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Maihar News: नहर में गिरा अवयस्क सांभर, रातभर चले रेस्क्यू के बाद भी नहीं बच सकी जान; सुरक्षा पर सवाल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैहर Published by: मैहर ब्यूरो Updated Thu, 11 Jun 2026 07:43 PM IST
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सार

मैहर के मुकुंदपुर रेंज क्षेत्र में एक अवयस्क सांभर नहर में गिर गया, जिसे वन विभाग ने रातभर चले रेस्क्यू अभियान के बाद बाहर निकाल लिया। हालांकि लंबे संघर्ष और गंभीर हालत के कारण सांभर की मौत हो गई। 

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विस्तार

मैहर के मुकुंदपुर रेंज क्षेत्र में एक अवयस्क सांभर की नहर में गिरने से मौत हो गई। वन विभाग की टीम ने रातभर चले रेस्क्यू अभियान में उसे सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता तो हासिल कर ली, लेकिन जिंदगी और मौत के बीच लंबे समय तक चले संघर्ष के बाद सांभर ने दम तोड़ दिया। इस घटना ने एक बार फिर वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव निर्मित संरचनाओं से उत्पन्न खतरों को उजागर कर दिया है।



रात में मिली सूचना, तत्काल मौके पर पहुंची टीम
घटना जिगना सर्किल की जिगना बीट अंतर्गत राजस्व ग्राम छिरहाई की बताई जा रही है। मंगलवार रात करीब 9 बजे वन विभाग को सूचना मिली कि एक अवयस्क सांभर नहर में गिर गया है और बाहर निकलने के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। सूचना मिलते ही रेंजर विनोद अवस्थी के नेतृत्व में वन विभाग का अमला मौके पर रवाना हुआ मौके पर पहुंचने पर टीम ने देखा कि सांभर गहरे पानी और फिसलन भरी दीवारों के बीच फंसा हुआ था। वह कई बार बाहर निकलने का प्रयास कर चुका था, लेकिन सफल नहीं हो पा रहा था। उसकी शारीरिक ताकत भी धीरे-धीरे जवाब दे रही थी।
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अंधेरे और कठिन परिस्थितियों में चला रेस्क्यू
वन विभाग की टीम ने स्थानीय ग्रामीणों की मदद से तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया। रात का समय होने और नहर की संरचना जटिल होने के कारण बचाव कार्य आसान नहीं था। टीम को सांभर तक पहुंचने और उसे सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी करीब दो घंटे तक चले प्रयासों के बाद रात लगभग 11 बजे सांभर को नहर से बाहर निकाल लिया गया। रेस्क्यू सफल होने पर मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी।
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अत्यधिक कमजोरी बनी मौत की वजह
वन अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय तक पानी में फंसे रहने और लगातार संघर्ष करने के कारण सांभर पूरी तरह थक चुका था। बाहर निकाले जाने के बाद उसकी हालत बेहद गंभीर थी। वन अमला उसे संभालने और आवश्यक उपचार की व्यवस्था करने में जुटा था, लेकिन करीब 15 मिनट बाद ही उसकी मौत हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक तनाव, शारीरिक थकावट और पानी में रहने के कारण शरीर की ऊर्जा समाप्त हो जाने से उसकी जान गई।

पोस्टमार्टम के बाद किया गया अंतिम संस्कार
बुधवार को वन विभाग ने पशु चिकित्सक की मौजूदगी में मृत सांभर का पोस्टमार्टम कराया। प्रारंभिक जांच में मौत का कारण अत्यधिक कमजोरी और लंबे समय तक पानी में फंसे रहने से उत्पन्न शारीरिक तनाव माना गया। आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद वन विभाग ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार वन्यजीव का विधिवत अंतिम संस्कार कर दिया।

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नहरें बन रही हैं वन्यजीवों के लिए खतरा
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों और वन क्षेत्रों से गुजरने वाली नहरें कई बार जंगली जानवरों के लिए जानलेवा साबित होती हैं। पानी पीने या रास्ता पार करने के दौरान जानवर नहरों में गिर जाते हैं और बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिलने से उनकी मौत हो जाती है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नहरों के किनारे ऐसे स्थानों पर सुरक्षा इंतजाम किए जाएं जहां वन्यजीवों की आवाजाही अधिक रहती है। साथ ही नहरों में वन्यजीवों के बाहर निकलने के लिए ढलानयुक्त रैंप या विशेष निकास मार्ग भी बनाए जाएं।

वन विभाग ने लोगों से की अपील
वन विभाग ने क्षेत्र के ग्रामीणों से अपील की है कि यदि किसी वन्यजीव के संकट में होने की जानकारी मिले तो तुरंत विभाग को सूचना दें। समय पर सूचना मिलने से रेस्क्यू की संभावना बढ़ जाती है और वन्यजीवों की जान बचाई जा सकती है। मैहर में हुई यह घटना भले ही एक अवयस्क सांभर की मौत के साथ समाप्त हो गई हो, लेकिन यह वन्यजीव संरक्षण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल छोड़ गई है, जिन पर गंभीरता से काम किए जाने की आवश्यकता है।

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