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Jabalpur News: किसी निर्दोष व्यक्ति को नहीं ठहरा सकते दोषी, हाईकोर्ट ने सरकार की अपील को किया खारिज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Sun, 07 Jun 2026 10:41 AM IST
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सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नारकोटिक्स एक्ट मामले में तीन आरोपियों को दोषमुक्त किए जाने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए सरकार की अपील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि स्वतंत्र गवाहों के समर्थन और ठोस साक्ष्यों के अभाव में दोष सिद्ध नहीं होता। केवल विभागीय गवाहों के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। 

You cannot hold an innocent person guilty
मप्र हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार

ट्रायल कोर्ट द्वारा नारकोटिक्स एक्ट में तीन आरोपियों को दोषमुक्त किए जाने के खिलाफ सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस आरके वाणी की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा है कि अपीलीय अदालत दोषमुक्त किए जाने के आदेश में तभी दखल दे सकती है, जब रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों के आधार पर केवल यही निष्कर्ष निकाला जा सकता था कि आरोपी का अपराध उचित संदेह से परे साबित हो गया है। आपराधिक कानून के सभी सुरक्षा उपाय और कानूनी मूल्य न्याय में किसी भी तरह की विफलता को रोकने के लिए बनाए गए हैं। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ सरकार की अपील को खारिज कर दिया।



सरकार की तरफ से दायर की गई अपील में कहा गया था कि दमोह जिले के पथरिया थाना पुलिस ने चैकिंग के दौरान उन्होंने रमेश सिंह, गणेश सिंह लोधी तथा काका उर्फ सुशील को मोटरसाइकिल के बैग में गांजा ले जाते हुए गिरफ्तार किया था। पुलिस ने तीनों के खिलाफ नारकोटिक्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया था। ट्रायल कोर्ट ने दोनों पक्षों के सबूत दर्ज करने के बाद मौजूदा प्रतिवादियों को दोषमुक्त कर दिया। जिसके कारण उक्त अपील दायर की गई है।
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एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि एक स्वतंत्र गवाह अपने बयान से मुकर गया था तथा दूसरे स्वतंत्र गवाह से अभियोजन की तरफ से पूछताछ नहीं की गई। रिकॉर्ड पर सिर्फ विभागीय गवाहों के बयान हैं। अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाह एसआई जेपी वर्मा ने बताया कि वह अन्य पुलिस कर्मचारियों के साथ वाहन चैकिंग के लिए गए थे। तलाशी लेने के दौरान गाड़ी के लगे कपड़ों की डिक्की से प्रतिबंधित मादक पदार्थ बरामद हुआ था। उसके साथ उपस्थित पुलिसकर्मी ने अपने बयान में कहा है कि एसआई वर्मा को दो लोग द्वारा गांजा लाने की सूचना मिली थी। एसआई वर्मा का बयान है कि जब पुलिसकर्मी वाहन चेकिंग के लिए मौके पर पहुंचे थे और उन्हें गांजे के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने गांजा के संबंध में अपने वरिष्ठ अधिकारियों को कोई सूचना नहीं दी।

वह अपने बयान में मोटरसाइकिल बनाने वाली कंपनी, रजिस्ट्रेशन नंबर और रंग के बारे में कोई जानकारी नहीं दे पाए। मोटरसाइकिल में लगी कपड़े की डिक्की के रंग भी नहीं बता सके। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि उनकी मौजूदगी में सिर्फ गांजे की जांच की गई थी। उनकी उपस्थिति में कोई सैंपल नहीं लिया गया था। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ सरकार की अपील को खारिज कर दिया।

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