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Jabalpur: 'मैं परिवार के साथ रहना चाहती हूं’, युवती की मर्जी के आगे याचिका निरस्त, कोर्ट का बड़ा फैसला; जानें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Sat, 25 Apr 2026 07:27 PM IST
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सार

जबलपुर हाईकोर्ट ने मुस्लिम युवक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज की। मजिस्ट्रेट जांच में युवती ने कहा कि वह स्वेच्छा से परिवार के साथ रह रही है और याचिकाकर्ता से कोई संबंध नहीं रखना चाहती।

The judicial magistrate said in the report that the girl wants to live with her family
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिंदू परिवार की युवती को कथित रूप से बंधक बनाए जाने के आरोप में एक मुस्लिम युवक द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट के निर्देश पर चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने युवती के बयान दर्ज कर रिपोर्ट पेश की, जिसमें स्पष्ट हुआ कि युवती याचिकाकर्ता से कोई संबंध नहीं रखना चाहती और अपने परिवार के साथ रहना चाहती है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका निरस्त कर दी।

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भोपाल निवासी शाजिल शेख की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि हिंदू परिवार की युवती उसकी मित्र है और परिजनों ने उसे जबरन बैतूल में रिश्तेदार के घर बंधक बनाकर रखा है। इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि न्यायिक मजिस्ट्रेट महिला पुलिस अधिकारी के साथ सादे कपड़ों में जाकर युवती के बयान दर्ज करें।

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निर्देश के पालन में बैतूल के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने युवती के बयान दर्ज कर रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत की। रिपोर्ट में बताया गया कि युवती अपनी मर्जी से अपने मामा के घर रह रही है और वह याचिकाकर्ता से कोई संबंध नहीं रखना चाहती। साथ ही उसने अपने माता-पिता के साथ रहने की इच्छा जताई। रिपोर्ट के बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने का आग्रह किया, जिसे स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

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