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Mandsaur News: वन्यजीवों के लिए स्वर्ग बन रहा गांधीसागर अभ्यारण्य, दुर्लभ वन्यजीव स्याहगोश कैमरे में हुआ कैद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंदसौर Published by: मंदसौर ब्यूरो Updated Sat, 12 Jul 2025 04:59 PM IST
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सार

मंदसौर के गांधीसागर अभयारण्य में पहली बार दुर्लभ स्याहगोश (कैरेकल) कैमरा ट्रैप में कैद हुआ। यह क्षेत्र चीतों समेत कई विलुप्तप्राय प्रजातियों का सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है।

Gandhi Sagar Sanctuary becomes a paradise for wildlife, rare wildlife Caracal has set up camp
ट्रैप कैमरे में कैद हुआ दुर्लभ प्रजाति का स्याहगोश।
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विस्तार

मंदसौर जिले का गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव मानचित्र पर चमक उठा है। इस बार अभयारण्य के कैमरा ट्रैप में विलुप्तप्राय मांसाहारी प्रजाति स्याहगोश (Caracal) पहली बार कैद हुआ है। यह घटना दर्शाती है कि गांधीसागर न केवल चीतों के कुनबे को बसाने की दिशा में प्रयासरत है, बल्कि यह दुर्लभ और संवेदनशील जीवों के लिए आदर्श निवास स्थल भी बनता जा रहा है।

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वन मंडलाधिकारी संजय रायखेरे ने बताया कि कैमरा ट्रैप में एक वयस्क नर स्याहगोश की स्पष्ट तस्वीर दर्ज हुई है। भारत में यह प्रजाति अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है और शुष्क, झाड़ीदार क्षेत्रों में ही जीवित रह पाती है। उन्होंने कहा कि अपने 15 साल के वन सेवा करियर में मैंने पहली बार कैराकल को देखा है। यह गांधीसागर के समृद्ध और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमाण है। अभयारण्य में तेंदुआ, भेड़िया, रीछ, सियार, भारतीय लोमड़ी, उदबिलाव, हायना, गिद्ध, मगरमच्छ समेत 226 पक्षियों और 18 स्तनधारी जीवों की सैकड़ों प्रजातियां सुरक्षित जीवन जी रही हैं। यहां 70 प्रजातियों के वृक्ष, 23 जड़ी-बूटियां, 14 मछलियां, 17 सरीसृप, 5 उभयचर, 15 तितलियां और 16 घास प्रजातियां पाई जाती हैं।
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गांधीसागर में चीतों प्रभास और पावक के परिवार को बसाने की कवायद चल रही है। इसके अतिरिक्त, दुर्लभ गिद्ध प्रजातियां जैसे हिमालयन और सिनेरियर का यह प्रमुख शीतकालीन प्रवास क्षेत्र बनता जा रहा है। पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि गांधीसागर अभयारण्य में वन्यजीवों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है। मगरमच्छों की संख्या 5000 के पार पहुंच गई है और बर्ड सर्वेक्षण में 226 प्रजातियां दर्ज की गई हैं। यह दर्शाता है कि इस क्षेत्र में मानव हस्तक्षेप कम होने के कारण यह वन्यजीवों का स्वर्ग बनता जा रहा है।

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इको सेंसिटिव जोन घोषित 
भारत सरकार ने गांधीसागर अभयारण्य की सीमाओं के बाहर तीन किलोमीटर का क्षेत्र इको सेंसिटिव जोन घोषित किया है, जिससे यहां की जैव विविधता के संरक्षण को बल मिलेगा। गांधीसागर की सफलता की कहानी सिर्फ एक जंगल की नहीं, बल्कि विलुप्त होती प्रकृति को दोबारा जीवन देने की एक प्रेरणादायक मिसाल बनती जा रही है। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के सतत प्रयासों से यह क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीव संरक्षण की मिसाल बनकर उभरा है।

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