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बिना FIR जांच पर हाईकोर्ट सख्त: एसपी से मांगा हलफनामा, नरसिंहपुर केस में पुलिस को कड़ी फटकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Fri, 27 Mar 2026 06:37 PM IST
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सार

जबलपुर हाईकोर्ट ने बिना एफआईआर दर्ज किए पुलिस जांच शुरू करने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने नरसिंहपुर एसपी से हलफनामा मांगा है। मामले में संज्ञेय अपराध के बावजूद बिना एफआईआर कार्रवाई पर सवाल उठे है। 

Under which provision of law was the investigation conducted without registering an FIR?
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बिना एफआईआर दर्ज किए पुलिस द्वारा विवेचना शुरू करने के मामले को गंभीरता से लिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस ए के सिंह की युगलपीठ ने इस पर हैरानी जताते हुए पुलिस अधीक्षक नरसिंहपुर से व्यक्तिगत हलफनामा पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 31 मार्च को होगी।

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याचिकाकर्ता कसीमुद्दीन कुरैशी (जबलपुर निवासी) ने अपील में बताया कि उनके भाई गयासुद्दीन कुरैशी, जो नरसिंहपुर जिले के बोरीपार गांव में रहते थे, 26 मार्च 2025 को एक हादसे में घायल हो गए थे। उन्हें गंभीर हालत में जबलपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से 27 मार्च को इलाज के लिए नागपुर रेफर किया गया, लेकिन वहां उनकी मौत हो गई।

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जबलपुर अस्पताल की डिस्चार्ज रिपोर्ट में मृतक के सीने में चोट के निशान दर्ज थे। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मौत को संदिग्ध बताते हुए याचिकाकर्ता ने शव को कब्र से निकालकर दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की थी। इस संबंध में नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक को आवेदन दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।


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पूर्व में हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि 27 मार्च 2025 को दफन किए गए शव के प्रारंभिक पोस्टमार्टम में किसी नियम उल्लंघन का प्रमाण नहीं है। केवल आशंका के आधार पर पुनः पोस्टमार्टम का आदेश नहीं दिया जा सकता।

हालांकि, अपील की सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष ने बताया कि स्टेशन गंज थाना नरसिंहपुर के एसएचओ द्वारा संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए गए थे और जांच में मामला एफआईआर दर्ज करने योग्य नहीं पाया गया।

इस पर युगलपीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल उठाया कि संज्ञेय अपराध के मामले में बिना एफआईआर दर्ज किए किस कानूनी प्रावधान के तहत जांच की गई। अदालत ने यह भी पूछा कि पुलिस अधीक्षक और न्यायालय बिना एफआईआर के जांच के आदेश कैसे दे सकते हैं। कोर्ट ने इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए पुलिस अधीक्षक से विस्तृत हलफनामा मांगा है।

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