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Omkareshwar News: बांध से अचानक पानी छोड़े जाने पर टली बड़ी त्रासदी, खेड़ी घाट में 10 से अधिक मजदूर फंसे

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Fri, 02 Jan 2026 09:54 PM IST
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सार

Omkareshwar News: ओंकारेश्वर बांध से अचानक छोड़े गए पानी से खेड़ी घाट में पुल निर्माण में लगे 10 से अधिक मजदूर नदी में फंस गए। नाविकों ने समय रहते सभी को बचाया। घटना ने बांध प्रबंधन की सूचना व्यवस्था और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े किए।

Major tragedy averted due to sudden release of water from Omkareshwar dam laborers trapped at Khedi Ghat
नाविकों ने बचाई मजदूरों की जान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

ओंकारेश्वर बांध प्रबंधन की कथित लापरवाही एक बार फिर सामने आई, जब बिजली उत्पादन के लिए अचानक और अनुमान से कहीं अधिक पानी छोड़ दिया गया। इसके कारण नर्मदा नदी के खेड़ी घाट क्षेत्र में 10 से अधिक कंपनी के इंजीनियर और मजदूर बीच नदी में फंस गए। समय रहते स्थानीय नाविकों और गोताखोरों ने साहस दिखाते हुए सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। पानी का बहाव यदि थोड़ा और बढ़ जाता, तो यह घटना गंभीर जनहानि में बदल सकती थी।

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पुल निर्माण स्थल पर फंसे मजदूर
ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन से बड़वाह के बीच मोरटक्का खेड़ी घाट पर नर्मदा नदी पर पुराने पुल को तोड़कर मंगलम कंपनी द्वारा नया पुल बनाया जा रहा है। निर्माण के लिए नदी के आर-पार एप्रोच रोड तैयार की गई है, पिलर खड़े किए जा रहे हैं और भारी मशीनें नदी के भीतर कार्यरत हैं। इसी दौरान बांध से अचानक छोड़े गए पानी ने मजदूरों को नदी के बीच घेर लिया, जिससे मौके पर अफरातफरी मच गई।
 
कंपनी प्रबंधन ने उठाए सवाल
मंगलम कंपनी के मैनेजर पंकज पटेल ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ओंकारेश्वर बांध प्रबंधन जितना पानी छोड़ने की सूचना देता है, वास्तविक मात्रा उससे कहीं अधिक होती है। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी उन्हें करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है और इस बार मजदूरों की जान पर बन आई थी। गनीमत रही कि पास में नाव उपलब्ध थी, जिससे सभी को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। उन्होंने कहा कि वे कई बार शासन-प्रशासन और बांध प्रबंधन को लिखित और मौखिक रूप से सूचित कर चुके हैं कि अधिक पानी छोड़े जाने की स्थिति में कम से कम दो दिन पूर्व स्पष्ट जानकारी दी जाए, लेकिन अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई।
 
स्थानीय व्यापार और लोगों को नुकसान
अचानक जलस्तर बढ़ने से खेड़ी घाट क्षेत्र में नर्मदा तट पर लगी कई दुकानें पानी में डूब गईं, जिससे स्थानीय व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा। स्थानीय निवासी दशरथ केवट, मुकेश शुक्ला और सत्यदेव जोशी ने बताया कि कभी दिन में तो कभी रात में अचानक पानी छोड़ दिया जाता है। लोगों को इसकी पूर्व जानकारी नहीं मिल पाती और कई बार श्रद्धालु व मजदूर चट्टानों पर फंस जाते हैं। समय पर नाविकों के न पहुंचने पर बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
 
सूचना व्यवस्था पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि बांध प्रबंधन यह कहकर जिम्मेदारी से बचता है कि प्रशासन को सूचना दे दी गई है, लेकिन कितना पानी छोड़ा जाएगा, जलस्तर कहां तक पहुंचेगा और निचले इलाकों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, इसकी स्पष्ट जानकारी न तो निर्माण कंपनियों को दी जाती है और न ही आम जनता को।

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जिम्मेदार अधिकारी से संपर्क नहीं
इस मामले में ओंकारेश्वर बांध परियोजना के प्रमुख एवं महाप्रबंधक धीरेंद्र दीक्षित से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इससे बांध प्रबंधन की जवाबदेही को लेकर और सवाल खड़े हो गए हैं।
 
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की स्थिति बनी हो। इससे पहले भी ओंकारेश्वर क्षेत्र में श्रद्धालु चट्टानों पर फंस चुके हैं और कई बार नाविकों ने लोगों को डूबने से बचाया है। खंडवा कलेक्टर द्वारा बांध प्रबंधन को फटकार भी लगाई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद कार्यशैली में सुधार नहीं दिखा।
 
नर्मदा के निचले क्षेत्रों में हजारों लोग रोजी-रोटी, पर्यटन, निर्माण और व्यापार से जुड़े हैं। यदि इसी तरह बिना पूर्व सूचना और वास्तविक मात्रा बताए पानी छोड़ा जाता रहा, तो किसी दिन बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता।

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