कॉलेज पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाए। साथ ही कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि याचिकाकर्ता तय समय पर एसडीएम कार्यालय में उपस्थित नहीं होता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला
जबलपुर निवासी कसीमुद्दीन कुरैशी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। उन्होंने बताया कि उनके भाई गयासुद्दीन कुरैशी, जो नरसिंहपुर जिले के बोरीपार गांव के रहने वाले थे, 26 मार्च 2025 को एक हादसे का शिकार हो गए थे। घटना के बाद उन्हें गंभीर हालत में जबलपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन 27 मार्च को इलाज के लिए नागपुर ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
मेडिकल रिपोर्ट में चोट के निशान
याचिका में कहा गया कि जबलपुर के अस्पताल की डिस्चार्ज रिपोर्ट में मृतक के सीने पर चोट के निशान दर्ज थे। इस आधार पर याचिकाकर्ता ने दावा किया कि मौत को सामान्य नहीं माना जा सकता और मामले की गहराई से जांच जरूरी है।
पहले पुलिस से की थी शिकायत
याचिकाकर्ता ने मामले की जांच और दोबारा पोस्टमार्टम कराने के लिए पुलिस अधीक्षक को आवेदन दिया था, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।
यह भी पढ़ें-भोपाल में राजभवन के सामने पाइपलाइन फटी, धंसी सड़क,पानी से लबालब हुआ रास्ता, बड़ा हादसा टला
एकलपीठ ने पहले खारिज की थी याचिका
इससे पहले एकलपीठ ने याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि मृतक को 27 मार्च 2025 को दफनाया गया था और रिकॉर्ड में पोस्टमार्टम प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी या कानून के उल्लंघन के सबूत नहीं हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि अस्पताल की डिस्चार्ज रिपोर्ट में चोट का जिक्र होना ही हत्या या गलत पोस्टमार्टम प्रक्रिया का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
डिवीजन बेंच ने दिया नया आदेश
एकलपीठ के फैसले के खिलाफ ही यह अपील दायर की गई थी। मंगलवार को सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने नया आदेश जारी करते हुए शव निकालकर दोबारा पोस्टमार्टम कराने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया में मृतक की पत्नी और पुत्र को शामिल होने की अनुमति भी दी है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
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कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता बुधवार सुबह 11 बजे एसडीएम अधारताल के सामने उपस्थित हो। इसके बाद दोपहर 1 बजे तक शव को कब्र से निकालकर मेडिकल कॉलेज पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाए। साथ ही कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि याचिकाकर्ता तय समय पर एसडीएम कार्यालय में उपस्थित नहीं होता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला
जबलपुर निवासी कसीमुद्दीन कुरैशी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। उन्होंने बताया कि उनके भाई गयासुद्दीन कुरैशी, जो नरसिंहपुर जिले के बोरीपार गांव के रहने वाले थे, 26 मार्च 2025 को एक हादसे का शिकार हो गए थे। घटना के बाद उन्हें गंभीर हालत में जबलपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन 27 मार्च को इलाज के लिए नागपुर ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
मेडिकल रिपोर्ट में चोट के निशान
याचिका में कहा गया कि जबलपुर के अस्पताल की डिस्चार्ज रिपोर्ट में मृतक के सीने पर चोट के निशान दर्ज थे। इस आधार पर याचिकाकर्ता ने दावा किया कि मौत को सामान्य नहीं माना जा सकता और मामले की गहराई से जांच जरूरी है।
पहले पुलिस से की थी शिकायत
याचिकाकर्ता ने मामले की जांच और दोबारा पोस्टमार्टम कराने के लिए पुलिस अधीक्षक को आवेदन दिया था, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।
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एकलपीठ ने पहले खारिज की थी याचिका
इससे पहले एकलपीठ ने याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि मृतक को 27 मार्च 2025 को दफनाया गया था और रिकॉर्ड में पोस्टमार्टम प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी या कानून के उल्लंघन के सबूत नहीं हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि अस्पताल की डिस्चार्ज रिपोर्ट में चोट का जिक्र होना ही हत्या या गलत पोस्टमार्टम प्रक्रिया का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
डिवीजन बेंच ने दिया नया आदेश
एकलपीठ के फैसले के खिलाफ ही यह अपील दायर की गई थी। मंगलवार को सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने नया आदेश जारी करते हुए शव निकालकर दोबारा पोस्टमार्टम कराने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया में मृतक की पत्नी और पुत्र को शामिल होने की अनुमति भी दी है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

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