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Jabalpur News: शराब के रुपये नहीं देने पर तोड़ दिया था कंधा, सजा के खिलाफ दायर अपील हाईकोर्ट ने कर दी खारिज

Fri, 24 Jul 2026 04:20 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Fri, 24 Jul 2026 04:20 PM IST
सार

शराब के लिए रुपये नहीं देने पर मारपीट कर कंधा फ्रैक्चर करने के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी की अपील हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि घायल गवाह का लगातार एक जैसा और विश्वसनीय बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य होता है। ट्रायल कोर्ट की छह माह की सजा को बरकरार रखा गया। 

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They broke his shoulder for not paying for liquor
शराब के रुपये नही देने पर तोड़ दिया था कंधा

विस्तार

शराब पीने के लिए रुपये नहीं देने पर मारपीट कर कंधा फ्रैक्चर करने के मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की एकलपीठ ने कहा कि घायल गवाह का लगातार एक जैसा बयान अत्यंत विश्वसनीय होता है और उसे चश्मदीद गवाह के बयान से कम नहीं आंका जा सकता। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए अपील निरस्त कर दी।

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नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा निवासी धनीराम उर्फ कल्लू ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई छह माह के कारावास और जुर्माने की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। प्रकरण के अनुसार, हरिप्रसाद वर्मा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 18 अक्टूबर 2025 को दोपहर में दूधिया नदी में स्नान कर घर लौटते समय आरोपी ने उनका रास्ता रोक लिया और शराब पीने के लिए रुपये मांगे। रुपये देने से इनकार करने पर आरोपी ने उनके साथ मारपीट की, जिससे उनकी कलाई, घुटने, कमर और कंधे में चोटें आईं। एक्स-रे जांच में बाएं कंधे में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। इसके आधार पर ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को छह माह के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी।
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अपील में तर्क दिया गया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। गवाहों के बयानों में विरोधाभास हैं। शिकायतकर्ता ने अदालत में 2,000 रुपये मांगने की बात कही, जबकि एफआईआर में 200 रुपये का उल्लेख है। एक प्रत्यक्षदर्शी ने स्वीकार किया कि शिकायतकर्ता नाली में गिर गया था और डॉक्टर ने भी माना कि ऐसी चोटें गिरने से लग सकती हैं।

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन का मामला मुख्य रूप से घायल के बयान पर आधारित है। हमले के संबंध में उसके बयान लगातार एक जैसे और विश्वसनीय रहे हैं। ऐसे में घायल गवाह के सुसंगत बयान को कमतर नहीं आंका जा सकता। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को सही मानते हुए अपील खारिज कर दी।

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