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ये कैसा फेयरवेल: मैहर की सड़कों पर छात्रों का हुड़दंग, नाबालिगों के हाथ में स्टेयरिंग; नियमों की उड़ी धज्जियां
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैहर
Published by: मैहर ब्यूरो
Updated Thu, 29 Jan 2026 07:36 PM IST
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सार
MP: मैहर में शासकीय संदीपनी विद्यालय के फेयरवेल के बाद छात्रों ने यातायात नियमों की खुलेआम अवहेलना की। तेज रफ्तार, स्टंटबाजी और नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने का वीडियो वायरल होने पर कार्रवाई की मांग उठी है।
चलती गाड़ी की छत पर बैठे छात्र
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मैहर शहर में शासकीय संदीपनी विद्यालय के छात्रों द्वारा फेयरवेल पार्टी के बाद यातायात नियमों की खुलेआम अवहेलना का मामला सामने आया है। छात्रों का एक समूह सड़कों पर इस कदर लापरवाह और खतरनाक तरीके से वाहन चलाता नजर आया कि आम नागरिकों की जान जोखिम में पड़ गई। पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
फेयरवेल के बाद सड़कों पर हुड़दंग
जानकारी के अनुसार, शासकीय संदीपनी विद्यालय में आयोजित फेयरवेल कार्यक्रम के बाद छात्र 8 से 10 वाहनों के काफिले के रूप में शहर की सड़कों पर निकल पड़े। इनमें अधिकतर दोपहिया वाहन शामिल थे, जबकि कुछ चारपहिया वाहन भी देखे गए। छात्र तेज रफ्तार में वाहन चलाते हुए एक-दूसरे के साथ स्टंटबाजी करते नजर आए।
चलते वाहनों पर बैठकर की गई खतरनाक ड्राइविंग
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कुछ छात्र चलती गाड़ियों के ऊपर, छत और बोनट पर बैठकर सफर कर रहे हैं। कई जगहों पर वाहन लहराते हुए चलाए गए, जिससे सड़क पर चल रहे अन्य वाहन चालकों और राहगीरों में दहशत का माहौल बन गया। कुछ देर के लिए मुख्य मार्गों पर यातायात भी प्रभावित हुआ।
नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने का आरोप
सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि वाहनों को चलाने वालों में कई नाबालिग छात्र भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिनके पास न तो वैध ड्राइविंग लाइसेंस है और न ही सुरक्षा नियमों का पालन किया गया। बिना हेलमेट और सुरक्षा उपकरणों के इस तरह वाहन चलाना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।
पढ़ें: सिंचाई योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने खेतों में उतरे विधायक, किसानों ने बताया समय पर नहीं मिल रहा पानी
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
घटना का वीडियो किसी स्थानीय व्यक्ति द्वारा मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किया गया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। वीडियो वायरल होते ही नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है और लोग सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन और यातायात पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने यातायात पुलिस और प्रशासन की सक्रियता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े काफिले में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए छात्रों का निकलना और मौके पर कोई कार्रवाई न होना चिंताजनक है। नागरिकों की मांग है कि वायरल वीडियो के आधार पर छात्रों की पहचान कर उनके खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए।
विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी भी सवालों के घेरे में
मामले में विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि फेयरवेल जैसे आयोजनों के बाद छात्रों की गतिविधियों पर नियंत्रण और मार्गदर्शन करना स्कूल प्रबंधन की नैतिक जिम्मेदारी होती है, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
कार्रवाई की उठी मांग
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने मांग की है कि न केवल छात्रों बल्कि वाहन मालिकों और अभिभावकों पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए, जिससे भविष्य में इस तरह की लापरवाही पर रोक लग सके। फिलहाल, वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस द्वारा जांच शुरू किए जाने और संबंधित छात्रों की पहचान किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
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फेयरवेल के बाद सड़कों पर हुड़दंग
जानकारी के अनुसार, शासकीय संदीपनी विद्यालय में आयोजित फेयरवेल कार्यक्रम के बाद छात्र 8 से 10 वाहनों के काफिले के रूप में शहर की सड़कों पर निकल पड़े। इनमें अधिकतर दोपहिया वाहन शामिल थे, जबकि कुछ चारपहिया वाहन भी देखे गए। छात्र तेज रफ्तार में वाहन चलाते हुए एक-दूसरे के साथ स्टंटबाजी करते नजर आए।
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चलते वाहनों पर बैठकर की गई खतरनाक ड्राइविंग
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कुछ छात्र चलती गाड़ियों के ऊपर, छत और बोनट पर बैठकर सफर कर रहे हैं। कई जगहों पर वाहन लहराते हुए चलाए गए, जिससे सड़क पर चल रहे अन्य वाहन चालकों और राहगीरों में दहशत का माहौल बन गया। कुछ देर के लिए मुख्य मार्गों पर यातायात भी प्रभावित हुआ।
नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने का आरोप
सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि वाहनों को चलाने वालों में कई नाबालिग छात्र भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिनके पास न तो वैध ड्राइविंग लाइसेंस है और न ही सुरक्षा नियमों का पालन किया गया। बिना हेलमेट और सुरक्षा उपकरणों के इस तरह वाहन चलाना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।
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सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
घटना का वीडियो किसी स्थानीय व्यक्ति द्वारा मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किया गया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। वीडियो वायरल होते ही नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है और लोग सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन और यातायात पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने यातायात पुलिस और प्रशासन की सक्रियता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े काफिले में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए छात्रों का निकलना और मौके पर कोई कार्रवाई न होना चिंताजनक है। नागरिकों की मांग है कि वायरल वीडियो के आधार पर छात्रों की पहचान कर उनके खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए।
विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी भी सवालों के घेरे में
मामले में विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि फेयरवेल जैसे आयोजनों के बाद छात्रों की गतिविधियों पर नियंत्रण और मार्गदर्शन करना स्कूल प्रबंधन की नैतिक जिम्मेदारी होती है, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
कार्रवाई की उठी मांग
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने मांग की है कि न केवल छात्रों बल्कि वाहन मालिकों और अभिभावकों पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए, जिससे भविष्य में इस तरह की लापरवाही पर रोक लग सके। फिलहाल, वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस द्वारा जांच शुरू किए जाने और संबंधित छात्रों की पहचान किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

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