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MP News: विधायक संजय पाठक अपराधिक अवमानना मामले में तलब, माफी मांगने का पेश किया हलफनामा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Mon, 06 Apr 2026 07:36 PM IST
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सार

मप्र हाईकोर्ट ने आपराधिक अवमानना मामले में भाजपा विधायक संजय पाठक को तलब किया। उन्होंने हलफनामा देकर गलती स्वीकारते हुए बिना शर्त माफी मांगी। अदालत ने नोटिस जारी कर व्यक्तिगत उपस्थिति के निर्देश दिए। मामला न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप से जुड़ा है, जिसकी सुनवाई जारी है। 

MLA Sanjay Pathak summoned in criminal contempt case
संजय पाठक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने अपराधिक अवमानना मामले की सुनवाई करते हुए भाजपा विधायक संजय पाठक को तलब किया है। आपराधिक अवमानना की सुनवाई के दौरान विधायक संजय पाठक की तरफ से हलफनामा पेश करते हुए अपनी गलती स्वीकार कर बिना शर्त माफी मांगी। युगलपीठ ने हलफनामा को रिकॉर्ड में लेते हुए नोटिस जारी कर भाजपा विधायक को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।

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गौरतलब है कि कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि विधायक संजय पाठक से संबंधित कंपनी के खिलाफ अवैध उत्खनन के मामले में हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा ने 1 सितम्बर 2025 को सुनवाई से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट जस्टिस ने अपने आदेश में कहा था कि विधायक ने उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया। इसके कारण वह सुनवाई से खुद को अलग कर रहे हैं। जस्टिस विशाल मिश्रा ने निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को प्रशासनिक स्तर पर चीफ जस्टिस के समक्ष भेजने का निर्देश भी दिया था।
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याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है। विधायक का यह कृत्य न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने तथा गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। न्यायिक कार्य में हस्तक्षेप करना आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है। हाईकोर्ट ने गत 2 अप्रैल को याचिका का निराकरण करते हुए मामले को संज्ञान में लेते हुए भाजपा विधायक के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश जारी किए थे।

आपराधिक अवमानना पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान भाजपा विधायक की तरफ से पेश किए गए हलफनामा में बताया गया कि वह अपनी गलती स्वीकार करते हुए बिना शर्त माफी मांग रहे हैं। उन्होंने फोन पर संपर्क करने का प्रयास करते हुए सिर्फ अपना नाम बताया था। गलती का एहसास होने पर उन्होंने फोन काट दिया था। राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के द्वारा इस मामले में जनहित याचिका दायर की गई थी। भाजपा विधायक की तरफ से पैरवी कर रहे भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि आपराधिक अवमानना में दंड का प्रावधान है, जब गलती असक्षम हो या संबंधित व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार नहीं करे। भाजपा विधायक अपनी गलती स्वीकार करते बिना शर्त माफी के संबंध में हलफनामा पेश किया है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किए।

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