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Jabalpur: करंट लगाकर डॉक्टर पति की हत्या करने वाली प्रोफेसर की उम्रकैद की सजा बरकरार, नहीं मिली राहत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Wed, 30 Jul 2025 04:33 PM IST
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सार

MP: ममता पाठक ने पुलिस को बताया कि जब उन्होंने डॉक्टर की नब्ज देखी तो उसमें हलचल थी। इसलिए अगले दिन वे ड्राइवर के साथ पति को डायलिसिस के लिए झांसी ले गईं, लेकिन कोविड प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण इलाज नहीं हो सका। रात 9 बजे वे वापस लौटीं और 1 मई को पुलिस को पति की मौत की सूचना दी।

The punishment of the female professor who killed her doctor husband by electrocution is upheld
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डॉक्टर पति की हत्या के आरोप में दोषी ठहराई गई प्रोफेसर ममता पाठक की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की युगलपीठ ने कहा कि घटनास्थल पर कोई बाहरी व्यक्ति नहीं आया था, और परिस्थितिजन्य साक्ष्य यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि पत्नी ममता पाठक ने ही पहले पति को नशीली दवा देकर बेहोश किया, फिर करंट देकर उनकी हत्या कर दी।

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कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा पर रोक को निरस्त करते हुए आरोपी को शेष कारावास भुगतने के लिए तत्काल संबंधित न्यायालय में समर्पण करने का निर्देश दिया है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 29 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब सुनाया गया।

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डॉक्टर नीरज पाठक की रहस्यमयी मौत
यह मामला छतरपुर जिला अस्पताल में पदस्थ 65 वर्षीय चिकित्सक डॉ. नीरज पाठक की रहस्यमयी मौत से जुड़ा है। 29 अप्रैल 2021 को वे अपने छतरपुर स्थित लोकनाथपुरम कॉलोनी के घर में मृत पाए गए थे। उनके शरीर पर पांच स्थानों पर इलेक्ट्रिक बर्न के निशान मिले थे। घटना के वक्त उनकी पत्नी ममता पाठक भी घर में ही मौजूद थीं, जो करीब 10 महीने पहले ही पति के साथ रहने आई थीं। दंपति के बीच संबंध तनावपूर्ण थे। बताया गया कि ममता अपने पति पर किसी महिला से संबंध होने का संदेह करती थीं और इसको लेकर अक्सर विवाद होता था।


पढ़ें: जमानत मिलने के बाद भी साढ़े पांच साल जेल में रही महिला, हाईकोर्ट ने निजी मुचलके पर रिहाई के दिए आदेश

रिश्तेदार को की गई कॉल बनी अहम सबूत
घटना वाले दिन दोपहर 12 बजे के पहले डॉ. नीरज पाठक ने एक रिश्तेदार को फोन कर बताया था कि उनकी पत्नी उन्हें प्रताड़ित कर रही है, उन्हें खाना नहीं दे रही और बाथरूम में बंद कर रखा है। उन्होंने सिर में चोट लगने की बात भी कही थी। इसके बाद उक्त रिश्तेदार ने पुलिस को सूचना दी, जिनकी मदद से डॉक्टर को बाथरूम से बाहर निकाला गया। इस बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग पुलिस को सौंपी गई और कोर्ट में उसका बयान भी दर्ज हुआ। लेकिन उसी रात करीब 9 बजे डॉक्टर की मौत हो गई।

आरोपी का बचाव: धड़कन थी, इसलिए झांसी ले गई
ममता पाठक ने पुलिस को बताया कि जब उन्होंने डॉक्टर की नब्ज देखी तो उसमें हलचल थी। इसलिए अगले दिन वे ड्राइवर के साथ पति को डायलिसिस के लिए झांसी ले गईं, लेकिन कोविड प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण इलाज नहीं हो सका। रात 9 बजे वे वापस लौटीं और 1 मई को पुलिस को पति की मौत की सूचना दी।

कोर्ट में पेश की गई वैज्ञानिक दलीलें
केमिस्ट्री की प्रोफेसर ममता पाठक ने हाईकोर्ट में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इलेक्ट्रिक व थर्मल बर्न के निशान तो बताए गए हैं, लेकिन उनकी तकनीकी जांच नहीं कराई गई। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि घर में MCB और RCCB जैसे विद्युत सुरक्षा उपकरण लगे थे, ऐसे में करंट लगने से मौत संभव नहीं थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि न तो एफएसएल टीम और न ही कोई विद्युत विशेषज्ञ घर की जांच के लिए भेजा गया। प्रारंभ में उन्होंने खुद कोर्ट में पक्ष रखा, बाद में वकीलों ने उनका प्रतिनिधित्व किया।

परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर न्याय
हाईकोर्ट ने 97 पृष्ठों के विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया कि इस मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की श्रृंखला पूरी तरह आपस में जुड़ी हुई है और यह साबित करती है कि हत्या ममता पाठक ने ही की। जिला न्यायालय ने भी इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर ममता पाठक को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने भी उचित ठहराया है।

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