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जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मेडिकल कॉलेज से लापता बताए गए व्यक्ति की मौत की हुई पुष्टि, याचिका का निपटारा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Wed, 22 Apr 2026 10:33 PM IST
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सार
जबलपुर हाईकोर्ट में एक महिला द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निपटारा किया गया। महिला ने आरोप लगाया था कि उसके पति को मेडिकल कॉलेज में भर्ती किए जाने के बाद वह लापता हो गए थे।
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में सामने आया मामला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जबलपुर में हाईकोर्ट ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निपटारा करते हुए बताया कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल से लापता बताए गए व्यक्ति की वास्तव में सात महीने पहले मौत हो चुकी थी और पहचान न होने पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया था। घमापुर क्षेत्र निवासी महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उसके पति को शासकीय नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज से इलाज के दौरान भर्ती किया गया था, जिसके बाद वह अचानक लापता हो गए।
याचिका में लगाए गए आरोप
महिला ने बताया कि 12 अगस्त 2025 को पति को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और 13 अगस्त की शाम को वे गायब हो गए। इसके बाद उसने सखी ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कराई और पुलिस को सूचना दी। मानव अधिकार आयोग ने भी मामले में रिपोर्ट तलब की थी।
कोर्ट की शुरुआती कार्रवाई
हाईकोर्ट ने 17 जनवरी को लापता व्यक्ति को पेश करने के निर्देश दिए थे। 18 मार्च को पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में व्यक्ति जाते हुए नहीं दिखा और उसकी तलाश जारी है, पोस्टर भी लगाए गए थे।
ये भी पढ़ें- पानी भरे गड्ढे में मिला मछली विक्रेता का शव, इलाके में मचा हड़कंप; पोस्टमार्टम से परिजनों ने किया इनकार
सरकारी रिपोर्ट में खुलासा
मंगलवार को सुनवाई में सरकार ने रिपोर्ट दी कि व्यक्ति की मौत 13 अगस्त को हो चुकी थी। अस्पताल में अज्ञात व्यक्ति की मौत के बाद पुलिस को सूचना दी गई थी और मर्ग कायम कर जांच की गई थी। पहचान न होने पर शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। महिला ने 9 अक्टूबर को गुमशुदगी दर्ज कराई थी और बाद में 20 मार्च को कपड़ों के आधार पर शव की पहचान अपने पति के रूप में की। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अन्य किसी मांग या राहत के लिए स्वतंत्र रूप से याचिका दायर कर सकती है।
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याचिका में लगाए गए आरोप
महिला ने बताया कि 12 अगस्त 2025 को पति को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और 13 अगस्त की शाम को वे गायब हो गए। इसके बाद उसने सखी ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कराई और पुलिस को सूचना दी। मानव अधिकार आयोग ने भी मामले में रिपोर्ट तलब की थी।
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कोर्ट की शुरुआती कार्रवाई
हाईकोर्ट ने 17 जनवरी को लापता व्यक्ति को पेश करने के निर्देश दिए थे। 18 मार्च को पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में व्यक्ति जाते हुए नहीं दिखा और उसकी तलाश जारी है, पोस्टर भी लगाए गए थे।
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सरकारी रिपोर्ट में खुलासा
मंगलवार को सुनवाई में सरकार ने रिपोर्ट दी कि व्यक्ति की मौत 13 अगस्त को हो चुकी थी। अस्पताल में अज्ञात व्यक्ति की मौत के बाद पुलिस को सूचना दी गई थी और मर्ग कायम कर जांच की गई थी। पहचान न होने पर शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। महिला ने 9 अक्टूबर को गुमशुदगी दर्ज कराई थी और बाद में 20 मार्च को कपड़ों के आधार पर शव की पहचान अपने पति के रूप में की। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अन्य किसी मांग या राहत के लिए स्वतंत्र रूप से याचिका दायर कर सकती है।

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