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Mandla News: शहपुरा वन परिक्षेत्र में बाघ की आहट, नेशनल हाईवे पार करते दिखा, ग्रामीणों में दहशत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडला
Published by: मंडला ब्यूरो
Updated Thu, 15 Jan 2026 12:19 PM IST
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सार
डिंडोरी जिले के शहपुरा वन परिक्षेत्र में जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे पर बाघ देखे जाने की सूचना से ग्रामीणों में भय फैल गया। सूचना के बाद वन विभाग ने रात में सर्चिंग की, हालांकि पगमार्क नहीं मिले। एहतियातन निगरानी बढ़ाई गई है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
नेशनल हाईवे पर निगरानी के लिए पहुंची टीम।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डिंडोरी जिले के शहपुरा वन परिक्षेत्र में एक बार फिर बाघ की मौजूदगी की खबर से ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया है। बुधवार देर शाम जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे पर बाकी करौंदी गांव के पास बाघ को सड़क पार करते देखे जाने का दावा किया गया है। घटना के बाद वन विभाग की टीम अलर्ट मोड पर आ गई और रात में ही सर्चिंग अभियान शुरू कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार पशु चिकित्सा विभाग के सेवानिवृत्त उपसंचालक डॉ. एस. के. बाजपेई बुधवार शाम बरगांव जनजाति कल्याण केंद्र से जबलपुर की ओर जा रहे थे। रात करीब 8 बजे जब वे बाकी करौंदी गांव के पास नेशनल हाईवे से गुजर रहे थे। तभी उन्होंने एक बाघ को सड़क पार करते देखा। बाघ को सामने देखकर वे कुछ समय के लिए रुक गए और बाद में इसकी जानकारी स्थानीय ग्रामीणों को दी।
डॉ. बाजपेई से सूचना मिलते ही ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। आशंका को गंभीरता से लेते हुए ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दी। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रात करीब 2 बजे तक क्षेत्र में सघन सर्चिंग की गई। हालांकि, देर रात तक चली तलाशी के दौरान बाघ के पग चिह्न नहीं मिल सके। बाकी गांव के कोटवार रघुवीर वनवासी ने बताया कि गांव की ओर किसी जंगली जानवर के आने की सूचना के बाद उन्होंने पूरे गांव में मुनादी कराई। ग्रामीणों को रात के समय अकेले बाहर न निकलने, बच्चों और मवेशियों पर विशेष नजर रखने की हिदायत दी गई है। इसके चलते गांव में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
ये भी पढ़ें- पानी के बाद अब सब्जियों में भी जहर! प्रदूषण बोर्ड का खुलासा; हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी रिपोर्ट
वन परिक्षेत्र अधिकारी रेंजर जगदीश वासपे ने बताया कि सूचना मिलने के बाद विभागीय टीम तत्काल मौके पर पहुंची थी। फिलहाल बाघ के पगमार्क नहीं मिले हैं, लेकिन एहतियात के तौर पर दिन में दोबारा क्षेत्र का निरीक्षण किया जाएगा। जांच के बाद ही बाघ की वास्तविक मौजूदगी की पुष्टि हो सकेगी।
ग्रामीणों का कहना है कि शहपुरा वन परिक्षेत्र बांधवगढ़ नेशनल पार्क से सटा हुआ है। पिछले दो-तीन वर्षों में आसपास के कई गांवों में बाघ देखे जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसी वजह से लोग इस सूचना को हल्के में नहीं ले रहे हैं और वन विभाग से लगातार निगरानी की मांग कर रहे हैं।
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जानकारी के अनुसार पशु चिकित्सा विभाग के सेवानिवृत्त उपसंचालक डॉ. एस. के. बाजपेई बुधवार शाम बरगांव जनजाति कल्याण केंद्र से जबलपुर की ओर जा रहे थे। रात करीब 8 बजे जब वे बाकी करौंदी गांव के पास नेशनल हाईवे से गुजर रहे थे। तभी उन्होंने एक बाघ को सड़क पार करते देखा। बाघ को सामने देखकर वे कुछ समय के लिए रुक गए और बाद में इसकी जानकारी स्थानीय ग्रामीणों को दी।
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डॉ. बाजपेई से सूचना मिलते ही ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। आशंका को गंभीरता से लेते हुए ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दी। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रात करीब 2 बजे तक क्षेत्र में सघन सर्चिंग की गई। हालांकि, देर रात तक चली तलाशी के दौरान बाघ के पग चिह्न नहीं मिल सके। बाकी गांव के कोटवार रघुवीर वनवासी ने बताया कि गांव की ओर किसी जंगली जानवर के आने की सूचना के बाद उन्होंने पूरे गांव में मुनादी कराई। ग्रामीणों को रात के समय अकेले बाहर न निकलने, बच्चों और मवेशियों पर विशेष नजर रखने की हिदायत दी गई है। इसके चलते गांव में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
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वन परिक्षेत्र अधिकारी रेंजर जगदीश वासपे ने बताया कि सूचना मिलने के बाद विभागीय टीम तत्काल मौके पर पहुंची थी। फिलहाल बाघ के पगमार्क नहीं मिले हैं, लेकिन एहतियात के तौर पर दिन में दोबारा क्षेत्र का निरीक्षण किया जाएगा। जांच के बाद ही बाघ की वास्तविक मौजूदगी की पुष्टि हो सकेगी।
ग्रामीणों का कहना है कि शहपुरा वन परिक्षेत्र बांधवगढ़ नेशनल पार्क से सटा हुआ है। पिछले दो-तीन वर्षों में आसपास के कई गांवों में बाघ देखे जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसी वजह से लोग इस सूचना को हल्के में नहीं ले रहे हैं और वन विभाग से लगातार निगरानी की मांग कर रहे हैं।
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