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'मुझे सीधे आईएएस बना दीजिए': मंडला कलेक्टर से युवक ने मांगा पद, नौ साल की निराशा के बाद युवक क्यों बोला?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडला Published by: मंडला ब्यूरो Updated Wed, 25 Mar 2026 06:12 PM IST
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सार

मंडला जनसुनवाई में एक युवक ने कलेक्टर से खुद को सीधे आईएएस बनाने की मांग की। उसने बताया कि किताबों के अभाव में 9 साल बर्बाद हो गए और आर्थिक तंगी से परीक्षा नहीं दे सका। कलेक्टर ने संवेदनशीलता दिखाते हुए युवक को जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा।

in Mandla, Youth asks collector for direct IAS posting
मंडला में अनोखा मामला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मंडला जिला मुख्यालय में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक अजीबोगरीब मामला सामने आया, जिसने अधिकारियों के साथ-साथ मौजूद लोगों को भी हैरान कर दिया। बिछिया तहसील के ग्राम मांद से पहुंचे अंकित श्रीवास नामक युवक ने कलेक्टर से सीधे आईएएस अधिकारी बनाने की मांग कर दी।

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युवक ने बताया कि वह बीएससी की पढ़ाई पूरी कर चुका है और लंबे समय से यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करना चाहता था। उसने कलेक्टर के सामने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि वह पहले भी दो-तीन बार आवेदन देकर यूपीएससी की किताबें दिलाने की मांग कर चुका है, लेकिन उसे कोई सहायता नहीं मिल सकी।

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अंकित ने दावा किया कि संसाधनों और किताबों के अभाव में उसके करीब 9 साल बर्बाद हो गए। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह इस साल भी परीक्षा में शामिल नहीं हो पाया, जिससे वह बेहद निराश है।


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युवक ने कलेक्टर से कहा कि अब उसे सीधे आईएएस अधिकारी बना दिया जाए, ताकि वह मंडला जिले का विकास कर सके। उसने अपनी मंशा जाहिर करते हुए कहा कि वह जिले में बेहतर सड़कें बनवाना चाहता है, अस्पतालों की स्थिति सुधारना चाहता है और आम लोगों को अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराना चाहता है। अंकित का यह भी कहना था कि कलेक्टर के पास उसे अधिकारी बनाने की शक्ति है और वह मंडला के अलावा कहीं और नौकरी नहीं करना चाहता।

इस अनोखी मांग को सुनकर कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने धैर्य और संवेदनशीलता के साथ युवक से बातचीत की। उन्होंने उसकी मानसिक और सामाजिक स्थिति को समझने की कोशिश की। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जिला अस्पताल के सिविल सर्जन को बुलाया और युवक को उनके सुपुर्द कर दिया, ताकि उसकी स्वास्थ्य जांच और उचित देखभाल सुनिश्चित की जा सके। जनसुनवाई में सामने आया यह मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर यह युवक की निराशा और संघर्ष को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की संवेदनशीलता भी सामने लाता है।

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