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Mandsaur News: महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. आरके वर्मा निलंबित, उज्जैन किया अटैच, जानें पूरा मामला

न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, मंदसौर Published by: मंदसौर ब्यूरो Updated Thu, 09 Jan 2025 08:44 PM IST
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सार

राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने बुधवार देर शाम को एक आदेश जारी कर कॉलेज प्राचार्य डॉ. राजकुमार वर्मा को निलंबित कर दिया है।

Mandsaur News College Principal Dr. RK Verma suspended attached to Ujjain know whole matter
प्राचार्य डॉ. आरके वर्मा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मंदसौर जिले में पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरके वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। कारण ये बताया गया कि प्राचार्य के खिलाफ छात्रा से अभद्र वार्तालाप के कारण थाने में केस दर्ज हुआ था। ये अमर्यादित आचरण में आता है, इसलिए इन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उज्जैन अटैच किया जाता है।

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इससे पहले प्राचार्य को लेकर छात्र संगठन अभाविप और एनएसयूआई आमने-सामने हो चुके हैं। आजाद समाज पार्टी ने भी प्राचार्य के पक्ष में आंदोलन किया था। जबकि खुद जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष नरेश चंदवानी से भी प्रचार्य की कहासुनी हो गई थी। बीते करीब 15 दिन से ये सब घटनाक्रम चल रहा था। कई बार छात्र संगठनों ने चक्काजाम तक कर दिया था। लेकिन इतने दिन चले घटनाक्रम का अंत प्राचार्य के निलंबन से हुआ।
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राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने बुधवार देर शाम को एक आदेश जारी कर कॉलेज प्राचार्य डॉ राजकुमार वर्मा को निलंबित कर दिया है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी लेटर में लिखा है की डॉ राजकुमार वर्मा, प्राध्यापक, वाणिज्य, एवं प्रभारी प्राचार्य, राजीव गांधी शासकीय सातकोत्तर महाविद्यालय, मंदसौर द्वारा छात्राओं से अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने के संबंध में 21 दिसंबर 2024 को थाना वायडीनगर में धारा 79 बीएनएस के तहत केस दर्ज किया गया था।

डॉ. कपूर का ये कृत्य मप्र सिविल सेवा (आचरण) नियमों के विपरीत है। इसलिए मप्र सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। निलंबन अवधि में डॉ कूपर का मुख्यालय, क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा, उज्जैन संभाग उज्जैन निधर्धारित किया जाता है। निलंबन अवधि में डॉ. कूपर को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।

ये करना प्राचार्य को पड़ा भारी
प्राचार्य द्वारा जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष नरेश चंदवानी के कार्यकाल एक बंद अलमारी में रखो मिले थे। इन्हें पूर्व प्राचार्य डॉ. शमां के कार्यकाल में खरीदा गया था। जबकि जनभागीदारी अध्यक्ष कक्ष भी प्राचार्य ने हटवा दिया था। इतना ही नहीं कॉलेज में आने वाले छात्रो को आईडी कार्ड देखकर ही प्रवेश दिया जा रहा था। इससे अभाविप के पदाधिकारी कॉलेज में प्रवेश नहीं कर पा रहे थे। इसी को लेकर सताधारी संगठन के पदाधिकारी भी प्राचार्य से नाराज थे।

गाली-गलौज वाला ऑडियो हुआ था वायरल
इस पूरे मामले में पुलिस भी सत्ता के दबाव में काम करती हुई नजर आई। प्राचार्य द्वारा अभाविप पदाधिकारियों के खिलाफ आवेदन दिया। वहीं खुद एसपी से मिलकर शिकायत की। अभाविप पदाधिकारी द्वारा मोबाईल पर कॉल कर गाली देने की बात बताई। लेकिन एसपी ने केवल जांच का आश्वासन देकर प्रचार्य और अन्य प्रोफेसर को रवाना कर दिया।

प्राचार्य ने कहा, लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई
पीजी कॉलेज प्राचार्य डॉक्टर आरके वर्मा ने कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विपरित झूठी रिपोर्ट को आधार बनाकर विभाग द्वारा की गई कार्यवाही न्यायोचित नहीं है। इसे सक्षम स्तर पर चुनौती दी जाएगी। सत्य कभी पराजित नहीं होता है। सत्ता के दुरुप्रयोग का यह ज्वलंत उदाहरण है। लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

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